पद पाताल सीस अज धामा। अपर लोक अँग अँग बिश्रामा॥
भृकुटि बिलास भयंकर काला। नयन दिवाकर कच घन माला॥
pada pātāla sīsa aja dhāmā| apara loka am̐ga am̐ga biśrāmā||
bhṛkuṭi bilāsa bhayaṃkara kālā| nayana divākara kaca ghana mālā||
Meaning पाताल [जिन विश्वरूप भगवानका] चरण है, ब्रह्मललोक सिर है, अन्य (बीचके सब) लोकोंका विश्राम (स्थिति) जिनके अन्य भिन्न-भिन्न अज्ञॉपर है। भयड्भर काल जिनका भूकुटिसंचालन ( भौंहोंका चलना) है। सूर्य नेत्र है, बादलोंका समूह बाल है॥ १॥
जासु घ्रान अस्विनीकुमारा। निसि अरु दिवस निमेष अपारा॥
श्रवन दिसा दस बेद बखानी। मारुत स्वास निगम निज बानी॥
jāsu ghrāna asvinīkumārā| nisi aru divasa nimeṣa apārā||
śravana disā dasa beda bakhānī| māruta svāsa nigama nija bānī||
Meaning अश्विनीकुमार जिनकी नासिका हैं, रात और दिन जिनके अपार निमेष ( पलक मारना और खोलना) हैं। दसों दिशाएँ कान हैं, वेद ऐसा कहते हैं। वायु श्रास है और वेद जिनकी अपनी वाणी है॥ २॥
अधर लोभ जम दसन कराला। माया हास बाहु दिगपाला॥
आनन अनल अंबुपति जीहा। उतपति पालन प्रलय समीहा॥
adhara lobha jama dasana karālā| māyā hāsa bāhu digapālā||
ānana anala aṃbupati jīhā| utapati pālana pralaya samīhā||
Meaning लोभ जिनका अधर (होठ) है, यमराज भयानक दाँत है। माया हँसी है, दिक्पाल भुजाएँ हैं। अग्नि मुख है, वरुण जीभ है। उत्पत्ति, पालन और प्रलय जिनकी चेष्टा (क्रिया) है॥३॥
रोम राजि अष्टादस भारा। अस्थि सैल सरिता नस जारा॥
उदर उदधि अधगो जातना। जगमय प्रभु का बहु कलपना॥
roma rāji aṣṭādasa bhārā| asthi saila saritā nasa jārā||
udara udadhi adhago jātanā| jagamaya prabhu kā bahu kalapanā||
Meaning अठारह प्रकारकी असंख्य वनस्पतियाँ जिनकी रोमावली हैं, पर्वत अस्थियाँ हैं, नदियाँ नसोंका जाल हैं, समुद्र पेट है और नरक जिनकी नीचेकी इन्द्रियाँ हैं। इस प्रकार प्रभु विध्मय हैं, अधिक कल्पना (ऊहापोह) क्या की जाय ?॥ ४॥
अहंकार सिव बुद्धि अज मन ससि चित्त महान।
मनुज बास सचराचर रुप राम भगवान॥ १५ ( क )॥
ahaṃkāra siva buddhi aja mana sasi citta mahāna|
manuja bāsa sacarācara rupa rāma bhagavāna|| 15 ( ka )||
Meaning शिव जिनका अहंकार हैं, ब्रह्मा बुद्धि हैं, चन्द्रमा मन हैं और महान् (विष्णु) ही चित्त हैं। उन्हीं चराचररूप भगवान् श्रीरामजीने मनुष्यरूपमें निवास किया है॥ १५ (क)॥
अस बिचारि सुनु प्रानपति प्रभु सन बयरु बिहाइ।
प्रीति करहु रघुबीर पद मम अहिवात न जाइ॥ १५ ( ख )॥
asa bicāri sunu prānapati prabhu sana bayaru bihāi|
prīti karahu raghubīra pada mama ahivāta na jāi|| 15 ( kha )||
Meaning हे प्राणपति! सुनिये, ऐसा विचारकर प्रभुसे वैर छोड़कर श्रीरघुवीरके चरणोंमें प्रेम कीजिये, जिससे मेरा सुहाग न जाय॥ १५ (ख)॥
बिहँसा नारि बचन सुनि काना। अहो मोह महिमा बलवाना॥
नारि सुभाउ सत्य सब कहहीं। अवगुन आठ सदा उर रहहीं॥
biham̐sā nāri bacana suni kānā| aho moha mahimā balavānā||
nāri subhāu satya saba kahahīṃ| avaguna āṭha sadā ura rahahīṃ||
Meaning पत्नीके वचन कानोंसे सुनकर रावण खूब हँसा [और बोला-] अहो! मोह (अज्ञान) की महिमा बड़ी बलवान् है! स्त्रीका स्वभाव सब सत्य ही कहते हैं कि उसके हृदयमें आठ अवगुण सदा रहते हैं--॥१॥
साहस अनृत चपलता माया। भय अबिबेक असौच अदाया॥
रिपु कर रुप सकल तैं गावा। अति बिसाल भय मोहि सुनावा॥
sāhasa anṛta capalatā māyā| bhaya abibeka asauca adāyā||
ripu kara rupa sakala taiṃ gāvā| ati bisāla bhaya mohi sunāvā||
Meaning साहस, झूठ, चब्नलता, माया (छल), भय (डरपोकपन), अविवेक (मूर्खता), अपवित्रता और निर्दयता। तूने शत्रुका समग्र (विराट) रूप गाया और मुझे उसका बड़ा भारी भय सुनाया॥ २॥
सो सब प्रिया सहज बस मोरें। समुझि परा प्रसाद अब तोरें॥
जानिउँ प्रिया तोरि चतुराई। एहि बिधि कहहु मोरि प्रभुताई॥
so saba priyā sahaja basa moreṃ| samujhi parā prasāda aba toreṃ||
jānium̐ priyā tori caturāī| ehi bidhi kahahu mori prabhutāī||
Meaning हे प्रिये! वह सब (यह चराचर विश्व तो) स्वभावसे ही मेरे वशमें है। तेरी कृपासे मुझे यह अब समझ पड़ा। हे प्रिये ! तेरी चतुराई मैं जान गया। तू इस प्रकार (इसी बहाने) मेरी प्रभुताका बखान कर रही है॥ ३॥
तव बतकही गूढ़ मृगलोचनि। समुझत सुखद सुनत भय मोचनि॥
मंदोदरि मन महुँ अस ठयऊ। पियहि काल बस मतिभ्रम भयऊ॥
tava batakahī gūṛha mṛgalocani| samujhata sukhada sunata bhaya mocani||
maṃdodari mana mahum̐ asa ṭhayaū| piyahi kāla basa matibhrama bhayaū||
