जय शंकर भोले जय शिव शंकर
आकार
प्रदर्शन
जय शंकर भोले, जय शिव शंकर, जय शंकर भोले ।
सब देवों में देव निराले ॥
महादेव तुमने ही तो, सब देवों का सन्ताप हरा ।
सागर मन्थन में निकला विष, तुमने अपने कंठ भरा ॥
इसीलिए हर प्राणी तुमको नीलकंठ बोले ।
तेरे नाम अनेकों बाबा, तेरी महिमा न्यारी है ।
तेरे भेद अनोखे बाबा, जाने क्या संसारी ये ॥
तुम ही हो कैलाशपति शिव, पर्वत पर डोले ।
शीश तुम्हारे गंगा मैया, चन्द्र शिखर पर सोहे ।
तन पे सर्प विचरते रहते, भक्तों के मन को मोहे ॥
उसको कष्ट जगत में कैसा, नाम जो तेरा ले ।
जय शंकर भोले, जय शिव शंकर, जय शंकर भोले ।
सब देवों में देव निराले ॥
महादेव तुमने ही तो, सब देवों का सन्ताप हरा ।
सागर मन्थन में निकला विष, तुमने अपने कंठ भरा ॥
इसीलिए हर प्राणी तुमको नीलकंठ बोले ।
तेरे नाम अनेकों बाबा, तेरी महिमा न्यारी है ।
तेरे भेद अनोखे बाबा, जाने क्या संसारी ये ॥
तुम ही हो कैलाशपति शिव, पर्वत पर डोले ।
शीश तुम्हारे गंगा मैया, चन्द्र शिखर पर सोहे ।
तन पे सर्प विचरते रहते, भक्तों के मन को मोहे ॥
उसको कष्ट जगत में कैसा, नाम जो तेरा ले ।
अर्थ वेद पथ संपादकीय टीम द्वारा संकलित एवं संपादित हैं, और सामग्री की क्रमशः समीक्षा की जा रही है।