महामृत्युंजय मंत्र
आकार
प्रदर्शन
ॐ त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम्
उर्वारुकमिव बन्धनान्मृत्योर्मुक्षीय माऽमृतात्
ॐ त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम्
शब्दार्थ
ॐ परम पवित्र ध्वनि
त्र्यम्बकम् तीन नेत्रों वाले (शिव)
यजामहे हम पूजा करते हैं
सुगन्धिम् सुगंधित, दिव्य सुगंध वाले
पुष्टिवर्धनम् पोषण बढ़ाने वाले
उर्वारुकमिव बन्धनान्मृत्योर्मुक्षीय माऽमृतात्
शब्दार्थ
उर्वारुकम् ककड़ी
इव जैसे, के समान
बन्धनात् बंधन से
मृत्योः मृत्यु से
मुक्षीय मुक्त करें
मा नहीं
अमृतात् अमरता से
अर्थ
महामृत्युंजय मंत्र भगवान शिव को समर्पित सबसे शक्तिशाली मंत्रों में से एक है। इसे “मृत्यु को जीतने वाला मंत्र” भी कहा जाता है। यह ऋग्वेद के सातवें मंडल में ऋषि वसिष्ठ द्वारा रचित है।
संपूर्ण अर्थ: “हम तीन नेत्रों वाले भगवान शिव की पूजा करते हैं, जो सुगंधित हैं और सभी प्राणियों का पोषण करते हैं। जैसे पका हुआ ककड़ी अपनी लता के बंधन से स्वतः मुक्त हो जाती है, वैसे ही हमें मृत्यु के बंधन से मुक्त करें, अमरता से नहीं।“
लाभ
- रोग निवारण: गंभीर रोगों से मुक्ति के लिए इस मंत्र का जप किया जाता है
- दीर्घायु: यह मंत्र दीर्घायु और स्वस्थ जीवन प्रदान करता है
- भय निवारण: मृत्यु और अकाल मृत्यु के भय से मुक्ति
- आध्यात्मिक शक्ति: आंतरिक शक्ति और साहस का विकास
- नकारात्मकता से रक्षा: नकारात्मक ऊर्जाओं और बुरी शक्तियों से सुरक्षा
जप विधि
- सोमवार को या महाशिवरात्रि पर जप करना विशेष फलदायी है
- रुद्राक्ष माला से जप करें
- न्यूनतम 108 बार (एक माला) जप करें
- जप करते समय भगवान शिव का ध्यान करें
- प्रातःकाल या सांध्यकाल में जप करना उत्तम है
जप गणक
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पूर्ण 🙏
स्रोत 1
- Mahamrityunjaya Mantra — Rigveda 7.59.12; also transmitted in Yajurveda recensions
Public reference for the Vedic verse location; verify exact accent and recensional variants against a Vedic edition during religious review.
अर्थ वेद पथ संपादकीय टीम द्वारा संकलित एवं संपादित हैं, और सामग्री की क्रमशः समीक्षा की जा रही है।