उज्जैन
सप्त मोक्षदायिनी पुरियों में एक — क्षिप्रा तट पर बसी महाकाल की नगरी
- राज्य
- मध्य प्रदेश
- नदी
- क्षिप्रा
- मंदिर
- 4
- पाठ
- 12
यहाँ के मंदिर
उज्जैन — प्राचीन अवन्तिका — भारत की सात मोक्षदायिनी पुरियों में गिनी जाती है और क्षिप्रा नदी के तट पर बसी है। यहाँ द्वादश ज्योतिर्लिंगों में एकमात्र दक्षिणमुखी ज्योतिर्लिंग श्री महाकालेश्वर विराजते हैं, जिनकी प्रातःकालीन भस्म आरती विश्वप्रसिद्ध है। प्रत्येक बारह वर्ष में यहाँ सिंहस्थ कुम्भ का आयोजन होता है।
नगर की परिक्रमा में महाकाल के साथ शक्तिपीठ हरसिद्धि, नगर के क्षेत्रपाल काल भैरव और मंगल ग्रह के जन्मस्थान माने जाने वाले मंगलनाथ का दर्शन सम्मिलित है। नीचे प्रत्येक मंदिर के साथ वहाँ पढ़े जाने वाले पाठ संकलित हैं।
उज्जैन के मंदिर
श्री महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग 3
द्वादश ज्योतिर्लिंगों में एकमात्र दक्षिणमुखी। प्रातः ब्रह्ममुहूर्त में होने वाली भस्म आरती यहाँ की विशिष्ट परंपरा है।
श्री हरसिद्धि शक्तिपीठ 3
शक्तिपीठों में एक, जहाँ सती की कोहनी गिरी थी; राजा विक्रमादित्य की आराध्य देवी। दीपस्तंभों की संध्या आरती यहाँ की पहचान है — इसका कोई प्रकाशित आरती-पाठ परंपरा में नहीं है, अतः यहाँ पढ़े जाने वाले देवी-पाठ संकलित हैं।
श्री काल भैरव मंदिर 3
अष्ट भैरवों में प्रमुख; उज्जैन नगर के क्षेत्रपाल के रूप में पूजित।
श्री मंगलनाथ मंदिर 3
मत्स्य पुराण के अनुसार मंगल ग्रह का जन्मस्थान; मंगल दोष शांति के लिए भात पूजा यहीं होती है। मंदिर की "मंगल आरती" एक प्रातःकालीन विधि है, कोई गेय पाठ नहीं — यहाँ मङ्गल देव को समर्पित स्तोत्र एवं कवच संकलित हैं।