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वेद पथ वैदिक ज्ञान का पथ

श्री शिव आरती - ॐ जय शिव ओंकारा

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परिचय

“ॐ जय शिव ओंकारा” भगवान शिव की सबसे प्रसिद्ध और लोकप्रिय आरती है। यह आरती शिव मंदिरों में प्रतिदिन सांध्य पूजा के समय गाई जाती है। इसमें भगवान शिव के विभिन्न रूपों, गुणों और उनकी महिमा का सुंदर वर्णन किया गया है।

आरती का महत्व

शिव आरती में ॐकार (ॐ) का विशेष महत्व है क्योंकि ॐ को परम ब्रह्म का प्रतीक माना जाता है। इस आरती में शिव को ब्रह्मा, विष्णु और महेश - त्रिदेवों के स्वरूप में वर्णित किया गया है। पंचमुख, त्रिनयन, त्रिशूलधारी शिव की स्तुति भक्तों को भवसागर से मुक्ति प्रदान करती है।

आरती करने की विधि

  1. शिव लिंग या शिव जी की प्रतिमा के सामने घी का दीपक जलाएं
  2. बिल्वपत्र, धतूरा, आक के फूल अर्पित करें
  3. आरती गाते हुए थाली को शिव जी के सामने घड़ी की दिशा में घुमाएं
  4. सोमवार को यह आरती करना विशेष शुभ माना जाता है
  5. आरती के बाद शिव जी पर जल अर्पित करें

इस आरती के बारे में

मूल भाषा
हिन्दी
रचयिता
परंपरा से Shivanand Swami को श्रेय
सामान्यतः किस दिन
सोमवारयह प्रचलित परंपरा है, कोई नियम नहीं।

साथ में पढ़ी जाने वाली

यह एक पारंपरिक पाठ है। लिप्यंतरण और अर्थ VedPath के लिए तैयार किए गए हैं। संपादकीय टिप्पणी

अर्थ वेद पथ संपादकीय टीम द्वारा संकलित एवं संपादित हैं, और सामग्री की क्रमशः समीक्षा की जा रही है।

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