चन्द्रमा ललाट सोहे
आकार
प्रदर्शन
चन्द्रमा ललाट सोहे, जटाजूट गंगा सोहे ।
गले सोहे मुण्डमाल, सोहे अंग बाघम्बर ॥
भाल लोचन अति उज्ज्वल, गौर वर्ण बदन सोहे ।
अंग भभूत सोहे, अति सोहे त्रिशूल कर ॥
ब्रह्मा गणेश शेष, नारायण नारद मुनि ।
जपत नाम स्तुति गाये, जय हर हर हर शिव शंकर ॥
नृत्यत ताण्डव शिव, कैलाशपति महेश ।
डमरू नाद अति गंभीर, शब्द बजत हर हर ॥
चन्द्रमा ललाट सोहे, जटाजूट गंगा सोहे ।
गले सोहे मुण्डमाल, सोहे अंग बाघम्बर ॥
भाल लोचन अति उज्ज्वल, गौर वर्ण बदन सोहे ।
अंग भभूत सोहे, अति सोहे त्रिशूल कर ॥
ब्रह्मा गणेश शेष, नारायण नारद मुनि ।
जपत नाम स्तुति गाये, जय हर हर हर शिव शंकर ॥
नृत्यत ताण्डव शिव, कैलाशपति महेश ।
डमरू नाद अति गंभीर, शब्द बजत हर हर ॥
अर्थ वेद पथ संपादकीय टीम द्वारा संकलित एवं संपादित हैं, और सामग्री की क्रमशः समीक्षा की जा रही है।