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वेद पथ वैदिक ज्ञान का पथ

हनुमान मंत्र

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oṃ hanumate namaḥ

oṃ āñjaneyāya vidmahe vāyuputrāya dhīmahi| tanno hanumat pracodayāt||

इस पाठ के बारे में

जप विधि

  1. मंगलवार और शनिवार को जप करना विशेष लाभकारी है
  2. हनुमान जयंती पर जप विशेष फलदायी है
  3. 108 बार या 11 बार जप करें
  4. लाल रंग के आसन पर बैठकर जप करें
  5. सिंदूर और चमेली के तेल का दीपक जलाकर जप करें
  6. जप करते समय हनुमान जी के वीर स्वरूप का ध्यान करें
  7. ब्रह्मचर्य का पालन करते हुए जप करना अधिक फलदायी है

जप गणक

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पूर्ण

अर्थ

हनुमान मंत्र भगवान हनुमान को समर्पित हैं, जो शक्ति, साहस, भक्ति और सेवा के प्रतीक हैं। हनुमान जी भगवान राम के परम भक्त और वायुपुत्र हैं। इन्हें चिरंजीवी (अमर) माना जाता है।

“ॐ हनुमते नमः” हनुमान जी का मूल मंत्र है। हनुमान गायत्री मंत्र गायत्री छंद में रचित एक शक्तिशाली मंत्र है जो हनुमान जी से शक्ति और बुद्धि की प्रार्थना करता है।

लाभ

  • भय निवारण: सभी प्रकार के भय और संकटों से मुक्ति
  • शक्ति प्राप्ति: शारीरिक और मानसिक शक्ति में वृद्धि
  • साहस वृद्धि: कठिन परिस्थितियों में साहस और धैर्य मिलता है
  • बुरी शक्तियों से रक्षा: नकारात्मक शक्तियों और बुरी नज़र से सुरक्षा
  • रोग निवारण: शारीरिक रोगों से मुक्ति
  • भक्ति वृद्धि: श्रीराम के प्रति भक्ति भाव जागृत होता है

संदर्भ 2

  • Hanuman Chalisa tradition — Named as the basis of this entry in its seed file
  • Parasara Smriti — Named as the basis of this entry in its seed file

अर्थ वेद पथ संपादकीय टीम द्वारा संकलित एवं संपादित हैं, और सामग्री की क्रमशः समीक्षा की जा रही है।

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