कृष्ण
Govinda, Gopal, Murari, Kanha, Shyam
परिचय
भगवान कृष्ण विष्णु के आठवें और सबसे पूर्ण अवतार माने जाते हैं। उन्हें पूर्ण पुरुषोत्तम (सम्पूर्ण अवतार) कहा जाता है। वे वसुदेव और देवकी के पुत्र थे तथा मथुरा में जन्मे और गोकुल-वृन्दावन में नन्द बाबा और यशोदा मैया के यहाँ पले-बढ़े।
कृष्ण का जीवन अत्यन्त विविधतापूर्ण है — बाल लीलाएँ, गोपियों संग रासलीला, कंस वध, द्वारकाधीश के रूप में शासन और महाभारत युद्ध में अर्जुन के सारथी बनकर गीता का दिव्य उपदेश। भगवद्गीता कृष्ण के मुख से कहा गया हिन्दू दर्शन का सर्वोच्च ग्रन्थ है।
स्वरूप और प्रतीक
कृष्ण का वर्ण घनश्याम (गहरे नीले) है। उनके प्रमुख स्वरूपों में बालकृष्ण (माखन चोरी करते हुए), वेणुगोपाल (बाँसुरी बजाते हुए), और गीतोपदेशक (अर्जुन को उपदेश देते हुए) प्रमुख हैं। वे मोरमुकुट, पीताम्बर और वैजयन्ती माला धारण करते हैं। उनके होंठों पर बाँसुरी और चरणों में नूपुर होते हैं। उनकी प्रिय गोपी राधा सदैव उनके साथ दर्शाई जाती हैं।
पौराणिक कथाएँ
बाल लीलाएँ: कृष्ण की बाल लीलाएँ अत्यन्त मनोहर हैं — माखन चोरी, कालिया नाग दमन, गोवर्धन पर्वत उठाना और पूतना वध। यशोदा मैया को मुँह में ब्रह्माण्ड के दर्शन कराना उनकी दिव्यता का प्रमाण है।
कंस वध: मामा कंस ने कृष्ण को मारने के अनेक प्रयास किए, परन्तु अन्त में कृष्ण ने मथुरा जाकर कंस का वध किया और अपने माता-पिता वसुदेव-देवकी को कारागार से मुक्त कराया।
गीता उपदेश: कुरुक्षेत्र के युद्धभूमि में जब अर्जुन ने अपने बन्धु-बान्धवों को सामने देखकर युद्ध करने से मना कर दिया, तब कृष्ण ने भगवद्गीता का उपदेश दिया जो कर्म, ज्ञान, भक्ति और योग का सार है।
प्रमुख मंदिर
- श्री कृष्ण जन्मभूमि मंदिर, मथुरा — कृष्ण की जन्मभूमि पर स्थित
- बांके बिहारी मंदिर, वृन्दावन — वैष्णव भक्तों का अत्यन्त प्रिय मंदिर
- द्वारकाधीश मंदिर, द्वारका, गुजरात — चार धामों में से एक
- जगन्नाथ मंदिर, पुरी, ओडिशा — कृष्ण के जगन्नाथ स्वरूप का प्रसिद्ध मंदिर
प्रमुख त्योहार
जन्माष्टमी भाद्रपद कृष्ण अष्टमी को कृष्ण के जन्मोत्सव के रूप में मनाई जाती है। होली ब्रज की रासलीला और राधा-कृष्ण प्रेम से जुड़ी है। गोवर्धन पूजा दीपावली के अगले दिन मनाई जाती है। दही हांडी और रास उत्सव भी कृष्ण से जुड़े प्रमुख उत्सव हैं।
संबंधित मंत्र और स्तोत्र
- मूल मंत्र: “ॐ नमो भगवते वासुदेवाय”
- हरे कृष्ण महामंत्र: “हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे, हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे”
- भगवद्गीता: कृष्ण का दिव्य उपदेश, महाभारत का अंश
- कृष्ण चालीसा: चालीस छन्दों में कृष्ण स्तुति
कृष्ण से संबंधित सामग्री
चालीसा 1
भजन 11
- दर्शन दो घनश्याम नाथ मेरी अखियाँ प्यासी
- छुप छुप आये श्याम ले के ग्वाल बाल
- गोकुल में बजत बधाई
- कोई कहे कान्हा कोई कहे श्याम
- कृष्ण जिनका नाम है गोकुल जिनका धाम है
- लल्ला की पैंजनिया बाजे रे
- राधे राधे जपो, चले आयेंगे बिहारी
- जग में सुन्दर हैं दो नाम
- जय जय राधा रमण हरि बोल
- हरि सुन्दर नन्द मुकुन्द
- श्री कृष्ण गोविन्द हरे मुरारी
कवच 1
अष्टोत्तर शतनामावली 1
श्लोक 24
- भगवद्गीता 1.1
- भगवद्गीता 1.10
- भगवद्गीता 1.11
- भगवद्गीता 1.12
- भगवद्गीता 1.13
- भगवद्गीता 1.14
- भगवद्गीता 1.15
- भगवद्गीता 1.16
- भगवद्गीता 1.17
- भगवद्गीता 1.18
- भगवद्गीता 1.19
- भगवद्गीता 1.2
- भगवद्गीता 1.20
- भगवद्गीता 1.21
- भगवद्गीता 1.22
- भगवद्गीता 1.23
- भगवद्गीता 1.24
- भगवद्गीता 1.25
- भगवद्गीता 1.26
- भगवद्गीता 1.27
- भगवद्गीता 1.28
- भगवद्गीता 1.29
- भगवद्गीता 1.3
- भगवद्गीता 1.30