जय गणेश जय गणेश जय गणेश प्यारे
आकार
प्रदर्शन
जय गणेश, जय गणेश, जय गणेश प्यारे ।
एक दन्त अति विशाल, शोभित सिन्दूर भाल ।
मोतियन की कंठमाला, नैना रत्ना रे ॥
केसर को तिलक भाल, कुंडल दो लाल लाल ।
रत्न जड़ित कंगन कर, सोहत है न्यारे ॥
तुमको जो धरत ध्यान, वाको तुम देत मान ।
दुष्टन को करे नाश, भक्तन रखवारे ॥
सूर नर लेत नाम, पावत बैकुण्ठ धाम ।
तुलसीदास करत मान, चरण में तिहारे ॥
जय गणेश, जय गणेश, जय गणेश प्यारे ।
एक दन्त अति विशाल, शोभित सिन्दूर भाल ।
मोतियन की कंठमाला, नैना रत्ना रे ॥
केसर को तिलक भाल, कुंडल दो लाल लाल ।
रत्न जड़ित कंगन कर, सोहत है न्यारे ॥
तुमको जो धरत ध्यान, वाको तुम देत मान ।
दुष्टन को करे नाश, भक्तन रखवारे ॥
सूर नर लेत नाम, पावत बैकुण्ठ धाम ।
तुलसीदास करत मान, चरण में तिहारे ॥
अर्थ वेद पथ संपादकीय टीम द्वारा संकलित एवं संपादित हैं, और सामग्री की क्रमशः समीक्षा की जा रही है।