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वेद पथ वैदिक ज्ञान का पथ

भगवद्गीता 15.4

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tataḥ padaṃ tatparimārgitavyaṃ yasmingatā na nivartanti bhūyaḥ | tameva cādyaṃ puruṣaṃ prapadye | yataḥ pravṛttiḥ prasṛtā purāṇī ||15-4||

भगवद्गीता पाठ

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अर्थ वेद पथ संपादकीय टीम द्वारा संकलित एवं संपादित हैं, और सामग्री की क्रमशः समीक्षा की जा रही है।

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