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वेद पथ वैदिक ज्ञान का पथ

ॐ नमः शिवाय मंत्र

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oṃ namaḥ śivāya

इस पाठ के बारे में

जप विधि

  1. यह मंत्र किसी भी समय, किसी भी स्थान पर जपा जा सकता है
  2. रुद्राक्ष माला से जप करना विशेष लाभकारी है
  3. 108 बार या इसके गुणक में जप करें
  4. सोमवार और महाशिवरात्रि पर जप विशेष फलदायी है
  5. श्रावण मास में नियमित जप करना अत्यंत शुभ माना जाता है
  6. जप करते समय भगवान शिव के स्वरूप का ध्यान करें

जप गणक

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पूर्ण

अर्थ

“ॐ नमः शिवाय” शैव संप्रदाय का सबसे पवित्र और महत्वपूर्ण मंत्र है। इसे पंचाक्षरी मंत्र (पाँच अक्षरों का मंत्र - न, मः, शि, वा, य) कहा जाता है। यह यजुर्वेद के श्री रुद्रम् में पाया जाता है।

संपूर्ण अर्थ: “मैं शिव को नमन करता हूँ” - यहाँ शिव का अर्थ है “कल्याणकारी” या “मंगलकारी”। यह मंत्र भगवान शिव के प्रति पूर्ण समर्पण और भक्ति का प्रतीक है।

लाभ

  • आत्मशुद्धि: मन, वचन और कर्म की शुद्धि होती है
  • शिव कृपा: भगवान शिव की विशेष कृपा प्राप्त होती है
  • पाप नाश: समस्त पापों का नाश होता है
  • मोक्ष प्राप्ति: जन्म-मरण के चक्र से मुक्ति का मार्ग प्रशस्त होता है
  • मानसिक शांति: चित्त को शांति और स्थिरता मिलती है
  • नकारात्मकता का नाश: नकारात्मक विचारों और ऊर्जाओं से मुक्ति

संदर्भ 1

  • Shri Rudram — तैत्तिरीय संहिता 4.5.8, नमकम्

    श्री रुद्रम् परंपरा में इस मंत्र के स्थान का सार्वजनिक संदर्भ; धार्मिक समीक्षा में शाखा-भेद सहित सटीक पाठ का किसी वैदिक संस्करण से मिलान करें।

    लाइसेंस: CC BY-SA 4.0 — Text adapted from Wikimedia projects, licensed CC BY-SA 4.0. Adaptations must be shared alike.

अर्थ वेद पथ संपादकीय टीम द्वारा संकलित एवं संपादित हैं, और सामग्री की क्रमशः समीक्षा की जा रही है।

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