Meaning हे मृगनयनी ! तेरी बातें बड़ी गूढ़ (रहस्यभरी) हैं, समझनेपर सुख देनेवाली और सुननेसे भय छुड़ानेवाली हैं। मन्दोदरीने मनमें ऐसा निश्चय कर लिया कि पतिको कालवश मतिश्रम हो गया है॥ ४॥
एहि बिधि करत बिनोद बहु प्रात प्रगट दसकंध।
सहज असंक लंकपति सभाँ गयउ मद अंध॥ १६ ( क )॥
ehi bidhi karata binoda bahu prāta pragaṭa dasakaṃdha|
sahaja asaṃka laṃkapati sabhām̐ gayau mada aṃdha|| 16 ( ka )||
Meaning इस प्रकार [ अज्ञानवश] बहुत-से विनोद करते हुए रावणको सबेरा हो गया। तब स्वभावसे ही निडर और घमण्डमें अंधा लंकापति सभामें गया॥ १६ (क)॥
फूलह फरइ न बेत जदपि सुधा बरषहिं जलद।
मूरुख हृदयँ न चेत जौं गुर मिलहिं बिरंचि सम॥ १६ ( ख )॥
phūlaha pharai na beta jadapi sudhā baraṣahiṃ jalada|
mūrukha hṛdayam̐ na ceta jauṃ gura milahiṃ biraṃci sama|| 16 ( kha )||
Meaning यद्यपि बादल अमृत-सा जल बरसाते हैं, तो भी बेत फूलता-फलता नहीं। इसी प्रकार चाहे ब्रह्मके समान भी ज्ञानी गुरु मिलें, तो भी मूर्खके हदयमें चेत (ज्ञान) नहीं होता॥ १६ (ख)॥
इहाँ प्रात जागे रघुराई। पूछा मत सब सचिव बोलाई॥
कहहु बेगि का करिअ उपाई। जामवंत कह पद सिरु नाई॥
ihām̐ prāta jāge raghurāī| pūchā mata saba saciva bolāī||
kahahu begi kā karia upāī| jāmavaṃta kaha pada siru nāī||
Meaning यहाँ (सुबेल पर्वतपर ) प्रात: काल श्रीरघुनाथजी जागे और उन्होंने सब मन्त्रियोंको बुलाकर सलाह पूछी कि शीघ्र बताइये, अब क्या उपाय करना चाहिये ? जाम्बवान्ने श्रीरामजीके चरणोंमें सिर नवाकर कहा--॥ १॥
सुनु सर्बग्य सकल उर बासी। बुधि बल तेज धर्म गुन रासी॥
मंत्र कहउँ निज मति अनुसारा। दूत पठाइअ बालिकुमारा॥
sunu sarbagya sakala ura bāsī| budhi bala teja dharma guna rāsī||
maṃtra kahaum̐ nija mati anusārā| dūta paṭhāia bālikumārā||
Meaning हे सर्वज्ञ (सब कुछ जाननेवाले) ! हे सबके हृदयमें बसनेवाले ( अन्तर्यामी) ! हे बुद्धि बल, तेज, धर्म और गुणोंकी राशि! सुनिये! मैं अपनी बुद्धिकि अनुसार सलाह देता हूँ कि बालिकुमार अंगदको दूत बनाकर भेजा जाय!॥ २॥
नीक मंत्र सब के मन माना। अंगद सन कह कृपानिधाना॥
बालितनय बुधि बल गुन धामा। लंका जाहु तात मम कामा॥
nīka maṃtra saba ke mana mānā| aṃgada sana kaha kṛpānidhānā||
bālitanaya budhi bala guna dhāmā| laṃkā jāhu tāta mama kāmā||
Meaning यह अच्छी सलाह सबके मनमें जँच गयी। कृपाके निधान श्रीरामजीने अंगदसे कहा-हे बल, बुद्धि और गुणोंके धाम बालिपुत्र! हे तात! तुम मेरे कामके लिये लड़ा जाओ॥ ३॥
बहुत बुझाइ तुम्हहि का कहऊँ। परम चतुर मैं जानत अहऊँ॥
काजु हमार तासु हित होई। रिपु सन करेहु बतकही सोई॥
bahuta bujhāi tumhahi kā kahaūm̐| parama catura maiṃ jānata ahaūm̐||
kāju hamāra tāsu hita hoī| ripu sana karehu batakahī soī||
Meaning तुमको बहुत समझाकर क्या कहूँ! मैं जानता हूँ, तुम परम चतुर हो। शत्रुसे वही बातचीत करना जिससे हमारा काम हो और उसका कल्याण हो॥ ४॥
प्रभु अग्या धरि सीस चरन बंदि अंगद उठेउ।
prabhu agyā dhari sīsa carana baṃdi aṃgada uṭheu|
सोइ गुन सागर ईस राम कृपा जा पर करहु॥ १७ ( क )॥
soi guna sāgara īsa rāma kṛpā jā para karahu|| 17 ( ka )||
Meaning प्रभुकी आज्ञा सिर चढ़ाकर और उनके चरणोंकी वन्दना करके अंगदजी उठे [और बोले--] हे भगवान् श्रीरामजी ! आप जिसपर कृपा करें, वही गुणोंका समुद्र हो जाता है॥ १७ (क)॥
स्वयं सिद्ध सब काज नाथ मोहि आदरु दियउ।
अस बिचारि जुबराज तन पुलकित हरषित हियउ॥ १७( ख )॥
svayaṃ siddha saba kāja nātha mohi ādaru diyau|
asa bicāri jubarāja tana pulakita haraṣita hiyau|| 17( kha )||
Meaning स्वामीके सब कार्य अपने-आप सिद्ध हैं; यह तो प्रभुने मुझको आदर दिया है [जो मुझे अपने कार्यपर भेज रहे हैं]। ऐसा विचारकर युवराज अंगदका हृदय हर्षित और शरीर पुलकित हो गया॥ १७ (ख)॥
बंदि चरन उर धरि प्रभुताई। अंगद चलेउ सबहि सिरु नाई॥
प्रभु प्रताप उर सहज असंका। रन बाँकुरा बालिसुत बंका॥
baṃdi carana ura dhari prabhutāī| aṃgada caleu sabahi siru nāī||
prabhu pratāpa ura sahaja asaṃkā| rana bām̐kurā bālisuta baṃkā||
Meaning चरणोंकी वन्दना करके और भगवान्की प्रभुता हृदयमें धरकर अंगद सबको सिर नवाकर चले। प्रभुके प्रतापको हृदयमें धारण किये हुए रणबाँकुरे वीर बालिपुत्र स्वाभाविक ही निर्भय हैं॥ १॥
पुर पैठत रावन कर बेटा। खेलत रहा सो होड़ गे भेटा॥
बातहिं बात करष बढ़ि आई। जुगल अतुल बल पुनि तरुनाई॥
