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वेद पथ वैदिक ज्ञान का पथ

श्रीबृहस्पतिकवचम्

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आकार
प्रदर्शन

मङ्गलाचरण 1

विनियोग 1

ध्यानम् 1

कवच 5

फलश्रुति 1

समापन 1

परिचय

श्रीबृहस्पतिकवचम् देवगुरु बृहस्पति (गुरु ग्रह) का रक्षा-कवच है, जो श्रीब्रह्मयामल में वर्णित है। इसमें साधक बृहस्पति के विविध नामों — गुरु, सुरगुरु, सुराचार्य, वेदपारग, सर्वज्ञ, वागीश, देवगुरु, वाक्पति, विश्वात्मक आदि — का स्मरण कर शिर से चरण तक अपने प्रत्येक अंग की रक्षा का वरण करता है, और अन्त में त्रिकाल पाठ का फल कहा गया है।

संस्कृत मूल पाठ प्रामाणिक स्रोत से अक्षरशः प्रस्तुत है; अर्थ व्याख्यात्मक हैं। शुद्ध उच्चारण एवं विधि हेतु योग्य आचार्य का मार्गदर्शन श्रेयस्कर है।

स्रोत 2

अर्थ वेद पथ संपादकीय टीम द्वारा संकलित एवं संपादित हैं, और सामग्री की क्रमशः समीक्षा की जा रही है।

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