श्रीमङ्गलकवचम्
विनियोग 1
ध्यानम् 1
कवच 4
फलश्रुति 2
समापन 1
परिचय
श्रीमङ्गलकवचम् मङ्गल (कुज/अङ्गारक) ग्रह का रक्षा-कवच है, जिसे मार्कण्डेयपुराण में कश्यप ऋषि द्वारा प्रोक्त माना जाता है। इसमें साधक मङ्गल के विविध नामों — अङ्गारक, धरणीसुत, रक्ताम्बर, रक्तलोचन, शक्तिधर, ग्रहराज, कुज आदि — का स्मरण कर शिर से चरण तक अपने प्रत्येक अंग की रक्षा का वरण करता है, और अन्त में इसके पाठ-श्रवण का पुण्यफल कहा गया है।
संस्कृत मूल पाठ प्रामाणिक स्रोत से अक्षरशः प्रस्तुत है; अर्थ व्याख्यात्मक हैं। शुद्ध उच्चारण एवं विधि हेतु योग्य आचार्य का मार्गदर्शन श्रेयस्कर है।
स्रोत 2
- Sanskrit Documents — मङ्गलकवचम् — Mangalakavacham (Angaraka Kavacha), proofread by Ravin Bhalekar
संस्कृत मूल पाठ प्रामाणिक स्रोत से अक्षरशः; अर्थ व्याख्यात्मक। धार्मिक समीक्षा अपेक्षित।
- Hindupedia — Mangala Kavacham — English verse-by-verse meaning (body-part protection + phalashruti)
अर्थ वेद पथ संपादकीय टीम द्वारा संकलित एवं संपादित हैं, और सामग्री की क्रमशः समीक्षा की जा रही है।