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वेद पथ वैदिक ज्ञान का पथ

श्री रुद्रं चमकम्

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नवमोऽनुवाकः
दशमोऽनुवाकः
एकादशोऽनुवाकः
समापनम्

परिचय

श्री रुद्रं चमकम् कृष्ण यजुर्वेद की तैत्तिरीय संहिता (चतुर्थ काण्ड, सप्तम प्रपाठक) का चमकप्रश्न है। इसका नाम ‘च मे’ पद से पड़ा है, जो इसके प्रत्येक चरण में आता है — ‘यह भी मुझे प्राप्त हो’।

जहाँ नमकम् नमस्कार करता है, वहाँ चमकम् याचना करता है। ग्यारह अनुवाकों में यह क्रमशः प्राण और इन्द्रियाँ, ऐश्वर्य और सन्तति, अन्न और धान्य, धातुएँ और पशु, देवगण, यज्ञ के ग्रह और उपकरण, तथा अन्त में संख्याएँ माँगता है।

एकादश अनुवाक की संख्या-श्रृंखला उल्लेखनीय है: पहले विषम संख्याएँ (१, ३, ५ … ३३), फिर सम संख्याएँ (४, ८, १२ … ४८)। परम्परा इन्हें यज्ञ के छन्दों और इष्टकाओं से सम्बद्ध मानती है।

यह प्रार्थना भौतिक और आध्यात्मिक दोनों है — इसमें अन्न, गौ और स्वर्ण भी माँगे गए हैं, और सत्य, श्रद्धा, विवेक तथा अमृतत्व भी।

पाठ विधि

  • चमकम् का पाठ सदैव नमकम् के पश्चात् किया जाता है; उससे पूर्व लघुन्यासम् करें।
  • ‘एकादश रुद्र’ में ग्यारह बार नमकम् के साथ एक बार चमकम् का पाठ होता है; कहीं-कहीं प्रत्येक नमकम् के साथ चमकम् के एक अनुवाक का क्रम भी प्रचलित है।
  • स्वर-चिह्न वैदिक उच्चारण के लिए अंकित हैं।
  • सोमवार, प्रदोष, महाशिवरात्रि तथा श्रावण मास में इसका पाठ विशेष फलदायी है।

स्रोत 2

  • Sri Rudram (vignanam.org, Vaidika Vignanam) — sarala devanagari edition with simplified anusvaras, accents marked

    The Devanagari reproduced here follows this edition akshara-for-akshara, including its simplified anusvara spellings (पंच, संकाशं, कंठे) and its Vedic nasal-glide notation (रुद्रं-वैँ, शिखायां-वाँमदेवाः), which match the convention used elsewhere on this site. Thirteen readings were corrected against sanskritdocuments.org where this edition had dropped or swapped a consonant: वाघृदये → वाग्धृदये, मूर्द्नि → मूर्ध्नि, जठरेऽअग्नि → जठरेऽग्नि, प्रयच्चंतु → प्रयच्छंतु, अभिषिंचेच्चिवम् → अभिषिंचेच्छिवम्, मीडुष्टम → मीढुष्टम, विद्यद्भ्यश्च → विध्यद्भ्यश्च, आक्खिदते → आख्खिदते, प्रक्खिदते → प्रख्खिदते, सत्वानो → सत्त्वानो, जैष्ठ्यं → ज्यैष्ठ्यं, त्वष्ठा → त्वष्टा, श्यामाकाश्च → श्यामकाश्च.

  • chamakaprashnaH kR^iShNayajurvedIya sasvaraH (sanskritdocuments.org) — doc_veda/chamaka.html — taittirIyasaMhitA 4.7, with accents

    Independent accented witness for the Chamakam. Note that it reads चत्वरिग्ंशत् for चत्वारिग्ंशत् (forty) and doubles the क् in शक्क्वरी, where the vignanam edition followed here is correct.

अर्थ वेद पथ संपादकीय टीम द्वारा संकलित एवं संपादित हैं, और सामग्री की क्रमशः समीक्षा की जा रही है।

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