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वेद पथ वैदिक ज्ञान का पथ

श्रीशिवकवचम्

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प्रदर्शन

विनियोग 1

न्यास 2

ध्यानम् 3

पञ्चपूजा 1

कवच 27

मन्त्र 6

न्यास 1

फलश्रुति 16

समापन 1

परिचय

श्रीशिवकवचम् स्कन्दपुराण के ब्रह्मोत्तरखण्ड में वर्णित भगवान् साम्बसदाशिव का अत्यन्त प्रभावशाली रक्षा-कवच है, जिसे ऋषभयोगीश्वर ने राजकुमार भद्रायु को प्रदान किया था। विनियोग, करन्यास-अङ्गन्यास एवं ध्यान के पश्चात् शिव के विविध स्वरूप साधक के अंग-प्रत्यंग, दिशाओं, प्रहरों तथा अवस्थाओं की रक्षा करते हैं, और अन्त में इसके पाठ की महिमा (फलश्रुति) कही गई है।

संस्कृत मूल पाठ प्रामाणिक स्रोत से अक्षरशः प्रस्तुत है; अर्थ व्याख्यात्मक हैं तथा बीजमन्त्र एवं न्यास पंक्तियों के अर्थ प्रकार्यात्मक (functional) हैं। शुद्ध उच्चारण एवं विधि हेतु योग्य आचार्य का मार्गदर्शन श्रेयस्कर है।

स्रोत 2

  • Sanskrit Documents — श्रीशिवकवचम् — shivakavacham (Skanda Purana, Brahmottara Khanda), proofread ITRANS

    संस्कृत मूल पाठ इसी प्रामाणिक स्रोत से अक्षरशः; अर्थ व्याख्यात्मक। नमो-भगवते नामावली, जय-जय-रुद्र स्तुति एवं न्यास/बीज पंक्तियों के अर्थ प्रकार्यात्मक हैं। धार्मिक समीक्षा अपेक्षित।

  • Wisdom Library — Śivakavaca (Skanda Purāṇa, Brahmottara-khaṇḍa, Ch. 12) — English translation of the Sivakavacha chapter — verse-by-verse meaning

अर्थ वेद पथ संपादकीय टीम द्वारा संकलित एवं संपादित हैं, और सामग्री की क्रमशः समीक्षा की जा रही है।

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