pura paiṭhata rāvana kara beṭā| khelata rahā so hoṛa ge bheṭā||
bātahiṃ bāta karaṣa baṛhi āī| jugala atula bala puni tarunāī||
Meaning लड्ामें प्रवेश करते ही रावणके पुत्रसे भेंट हो गयी, जो वहाँ खेल रहा था। बातों -ही-बातोंमें दोनोंमें झगड़ा बढ़ गया। [क्योंकि] दोनों ही अतुलनीय बलवान् थे और फिर दोनोंकी युवावस्था थी॥ २॥
तेहि अंगद कहुँ लात उठाई। गहि पद पटकेउ भूमि भर्वॉर्ड॥
निसिचर निकर देखि भट भारी। जहँ तहँ चले न सकहिं पुकारी॥
tehi aṃgada kahum̐ lāta uṭhāī| gahi pada paṭakeu bhūmi bharvôrḍa||
nisicara nikara dekhi bhaṭa bhārī| jaham̐ taham̐ cale na sakahiṃ pukārī||
Meaning उसने अंगदपर लात उठायी। अंगदने [वही] पैर पकड़कर उसे घुमाकर जमीनपर दे पटका (मार गिराया)। राक्षसके समूह भारी योद्धा देखकर जहाँ-तहाँ [ भाग] चले, वे डरके मारे पुकार भी न मचा सके॥ ३॥
एक एक सन मरमु न कहहीं। समुझि तासु बध चुप करि रहहीं॥
भयउ कोलाहल नगर मझारी। आवा कपि लंका जेहीं जारी॥
eka eka sana maramu na kahahīṃ| samujhi tāsu badha cupa kari rahahīṃ||
bhayau kolāhala nagara majhārī| āvā kapi laṃkā jehīṃ jārī||
Meaning एक-दूसरेको मर्म (असली बात) नहीं बतलाते, उस (रावणके पुत्र)का वध समझकर सब चुप मारकर रह जाते हैं। [ रावण-पुत्रकी मृत्यु जानकर और राक्षसोंको भयके मारे भागते देखकर। नगरभरमें कोलाहल मच गया कि जिसने लड्ठा जलायी थी, वही वानर फिर आ गया है॥ ४॥
अब धौं कहा करिहि करतारा। अति सभीत सब करहिं बिचारा॥
बिनु पूछें मगु देहिं दिखाई। जेहि बिलोक सोइ जाइ सुखाई॥
aba dhauṃ kahā karihi karatārā| ati sabhīta saba karahiṃ bicārā||
binu pūcheṃ magu dehiṃ dikhāī| jehi biloka soi jāi sukhāī||
Meaning सब अत्यन्त भयभीत होकर विचार करने लगे कि विधाता अब न जाने क्या करेगा। वे बिना पूछे ही अंगदको [रावणके दरबारकी] राह बता देते हैं। जिसे ही वे देखते हैं वही डरके मारे सूख जाता है॥५॥
गयउ सभा दरबार तब सुमिरि राम पद कंज।
सिंह ठवनि इत उत चितव धीर बीर बल पुंज॥ १८॥
gayau sabhā darabāra taba sumiri rāma pada kaṃja|
siṃha ṭhavani ita uta citava dhīra bīra bala puṃja|| 18||
Meaning श्रीरामजीके चरणकमलोंका स्मरण करके अंगद रावणकी सभाके द्वारपर गये। और वे धीर, वीर और बलकी राशि अंगद सिंहकी-सी ऐंड (शान) से इधर-उधर देखने लगे॥ १८॥
तुरत निसाचर एक पठावा। समाचार रावनहि जनावा॥
सुनत बिहँसि बोला दससीसा। आनहु बोलि कहाँ कर कीसा॥
turata nisācara eka paṭhāvā| samācāra rāvanahi janāvā||
sunata biham̐si bolā dasasīsā| ānahu boli kahām̐ kara kīsā||
Meaning तुरंत ही उन्होंने एक राक्षसको भेजा और रावणको अपने आनेका समाचार सूचित किया। सुनते ही रावण हँसकर बोला-बुला लाओ, [देखें] कहाँका बंदर है॥ १॥
आयसु पाइ दूत बहु धाए। कपिकुंजरहि बोलि लै आए॥
अंगद दीख दसानन बैंसें। सहित प्रान कज्जलगिरि जैसें॥
āyasu pāi dūta bahu dhāe| kapikuṃjarahi boli lai āe||
aṃgada dīkha dasānana baiṃseṃ| sahita prāna kajjalagiri jaiseṃ||
Meaning आज्ञा पाकर बहुत-से दूत दौड़े और वानरोंमें हाथीके समान अंगदको बुला लाये। अंगदने रावणको ऐसे बेठे हुए देखा जैसे कोई प्राणयुक्त (सजीव) काजलका पहाड़ हो!॥ २॥
भुजा बिटप सिर सृंग समाना। रोमावली लता जनु नाना॥
मुख नासिका नयन अरु काना। गिरि कंदरा खोह अनुमाना॥
bhujā biṭapa sira sṛṃga samānā| romāvalī latā janu nānā||
mukha nāsikā nayana aru kānā| giri kaṃdarā khoha anumānā||
Meaning भुजाएँ वृक्षोंके और सिर पर्वतोंके शिखरोंके समान हैं। रोमावली मानो बहुत-सी लताएँ हैं। मुँह, नाक, नेत्र और कान पर्वतकी कन्दराओं और खोहोंके बराबर हैं॥ ३॥
गयउ सभाँ मन नेकु न मुरा। बालितनय अतिबल बाँकुरा॥
उठे सभासद कपि कहुँ देखी। रावन उर भा क्रौध बिसेषी॥
gayau sabhām̐ mana neku na murā| bālitanaya atibala bām̐kurā||
uṭhe sabhāsada kapi kahum̐ dekhī| rāvana ura bhā kraudha biseṣī||
Meaning अत्यन्त बलवान् बाँके वीर बालिपुत्र अंगद सभामें गये, वे मनमें जरा भी नहीं झिझके। अंगदको देखते ही सब सभासदू उठ खड़े हुए। यह देखकर रावणके हृदयमें बड़ा क्रोध हुआ॥ ४॥
जथा मत्त गज जूथ महुँ पंचानन चलि जाइ।
राम प्रताप सुमिरि मन बैठ सभाँ सिरु नाइ॥ १९॥
jathā matta gaja jūtha mahum̐ paṃcānana cali jāi|
rāma pratāpa sumiri mana baiṭha sabhām̐ siru nāi|| 19||
Meaning जैसे मतवाले हाथियोंके झुंडमें सिंह [निःशड्ड होकर] चला जाता है, वैसे ही श्रीरामजीके प्रतापका हृदयमें स्मरण करके वे [निर्भय] सभामें सिर नवाकर बैठ गये॥ १९॥
