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वेद पथ वैदिक ज्ञान का पथ
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श्रीदुर्गासप्तशती

श्रीदुर्गासप्तशती (देवीमाहात्म्य) मार्कण्डेय पुराण का भाग है, जिसमें ७०० श्लोकों में तीन चरित्रों तथा तेरह अध्यायों के माध्यम से माँ दुर्गा के महिषासुर, शुम्भ-निशुम्भ आदि असुरों के वध का वर्णन है। नवरात्रि में इसका पाठ विशेष फलदायी माना जाता है।

766 श्लोक

पूर्वाङ्ग 4

प्रथम चरित्र 1

महाकाली — मधु-कैटभ वध (अध्याय १)

  1. 1

    प्रथम अध्याय

    मधुकैटभ वध

मध्यम चरित्र 3

उत्तम चरित्र 9

उत्तराङ्ग 2

पाठ के पश्चात् पढ़े जाने वाले अंग

  1. अपराधक्षमापन स्तोत्र

  2. देवीसूक्तम्