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वेद पथ वैदिक ज्ञान का पथ

श्रीगणेशकवचम्

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ध्यानम् 4

कवच 15

फलश्रुति 9

समापन 1

परिचय

श्रीगणेशकवचम् श्रीगणेशपुराण के उत्तरखण्ड (अध्याय ८५) में वर्णित एक प्राचीन रक्षा-कवच है, जिसे कश्यप ऋषि द्वारा कथित माना जाता है। इसमें भगवान् गणेश के विविध नामरूप — विनायक, सुमहोत्कट, महोदर, भालचन्द्र, हेरम्ब, वक्रतुण्ड आदि — साधक के शिखा से लेकर पाद-पर्यन्त प्रत्येक अंग तथा समस्त दिशाओं की रक्षा हेतु आवाहित किए जाते हैं। शत्रु, भय, भूत-पिशाच एवं विघ्नों से रक्षा हेतु इसका श्रद्धापूर्वक पाठ किया जाता है।

संस्कृत मूल प्रामाणिक स्रोत से अक्षरशः; अर्थ व्याख्यात्मक हैं।

स्रोत 2

  • Sanskrit Documents — श्रीगणेशकवचम् — gaNeshakavacham (Ganesha Purana, Uttara Khanda ch. 85), proofread ITRANS

    संस्कृत मूल पाठ इसी प्रामाणिक स्रोत से अक्षरशः; अर्थ व्याख्यात्मक। धार्मिक समीक्षा अपेक्षित।

  • Hindupedia — Ganesha Kavacham — Verse-by-verse English translation (tr. P. R. Ramachander)

अर्थ वेद पथ संपादकीय टीम द्वारा संकलित एवं संपादित हैं, और सामग्री की क्रमशः समीक्षा की जा रही है।

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