कह दसकंठ कवन तैं बंदर। मैं रघुबीर दूत दसकंधर॥
मम जनकहि तोहि रही मिताई। तव हित कारन आयउँ भाई॥
kaha dasakaṃṭha kavana taiṃ baṃdara| maiṃ raghubīra dūta dasakaṃdhara||
mama janakahi tohi rahī mitāī| tava hita kārana āyaum̐ bhāī||
Meaning रावणने कहा--अरे बंदर! तू कौन है ? [ अंगदने कहा--] हे दशग्रीव! मैं श्रीरघुवीरका दूत हूँ। मेरे पितासे और तुमसे मित्रता थी। इसलिये हे भाई! मैं तुम्हारी भलाईके लिये ही आया हूँ॥ १॥
उत्तम कुल पुलस्ति कर नाती। सिव बिरंचि पूजेहु बहु भाँती॥
बर पायहु कीन्हेहु सब काजा। जीतेहु लोकपाल सब राजा॥
uttama kula pulasti kara nātī| siva biraṃci pūjehu bahu bhām̐tī||
bara pāyahu kīnhehu saba kājā| jītehu lokapāla saba rājā||
Meaning तुम्हारा उत्तम कुल है, पुलस्त्य ऋषिके तुम पौत्र हो। शिवजीकी और ब्रह्माजीकी तुमने बहुत प्रकारसे पूजा की है। उनसे वर पाये हैं और सब काम सिद्ध किये हैं। लोकपालों और सब राजाओंको तुमने जीत लिया है॥ २॥
नृप अभिमान मोह बस किंबा। हरि आनिहु सीता जगदंबा॥
अब सुभ कहा सुनहु तुम्ह मोरा। सब अपराध छमिहि प्रभु तोरा॥
nṛpa abhimāna moha basa kiṃbā| hari ānihu sītā jagadaṃbā||
aba subha kahā sunahu tumha morā| saba aparādha chamihi prabhu torā||
Meaning राजमदसे या मोहवश तुम जगज्जननी सीताजीको हर लाये हो। अब तुम मेरे शुभ वचन ( मेरी हितभरी सलाह) सुनो! [उसके अनुसार चलनेसे। प्रभु श्रीरामजी तुम्हारे सब अपराध क्षमा कर देंगे॥ ३॥
दसन गहहु तृन कंठ कुठारी। परिजन सहित संग निज नारी॥
सादर जनकसुता करि आगें। एहि बिधि चलहु सकल भय त्यागें॥
dasana gahahu tṛna kaṃṭha kuṭhārī| parijana sahita saṃga nija nārī||
sādara janakasutā kari āgeṃ| ehi bidhi calahu sakala bhaya tyāgeṃ||
Meaning दाँतोंमें तिनका दबाओ, गलेमें कुल्हाड़ी डालो और कुटुम्बियोंसहित अपनी स्त्रयोंको साथ लेकर, आदरपूर्वक जानकीजीको आगे करके, इस प्रकार सब भय छोड़कर चलो--॥ ४॥
प्रनतपाल रघुबंसमनि त्राहि त्राहि अब मोहि।
आरत गिरा सुनत प्रभु अभय करैगो तोहि॥ २०॥
pranatapāla raghubaṃsamani trāhi trāhi aba mohi|
ārata girā sunata prabhu abhaya karaigo tohi|| 20||
Meaning और 'हे शरणागतके पालन करनेवाले रघुवंशशिरोमणि श्रीरामजी! मेरी रक्षा कीजिये, रक्षा कीजिये।' [ इस प्रकार आर्त प्रार्थना करो।] आर्त पुकार सुनते ही प्रभु तुमको निर्भय कर देंगे॥ २०॥
रे कपिपोत बोलु संभारी। मूढ़ न जानेहि मोहि सुरारी॥
कहु निज नाम जनक कर भाई। केहि नातें मानिऐ मिताई॥
re kapipota bolu saṃbhārī| mūṛha na jānehi mohi surārī||
kahu nija nāma janaka kara bhāī| kehi nāteṃ māniai mitāī||
Meaning [ रावणने कहा--] आरे बंदरके बच्चे ! सँभालकर बोल ! मूर्ख ! मुझ देवताओंके शत्रुको तूने जाना नहीं ? अरे भाई! अपना और अपने बापका नाम तो बता। किस नातेसे मित्रता मानता है ?॥ १॥
अंगद नाम बालि कर बेटा। तासों कबहुँ भई ही भेटा॥
अंगद बचन सुनत सकुचाना। रहा बालि बानर मैं जाना॥
aṃgada nāma bāli kara beṭā| tāsoṃ kabahum̐ bhaī hī bheṭā||
aṃgada bacana sunata sakucānā| rahā bāli bānara maiṃ jānā||
Meaning [ अंगदने कहा--] मेरा नाम अंगद है, मैं बालिका पुत्र हूँ। उनसे कभी तुम्हारी भेंट हुई थी ? अंगदका वचन सुनते ही रावण कुछ सकुचा गया [और बोला--] हाँ, मैं जान गया (मुझे याद आ गया), बालि नामका एक बंदर था॥ २॥
अंगद तहीं बालि कर बालक। उपजेहु बंस अनल कुल घालक॥
गर्भ न गयहु ब्यर्थ तुम्ह जायहु। निज मुख तापस दूत कहायहु॥
aṃgada tahīṃ bāli kara bālaka| upajehu baṃsa anala kula ghālaka||
garbha na gayahu byartha tumha jāyahu| nija mukha tāpasa dūta kahāyahu||
Meaning अरे अंगद! तू ही बालिका लड़का है? अरे कुलनाशक! तू तो अपने कुलरूपी बाँसके लिये अग्रिरूप ही पैदा हुआ! गर्भमें ही क्यों न नष्ट हो गया? तू व्यर्थ ही पैदा हुआ जो अपने ही मुँहसे तपस्वियोंका दूत कहलाया!॥ ३॥
अब कहु कुसल बालि कहँ अहई। बिहँसि बचन तब अंगद कहई॥
दिन दस गएँ बालि पहिं जाई। बूझेहु कुसल सखा उर लाई॥
aba kahu kusala bāli kaham̐ ahaī| biham̐si bacana taba aṃgada kahaī||
dina dasa gaem̐ bāli pahiṃ jāī| būjhehu kusala sakhā ura lāī||
Meaning अब बालिकी कुशल तो बता, वह [आजकल] कहाँ है? तब अंगदने हँसकर कहा-दस (कुछ ) दिन बीतनेपर [स्वयं ही] बालिके पास जाकर, अपने मित्रको हृदयसे लगाकर, उसीसे कुशल पूछ लेना॥ ४॥
राम बिरोध कुसल जसि होई। सो सब तोहि सुनाइहि सोई॥
सुनु सठ भेद होइ मन ताकें। श्रीरघुबीर हृदय नहिं जाकें॥
