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वेद पथ वैदिक ज्ञान का पथ

श्री गणेश आरती - जय गणेश जय गणेश देवा

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jaya gaṇeśa jaya gaṇeśa jaya gaṇeśa devā| mātā jākī pārvatī pitā mahādevā||

eka danta dayāvanta cāra bhujā dhārī| māthe sindūra sohe mūse kī savārī|| jaya gaṇeśa jaya gaṇeśa jaya gaṇeśa devā||

pāna caṛhe phala caṛhe aura caṛhe mevā| laḍḍuana kā bhoga lage santa kareṃ sevā|| jaya gaṇeśa jaya gaṇeśa jaya gaṇeśa devā||

aṃdhana ko ām̐kha deta koṛhina ko kāyā| bāṃjhana ko putra deta nirdhana ko māyā|| jaya gaṇeśa jaya gaṇeśa jaya gaṇeśa devā||

sūra śyāma śaraṇa āe saphala kīje sevā| mātā jākī pārvatī pitā mahādevā|| jaya gaṇeśa jaya gaṇeśa jaya gaṇeśa devā||

इस पाठ के बारे में

परिचय

“जय गणेश जय गणेश देवा” भगवान श्री गणेश की सबसे लोकप्रिय और व्यापक रूप से गाई जाने वाली आरती है। यह आरती प्रत्येक हिन्दू घर में पूजा-अर्चना के समय गाई जाती है। भगवान गणेश को विघ्नहर्ता और प्रथम पूज्य माना जाता है, इसलिए किसी भी शुभ कार्य से पहले उनकी आरती की जाती है।

आरती का महत्व

गणेश आरती का विशेष महत्व है क्योंकि भगवान गणेश को सभी देवताओं में प्रथम पूज्य माना जाता है। इस आरती में उनके स्वरूप, गुणों और महिमा का वर्णन किया गया है। माता पार्वती और पिता महादेव के पुत्र के रूप में उनकी स्तुति की गई है। यह आरती भक्तों को विघ्नों से मुक्ति और मनोकामना पूर्ति का आशीर्वाद प्रदान करती है।

आरती करने की विधि

  1. गणेश जी की प्रतिमा या चित्र के सामने दीपक या घी का दीया जलाएं
  2. आरती की थाली में दीपक, फूल, अक्षत और धूप रखें
  3. आरती गाते हुए थाली को भगवान गणेश के सामने घड़ी की दिशा में घुमाएं
  4. आरती के बाद सभी भक्तजन हाथ जोड़कर प्रणाम करें
  5. प्रसाद के रूप में मोदक या लड्डू अर्पित करें

इस आरती के बारे में

मूल भाषा
हिन्दी
सामान्यतः किस दिन
मंगलवार · बुधवारयह प्रचलित परंपरा है, कोई नियम नहीं।

साथ में पढ़ी जाने वाली

संदर्भ 1

  • Traditional Hindu Aarti — Named as the basis of this entry in its seed file

अर्थ वेद पथ संपादकीय टीम द्वारा संकलित एवं संपादित हैं, और सामग्री की क्रमशः समीक्षा की जा रही है।

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