गोकुल में बजत बधाई
आकार
प्रदर्शन
गोकुल में बजत बधाई, ऐ री माई मैं सुनके आई ।
मात जसोदा बलि बलि जाये, प्रकटे हैं कृष्ण कन्हाई ॥
द्वारे भीड़ गोप गोपियन की, रत्न भूमि जब छाई ।
नाचत वृद्ध तरुण अरु बालक, रत्न भूमि सब धाई ।
झाँझर मृदंग मजीरा बाजे, और बाजत शहनाई ।
अति आनन्द होत गोकुल में, महिमा वर्णित न जाई ।
सूरदास स्वामी सुख सागर, सुन्दर श्याम कन्हाई ।
गोकुल में बजत बधाई, ऐ री माई मैं सुनके आई ।
मात जसोदा बलि बलि जाये, प्रकटे हैं कृष्ण कन्हाई ॥
द्वारे भीड़ गोप गोपियन की, रत्न भूमि जब छाई ।
नाचत वृद्ध तरुण अरु बालक, रत्न भूमि सब धाई ।
झाँझर मृदंग मजीरा बाजे, और बाजत शहनाई ।
अति आनन्द होत गोकुल में, महिमा वर्णित न जाई ।
सूरदास स्वामी सुख सागर, सुन्दर श्याम कन्हाई ।
अर्थ वेद पथ संपादकीय टीम द्वारा संकलित एवं संपादित हैं, और सामग्री की क्रमशः समीक्षा की जा रही है।