rāma birodha kusala jasi hoī| so saba tohi sunāihi soī||
sunu saṭha bheda hoi mana tākeṃ| śrīraghubīra hṛdaya nahiṃ jākeṃ||
Meaning श्रीरामजीसे विरोध करनेपर जैसी कुशल होती है, वह सब तुमको वे सुनावेंगे। हे मूर्ख! सुन, भेद उसीके मनमें पड़ सकता है, ( भेदनीति उसीपर अपना प्रभाव डाल सकती है) जिसके हृदयमें श्रीरघुवीर न हों॥५॥
हम कुल घालक सत्य तुम्ह कुल पालक दससीस।
अंधउ बधिर न अस कहहिं नयन कान तव बीस॥ २१॥
hama kula ghālaka satya tumha kula pālaka dasasīsa|
aṃdhau badhira na asa kahahiṃ nayana kāna tava bīsa|| 21||
Meaning सच है, मैं तो कुलका नाश करनेवाला हूँ और हे रावण! तुम कुलके रक्षक हो। अंधे-बहरे भी ऐसी बात नहीं कहते, तुम्हारे तो बीस नेत्र और बीस कान हैं!॥ २१॥
सिव बिरंचि सुर मुनि समुदाई। चाहत जासु चरन सेवकाई॥
तासु दूत होइ हम कुल बोरा। अइसिहुँ मति उर बिहर न तोरा॥
siva biraṃci sura muni samudāī| cāhata jāsu carana sevakāī||
tāsu dūta hoi hama kula borā| aisihum̐ mati ura bihara na torā||
Meaning शिव, ब्रह्मा [ आदि] देवता और मुनियोंके समुदाय जिनके चरणोंकी सेवा [ करना] चाहते हैं, उनका दूत होकर मैंने कुलको डुबा दिया ? अरे ऐसी बुद्धि होनेपर भी तुम्हारा हृदय फट नहीं जाता ?॥ १॥
सुनि कठोर बानी कपि केरी। कहत दसानन नयन तरेरी॥
खल तव कठिन बचन सब सहऊँ। नीति धर्म मैं जानत अहऊँ॥
suni kaṭhora bānī kapi kerī| kahata dasānana nayana tarerī||
khala tava kaṭhina bacana saba sahaūm̐| nīti dharma maiṃ jānata ahaūm̐||
Meaning वानर (अंगद) की कठोर वाणी सुनकर रावण आँखें तरेरकर (तिरछी करके) बोला--3रे दुष्ट ! मैं तेर सब कठोर वचन इसीलिये सह रहा हूँ कि मैं नीति और धर्मको जानता हूँ (उन्हींकी रक्षा कर रहा हूँ)॥ २॥
कह कपि धर्मसीलता तोरी। हमहुँ सुनी कृत पर त्रिय चोरी॥
देखी नयन दूत रखवारी। बूड़ि न मरहु धर्म ब्रतधारी॥
kaha kapi dharmasīlatā torī| hamahum̐ sunī kṛta para triya corī||
dekhī nayana dūta rakhavārī| būṛi na marahu dharma bratadhārī||
Meaning अंगदने कहा--तुम्हारी धर्मशीलता मैंने भी सुनी है। [वह यह कि] तुमने परायी स्त्रीकी चोरी की है! और दूतकी रक्षाकी बात तो अपनी आंँखोंसे देख ली। ऐसे धर्मके बव्रतको धारण (पालन) करनेवाले तुम डूबकर मर नहीं जाते!॥ ३॥
कान नाक बिनु भगिनि निहारी। छमा कीन्हि तुम्ह धर्म बिचारी॥
धर्मसीलता तव जग जागी। पावा दरसु हमहुँ बड़भागी॥
kāna nāka binu bhagini nihārī| chamā kīnhi tumha dharma bicārī||
dharmasīlatā tava jaga jāgī| pāvā darasu hamahum̐ baṛabhāgī||
Meaning नाक-कानसे रहित बहिनको देखकर तुमने धर्म विचारकर ही तो क्षमा कर दिया था! तुम्हारी धर्मशीलता जग-जाहिर है। मैं भी बड़ा भाग्यवान् हूँ, जो मैंने तुम्हारा दर्शन पाया ?॥ ४॥
जनि जल्पसि जड़ जंतु कपि सठ बिलोकु मम बाहु।
लोकपाल बल बिपुल ससि ग्रसन हेतु सब राहु॥ २२ (क )॥
jani jalpasi jaṛa jaṃtu kapi saṭha biloku mama bāhu|
lokapāla bala bipula sasi grasana hetu saba rāhu|| 22 (ka )||
Meaning [ रावणने कहा--] अरे जड जन्तु वानर! व्यर्थ बक-बक न कर; अरे मूर्ख! मेरी भुजाएँ तो देख। ये सब लोकपालोंके विशाल बलरूपी चन्द्रमाको ग्रसनेके लिये राहु हैं॥ २२ (क)॥
पुनि नभ सर मम कर निकर कमलन्हि पर करि बास।
puni nabha sara mama kara nikara kamalanhi para kari bāsa|
सोभत भयउ मराल इव संभु सहित कैलास॥ २२ (ख )॥
sobhata bhayau marāla iva saṃbhu sahita kailāsa|| 22 (kha )||
Meaning फिर [तूने सुना ही होगा कि] आकाशरूपी तालाबमें मेरी भुजाओंरूपी कमलोंपर बसकर शिवजीसहित कैलास हंसके समान शोभाको प्रात हुआ था!॥ २२ (ख)॥
तुम्हरे कटक माझ सुनु अंगद। मो सन भिरिहि कवन जोधा बद॥
तव प्रभु नारि बिरहँ बलहीना। अनुज तासु दुख दुखी मलीना॥
tumhare kaṭaka mājha sunu aṃgada| mo sana bhirihi kavana jodhā bada||
tava prabhu nāri biraham̐ balahīnā| anuja tāsu dukha dukhī malīnā||
Meaning अरे अंगद! सुन; तेरी सेनामें बता, ऐसा कौन योद्धा है जो मुझसे भिड़ सकेगा। तेरा मालिक तो स्त्रीके वियोगमें बलहीन हो रहा है। और उसका छोटा भाई उसीके दुःखसे दु:खी और उदास है॥ १॥
तुम्ह सुग्रीव कूलद्रुम दोऊ। अनुज हमार भीरु अति सोऊ॥
जामवंत मंत्री अति बूढ़ा। सो कि होइ अब समरारूढ़ा॥
tumha sugrīva kūladruma doū| anuja hamāra bhīru ati soū||
jāmavaṃta maṃtrī ati būṛhā| so ki hoi aba samarārūṛhā||
