लल्ला की पैंजनिया बाजे रे
आकार
प्रदर्शन
लल्ला की पैंजनिया बाजे रे, प्यारे की पैंजनिया बाजे रे ।
झूम झूम झूम झूम छननन ॥
जसुमति सूत को चलन सिखावे, अँगुरी पकड़ बिचकनिया ।
देखो री सखी, अँगुरी पकड़ बिचकनिया ॥
पीत झँगुलिया तन पर सोहे, सर टोपी लटकनिया ।
अंग अंग सब भूषण साजे, मन्द मन्द मुस्कनिया ।
तीन लोक जाके उदर बसत हैं, ताहे नचावे नन्दरनिया ।
लल्ला की पैंजनिया बाजे रे, प्यारे की पैंजनिया बाजे रे ।
झूम झूम झूम झूम छननन ॥
जसुमति सूत को चलन सिखावे, अँगुरी पकड़ बिचकनिया ।
देखो री सखी, अँगुरी पकड़ बिचकनिया ॥
पीत झँगुलिया तन पर सोहे, सर टोपी लटकनिया ।
अंग अंग सब भूषण साजे, मन्द मन्द मुस्कनिया ।
तीन लोक जाके उदर बसत हैं, ताहे नचावे नन्दरनिया ।
अर्थ वेद पथ संपादकीय टीम द्वारा संकलित एवं संपादित हैं, और सामग्री की क्रमशः समीक्षा की जा रही है।