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वेद पथ वैदिक ज्ञान का पथ

श्रीकेतुकवचम्

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आकार
प्रदर्शन

विनियोग 1

ध्यानम् 1

कवच 4

फलश्रुति 1

समापन 1

परिचय

श्रीकेतुकवचम् नवग्रहों में छाया-ग्रह केतु का रक्षा-कवच है, जो श्रीब्रह्माण्डपुराण से सम्बद्ध माना जाता है। इसमें साधक केतु के विविध रूपों एवं नामों — चित्रवर्ण, धूम्रद्युति, पिङ्गलाक्ष, सिंहिकासुत, ग्रहाधिप आदि — का स्मरण कर शिर से चरण तक अपने प्रत्येक अंग की रक्षा का वरण करता है, और अन्त में इसके धारण एवं पाठ का फल कहा गया है।

संस्कृत मूल पाठ प्रामाणिक स्रोत से अक्षरशः प्रस्तुत है; अर्थ व्याख्यात्मक हैं। शुद्ध उच्चारण एवं विधि हेतु योग्य आचार्य का मार्गदर्शन श्रेयस्कर है।

स्रोत 2

अर्थ वेद पथ संपादकीय टीम द्वारा संकलित एवं संपादित हैं, और सामग्री की क्रमशः समीक्षा की जा रही है।

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