Meaning तुम और सुग्रीव, दोनों [नदी] तटके वृक्ष हो। [रहा] मेरा छोटा भाई विभीषण, [सो] वह भी बड़ा डरपोक है। मन्त्री जाम्बवान्ू बहुत बूढ़ा है। वह अब लड़ाईमें क्या चढ़ (उद्यत हो) सकता है ?॥ २॥
सिल्पि कर्म जानहिं नल नीला। है कपि एक महा बलसीला॥
आवा प्रथम नगरु जेंहिं जारा। सुनत बचन कह बालिकुमारा॥
silpi karma jānahiṃ nala nīlā| hai kapi eka mahā balasīlā||
āvā prathama nagaru jeṃhiṃ jārā| sunata bacana kaha bālikumārā||
Meaning नल-नील तो शिल्प-कर्म जानते हैं (वे लड़ना क्या जानें ?)। हाँ, एक वानर जरूर महान् बलवान् है, जो पहले आया था, और जिसने लड़ा जलायी थी। यह वचन सुनते ही बालिपुत्र अंगदने कहा--॥ ३॥
सत्य बचन कहु निसिचर नाहा। साँचेहुँ कीस कीन्ह पुर दाहा॥
रावन नगर अल्प कपि दहई। सुनि अस बचन सत्य को कहई॥
satya bacana kahu nisicara nāhā| sām̐cehum̐ kīsa kīnha pura dāhā||
rāvana nagara alpa kapi dahaī| suni asa bacana satya ko kahaī||
Meaning हे राक्षसराज! सच्ची बात कहो! क्या उस वानरने सचमुच तुम्हारा नगर जला दिया? रावण [ जैसे जगद्विजयी योद्धा] का नगर एक छोटे-से वानरने जला दिया। ऐसे वचन सुनकर उन्हें सत्य कौन कहेगा ?॥ ४॥
जो अति सुभट सराहेहु रावन। सो सुग्रीव केर लघु धावन॥
चलइ बहुत सो बीर न होई। पठवा खबरि लेन हम सोई॥
jo ati subhaṭa sarāhehu rāvana| so sugrīva kera laghu dhāvana||
calai bahuta so bīra na hoī| paṭhavā khabari lena hama soī||
Meaning हे रावण! जिसको तुमने बहुत बड़ा योद्धा कहकर सराहा है, वह तो सुग्रीवका एक छोटा- सा दौड़कर चलनेवाला हरकारा है। वह बहुत चलता है, वीर नहीं है। उसको तो हमने [ केवल खबर लेनेके लिये भेजा था॥ ५॥
सत्य नगरु कपि जारेउ बिनु प्रभु आयसु पाइ।
फिरि न गयउ सुग्रीव पहिं तेहिं भय रहा लुकाइ॥ २३ (क )॥
satya nagaru kapi jāreu binu prabhu āyasu pāi|
phiri na gayau sugrīva pahiṃ tehiṃ bhaya rahā lukāi|| 23 (ka )||
Meaning क्या सचमुच ही उस वानरने प्रभुकी आज्ञा पाये बिना ही तुम्हारा नगर जला डाला? मालूम होता है, इसी डरसे वह लौटकर सुग्रीवके पास नहीं गया और कहीं छिप रहा!॥ २३ (क)॥
सत्य कहहि दसकंठ सब मोहि न सुनि कछु कोह।
कोउ न हमारें कटक अस तो सन लरत जो सोह॥ २३ ( ख )॥
satya kahahi dasakaṃṭha saba mohi na suni kachu koha|
kou na hamāreṃ kaṭaka asa to sana larata jo soha|| 23 ( kha )||
Meaning हे रावण! तुम सब सत्य ही कहते हो, मुझे सुनकर कुछ भी क्रोध नहीं है। सचमुच हमारी सेनामें कोई भी ऐसा नहीं है जो तुमसे लड़नेमें शोभा पाये॥ २३ (ख)॥
प्रीति बिरोध समान सन करिअ नीति असि आहि।
जौं मृगपति बध मेड़ुकन्हि भल कि कहइ कोउ ताहि॥ २३ ( ग )॥
prīti birodha samāna sana karia nīti asi āhi|
jauṃ mṛgapati badha meṛukanhi bhala ki kahai kou tāhi|| 23 ( ga )||
Meaning प्रीति और वैर बराबरीवालेसे ही करना चाहिये, नीति ऐसी ही है। सिंह यदि मेढकोंको मारे, तो कया उसे कोई भला कहेगा ?॥ २३ (ग)॥
जद्यपि लघुता राम कहुँ तोहि बधें बड़ दोष।
तदपि कठिन दसकंठ सुनु छत्र जाति कर रोष॥ २३ (घ)॥
jadyapi laghutā rāma kahum̐ tohi badheṃ baṛa doṣa|
tadapi kaṭhina dasakaṃṭha sunu chatra jāti kara roṣa|| 23 (gha)||
Meaning यद्यपि तुम्हें मारनेमें श्रीरामजीकी लघुता है और बड़ा दोष भी है, तथापि हे रावण! सुनो, क्षत्रियजातिका क्रोध बड़ा कठिन होता है॥ २३ (घ)॥
बक्र उक्ति धनु बचन सर हृदय दहेउ रिपु कीस।
प्रतिउत्तर सड़सिन्ह मनहुँ काढ़त भट दससीस॥ २३ ( ड)॥
bakra ukti dhanu bacana sara hṛdaya daheu ripu kīsa|
pratiuttara saṛasinha manahum̐ kāṛhata bhaṭa dasasīsa|| 23 ( ḍa)||
Meaning वक्रोकिरूपी धनुषसे वचनरूपी बाण मारकर अंगदने शत्रुका हृदय जला दिया। वीर रावण उन बाणोंको मानो प्रत्युत्तररूपी सँड्सियोंसे निकाल रहा है॥ २३ (ड)॥
हँसि बोलेउ दसमौलि तब कपि कर बड़ गुन एक।
जो प्रतिपालइ तासु हित करइ उपाय अनेक॥ २३ (च )॥
ham̐si boleu dasamauli taba kapi kara baṛa guna eka|
jo pratipālai tāsu hita karai upāya aneka|| 23 (ca )||
Meaning तब रावण हँसकर बोला--बंदरमें यह एक बड़ा गुण है कि जो उसे पालता है, उसका वह अनेकों उपायोंसे भला करनेकी चेष्टा करता है॥ २३ (च)॥
धन्य कीस जो निज प्रभु काजा। जहँ तहँ नाचइ परिहरि लाजा॥
नाचि कूदि करि लोग रिझाई। पति हित करइ धर्म निपुनाई॥
dhanya kīsa jo nija prabhu kājā| jaham̐ taham̐ nācai parihari lājā||
nāci kūdi kari loga rijhāī| pati hita karai dharma nipunāī||
Meaning बंदरको धन्य है, जो अपने मालिकके लिये लाज छोड़कर जहाँ-तहाँ नाचता है। नाच-कूदकर, लोगोंको रिझाकर, मालिकका हित करता है। यह उसके धर्मकी निपुणता है॥ १॥
