श्रीनवग्रहकवचम्
कवच 4
फलश्रुति 6
समापन 1
परिचय
श्रीनवग्रहकवचम् नवों ग्रहों — सूर्य, चन्द्र, मंगल, बुध, बृहस्पति, शुक्र, शनि, राहु एवं केतु — की आराधना का रक्षा-कवच है। ब्रह्मा जी द्वारा कहे गए इस कवच में साधक प्रत्येक ग्रह से अपने भिन्न-भिन्न अंगों — शिर, मुख, हृदय, उदर, चरण आदि — की रक्षा का वरण करता है, और अन्त में इसके पाठ एवं धारण का फल (दीर्घायु, सन्तान, धन, रोग एवं बन्धन से मुक्ति, पापनाश) कहा गया है। मूल पाठ का पुष्पिका-वचन इसे ग्रहयामल के उत्तरखण्ड से संगृहीत बताता है।
संस्कृत मूल पाठ प्रामाणिक स्रोत से अक्षरशः प्रस्तुत है; अर्थ व्याख्यात्मक हैं। शुद्ध उच्चारण एवं विधि हेतु योग्य आचार्य का मार्गदर्शन श्रेयस्कर है।
स्रोत 2
- Sanskrit Documents — नवग्रहकवचम् — Navagrahakavacham, encoded/proofread (Grahayamala Uttarakhanda colophon)
संस्कृत मूल पाठ प्रामाणिक स्रोत से अक्षरशः; अर्थ व्याख्यात्मक। धार्मिक समीक्षा अपेक्षित।
- Temples In India Info — Navagraha Kavacham — English verse meaning (planetary body-part protection + phalashruti)
अर्थ वेद पथ संपादकीय टीम द्वारा संकलित एवं संपादित हैं, और सामग्री की क्रमशः समीक्षा की जा रही है।