अंगद स्वामिभक्त तव जाती। प्रभु गुन कस न कहसि एहि भाँती॥
मैं गुन गाहक परम सुजाना। तव कटु रटनि करउँ नहिं काना॥
aṃgada svāmibhakta tava jātī| prabhu guna kasa na kahasi ehi bhām̐tī||
maiṃ guna gāhaka parama sujānā| tava kaṭu raṭani karaum̐ nahiṃ kānā||
Meaning हे अंगद! तेरी जाति स्वामिभक्त है। [फिर भला] तू अपने मालिकके गुण इस प्रकार कैसे न बखानेगा ? मैं गुणग्राहक ( गुणोंका आदर करनेवाला) और परम सुजान (समझदार) हूँ, इसीसे तेरी जली-कटी बक-बकपर कान (ध्यान) नहीं देता॥ २॥
कह कपि तव गुन गाहकताई। सत्य पवनसुत मोहि सुनाई॥
बन बिधंसि सुत बधि पुर जारा। तदपि न तेहिं कछु कृत अपकारा॥
kaha kapi tava guna gāhakatāī| satya pavanasuta mohi sunāī||
bana bidhaṃsi suta badhi pura jārā| tadapi na tehiṃ kachu kṛta apakārā||
Meaning अंगदने कहा--तुम्हारी सच्ची गुणग्राहकता तो मुझे हनुमानूने सुनायी थी। उसने अशोकवनको विध्वंस (तहस-नहस) करके, तुम्हारे पुत्रको मारकर नगरको जला दिया था। तो भी [तुमने अपनी गुणग्राहकताके कारण यही समझा कि] उसने तुम्हारा कुछ भी अपकार नहीं किया॥ ३॥
सोइ बिचारि तव प्रकृति सुहाई। दसकंधर मैं कीन्हि ढिठाई॥
देखेउँ आइ जो कछु कपि भाषा। तुम्हरें लाज न रोष न माखा॥
soi bicāri tava prakṛti suhāī| dasakaṃdhara maiṃ kīnhi ḍhiṭhāī||
dekheum̐ āi jo kachu kapi bhāṣā| tumhareṃ lāja na roṣa na mākhā||
Meaning तुम्हारा वही सुन्दर स्वभाव विचारकर, हे दशग्रीव ! मैंने कुछ धृष्टता की है। हनुमान्ने जो कुछ कहा था, उसे आकर मैंने प्रत्यक्ष देख लिया कि तुम्हें न लजा है, न क्रोध है और न चिढ़ है॥ ४॥
जौं असि मति पितु खाए कीसा। कहि अस बचन हँसा दससीसा॥
पितहि खाइ खातेउँ पुनि तोही। अबहीं समुझि परा कछु मोही॥
jauṃ asi mati pitu khāe kīsā| kahi asa bacana ham̐sā dasasīsā||
pitahi khāi khāteum̐ puni tohī| abahīṃ samujhi parā kachu mohī||
Meaning [ रावण बोला--] अरे वानर! जब तेरी ऐसी बुद्धि है तभी तो तू बापको खा गया। ऐसा वचन कहकर रावण हँसा। अंगदने कहा--पिताको खाकर फिर तुमको भी खा डालता। परन्तु अभी तुरंत कुछ और ही बात मेरी समझमें आ गयी!॥ ५॥
बालि बिमल जस भाजन जानी। हतउँ न तोहि अधम अभिमानी॥
कहु रावन रावन जग केते। मैं निज श्रवन सुने सुनु जेते॥
bāli bimala jasa bhājana jānī| hataum̐ na tohi adhama abhimānī||
kahu rāvana rāvana jaga kete| maiṃ nija śravana sune sunu jete||
Meaning अरे नीच अभिमानी! बालिके निर्मल यशका पात्र (कारण) जानकर तुम्हें मैं नहीं मारता। रावण! यह तो बता कि जगतमें कितने रावण हैं ? मैंने जितने रावण अपने कानोंसे सुन रखे हैं, उन्हें सुन--॥ ६॥
बलिहि जितन एक गयउ पताला। राखेउ बाँधि सिसुन्ह हयसाला॥
खेलहिं बालक मारहिं जाई। दया लागि बलि दीन्ह छोड़ाई॥
balihi jitana eka gayau patālā| rākheu bām̐dhi sisunha hayasālā||
khelahiṃ bālaka mārahiṃ jāī| dayā lāgi bali dīnha choṛāī||
Meaning एक रावण तो बलिको जीतने पातालमें गया था, तब बच्चोंने उसे घुड़सालमें बाँध रखा। बालक खेलते थे और जा-जाकर उसे मारते थे। बलिको दया लगी, तब उन्होंने उसे छुड़ा दिया॥ ७॥
एक बहोरि सहसभुज देखा। धाइ धरा जिमि जंतु बिसेषा॥
कौतुक लागि भवन लै आवा। सो पुलस्ति मुनि जाइ छोड़ावा॥
eka bahori sahasabhuja dekhā| dhāi dharā jimi jaṃtu biseṣā||
kautuka lāgi bhavana lai āvā| so pulasti muni jāi choṛāvā||
Meaning फिर एक रावणको सहस्रबाहुने देखा, और उसने दौड़कर उसको एक विशेष प्रकारके (विचित्र) जन्तुकी तरह [समझकर] पकड़ लिया। तमाशेके लिये वह उसे घर ले आया। तब पुलस्त्य मुनिने जाकर उसे छुड़ाया॥ ८॥
एक कहत मोहि सकुच अति रहा बालि की काँख।
इन्ह महुँ रावन तैं कवन सत्य बदहि तजि माख॥ २४॥
eka kahata mohi sakuca ati rahā bāli kī kām̐kha|
inha mahum̐ rāvana taiṃ kavana satya badahi taji mākha|| 24||
Meaning एक रावणकी बात कहनेमें तो मुझे बड़ा संकोच हो रहा है--वह [ बहुत दिनोंतक] बालिकी काँखमें रहा था। इनमेंसे तुम कौन-से रावण हो? खीझना छोड़कर सच-सच बताओ॥ २४॥
सुनु सठ सोइ रावन बलसीला। हरगिरि जान जासु भुज लीला॥
जान उमापति जासु सुराई। पूजेउँ जेहि सिर सुमन चढ़ाई॥
sunu saṭha soi rāvana balasīlā| haragiri jāna jāsu bhuja līlā||
jāna umāpati jāsu surāī| pūjeum̐ jehi sira sumana caṛhāī||
Meaning [ रावणने कहा-] अरे मूर्ख! सुन, मैं वही बलवान् रावण हूँ जिसकी भुजाओंकी लीला (करामात) कैलास पर्वत जानता है। जिसकी शूरता उमापति महादेवजी जानते हैं, जिन्हें अपने सिररूपी पुष्प चढ़ा-चढ़ाकर मैंने पूजा था॥ १॥
सिर सरोज निज करन्हि उतारी। पूजेउँ अमित बार त्रिपुरारी॥
भुज बिक्रम जानहिं दिगपाला। सठ अजहूँ जिन्ह कें उर साला॥
sira saroja nija karanhi utārī| pūjeum̐ amita bāra tripurārī||
bhuja bikrama jānahiṃ digapālā| saṭha ajahūm̐ jinha keṃ ura sālā||
Meaning सिररूपी कमलोंको अपने हाथोंसे उतार-उतारकर मैंने अगणित बार त्रिपुरारि शिवजीकी पूजा की है। अरे मूर्ख ! मेरी भुजाओंका पराक्रम दिक्पाल जानते हैं, जिनके हृदयमें वह आज भी चुभ रहा है॥ २॥
जानहिं दिग्गज उर कठिनाई। जब जब भिरउँ जाइ बरिआई॥
जिन्ह के दसन कराल न फूटे। उर लागत मूलक इव टूटे॥
jānahiṃ diggaja ura kaṭhināī| jaba jaba bhiraum̐ jāi bariāī||
jinha ke dasana karāla na phūṭe| ura lāgata mūlaka iva ṭūṭe||
Meaning दिग्गज (दिशाओंके हाथी) मेरी छातीकी कठोरताको जानते हैं। जिनके भयानक दाँत, जब- जब जाकर मैं उनसे जबरदस्ती भिड़ा, मेरी छातीमें कभी नहीं फूटे (अपना चिह्न. भी नहीं बना सके), बल्कि मेरी छातीसे लगते ही वे मूलीकी तरह टूट गये॥ ३॥
जासु चलत डोलति इमि धरनी।
चढ़त मत्त गज जिमि लघु तरनी॥
jāsu calata ḍolati imi dharanī| caṛhata matta gaja jimi laghu taranī||
सोइ रावन जग बिदित प्रतापी।
सुनेहि न श्रवन अलीक प्रलापी॥
soi rāvana jaga bidita pratāpī| sunehi na śravana alīka pralāpī||
Meaning जिसके चलते समय पृथ्वी इस प्रकार हिलती है जैसे मतवाले हाथीके चढ़ते समय छोटी नाव ! मैं वही जगत्प्रसिद्ध प्रतापी रावण हूँ। अरे झूठी बकवाद करनेवाले! क्या तूने मुझको कानोंसे कभी नहीं सुना ?॥ ४॥
तेहि रावन कहँ लघु कहसि नर कर करसि बखान।
रे कपि बर्बर खर्ब खल अब जाना तव ग्यान॥ २५॥
tehi rāvana kaham̐ laghu kahasi nara kara karasi bakhāna|
re kapi barbara kharba khala aba jānā tava gyāna|| 25||
Meaning उस (महान् प्रतापी और जगत्प्रसिद्ध) रावणको (मुझे) तू छोटा कहता है और मनुष्यकी बड़ाई करता है? अरे दुष्ट, असभ्य, तुच्छ बंदर! अब मैंने तेरा ज्ञान जान लिया॥ २५॥
सुनि अंगद सकोप कह बानी। बोलु सँभारि अधम अभिमानी॥
सहसबाहु भुज गहन अपारा। दहन अनल सम जासु कुठारा॥
suni aṃgada sakopa kaha bānī| bolu sam̐bhāri adhama abhimānī||
sahasabāhu bhuja gahana apārā| dahana anala sama jāsu kuṭhārā||
Meaning रावणके ये वचन सुनकर अंगद क्रोधसहित वचन बोले-अरे नीच अभिमानी! सँभालकर (सोच-समझकर) बोल। जिनका फरसा सहस्त्रबाहुकी भुजाओंरूपी अपार वनको जलानेके लिये अग्िके समान था,॥ १॥
जासु परसु सागर खर धारा। बूड़े नृप अगनित बहु बारा॥
तासु गर्ब जेहि देखत भागा। सो नर क्यों दससीस अभागा॥
jāsu parasu sāgara khara dhārā| būṛe nṛpa aganita bahu bārā||
tāsu garba jehi dekhata bhāgā| so nara kyoṃ dasasīsa abhāgā||
Meaning जिनके फरसारूपी समुद्रकी तीव्र धारामें अनगिनत राजा अनेकों बार डूब गये, उन परशुरामजीका गर्व जिन्हें देखते ही भाग गया, अरे अभागे दशशीश ! वे मनुष्य क्योंकर हैं ?॥ २॥
राम मनुज कस रे सठ बंगा। धन्वी कामु नदी पुनि गंगा॥
पसु सुरधेनु कल्पतरु रूखा। अन्न दान अरु रस पीयूषा॥
rāma manuja kasa re saṭha baṃgā| dhanvī kāmu nadī puni gaṃgā||
pasu suradhenu kalpataru rūkhā| anna dāna aru rasa pīyūṣā||
Meaning क्यों रे मूर्ख उद्दण्ड! श्रीरामचन्द्रजी मनुष्य हैं ? कामदेव भी क्या धनुर्धारी है ? और गड़ाजी क्या नदी हैं ? कामधेनु क्या पशु है ? और कल्पवृक्ष क्या पेड़ है? अन्न भी क्या दान है ? और अमृत क्या रस है?॥ ३॥
बैनतेय खग अहि सहसानन। चिंतामनि पुनि उपल दसानन॥
सुनु मतिमंद लोक बैकुंठा। लाभ कि रघुपति भगति अकुंठा॥
bainateya khaga ahi sahasānana| ciṃtāmani puni upala dasānana||
sunu matimaṃda loka baikuṃṭhā| lābha ki raghupati bhagati akuṃṭhā||
Meaning गरुड़जी क्या पक्षी हैं ? शेषजी क्या सर्प हैं ? अरे रावण! चिन्तामणि भी क्या पत्थर है ? आरे ओ मूर्ख! सुन, वैकुण्ठ भी क्या लोक है ? और श्रीरघुनाथजीकी अखण्ड भक्ति क्या [ और लाभों- जैसा ही] लाभ है ?॥ ४॥
सेन सहित तब मान मथि बन उजारि पुर जारि।
कस रे सठ हनुमान कपि गयउ जो तव सुत मारि॥ २६॥
sena sahita taba māna mathi bana ujāri pura jāri|
kasa re saṭha hanumāna kapi gayau jo tava suta māri|| 26||
Meaning सेनासमेत तेरा मान मथकर, अशोकवनको उजाड़कर, नगरको जलाकर और तेरे पुत्रको मारकर जो लौट गये [तू उनका कुछ भी न बिगाड़ सका], क्यों रे दुष्ट! वे हनुमानूजी क्या वानर हैं ?॥ २६॥