भीष्म पंचक व्रत कथा
भीष्म पंचक व्रत कार्तिक मास की एकादशी से पूर्णिमा तक पाँच दिनों तक किया जाने वाला व्रत है, जिसकी स्थापना भगवान श्रीकृष्ण ने की थी। नीचे इस व्रत की कथा एवं पूजा विधि दी गई है।
द्वापर में जब श्रीकृष्ण का जन्म हुआ तब उन्होंने मनुष्य को पाप कर्म के प्रभाव से मुक्ति दिलाने के लिए और उत्तम गति प्राप्त करने के लिए कई व्रत और विधि विधान का निर्माण किया। वे व्रत और विधियां कलियुग के इस समय में मनुष्य के लिए अति कल्याणकारी हैं। जो मनुष्य पाप से मुक्ति की कामना रखते हैं और उत्तम गति प्राप्त करना चाहते हैं वे कृष्ण द्वारा स्थापित व्रत भीष्म पंचक का लाभ उठा सकते हैं।
भीष्म पंचक व्रत कथा
महाभारत युद्ध के बाद जब पांडवों की जीत हो गयी तब श्रीकृष्ण भगवान पांडवों को भीष्म पितामह के पास ले गये और उनसे अनुरोध किया कि आप पांडवों को अमृत स्वरूप ज्ञान प्रदान करें। भीष्म भी उन दिनों शर-शय्या पर लेटे हुए सूर्य के उत्तरायण होने की प्रतीक्षा कर रहे थे। कृष्ण के अनुरोध पर परम वीर और परम ज्ञानी भीष्म ने कृष्ण सहित पांडवों को राज धर्म, वर्ण धर्म एवं मोक्ष धर्म का ज्ञान दिया।
भीष्म द्वारा ज्ञान देने का क्रम एकादशी से लेकर पूर्णिमा तिथि यानी पांच दिनों तक चलता रहा। भीष्म ने जब पूरा ज्ञान दे दिया तब श्रीकृष्ण ने कहा कि आपने जो पांच दिनों में ज्ञान दिया है यह पांच दिन आज से अति मंगलकारी हो गया है। इन पांच दिनों को भविष्य में भीष्म पंचक व्रत के नाम से जाना जाएगा। यह व्रत अति मंगलकारी और पुण्यदायी होगा, जो श्रद्धापूर्वक इस व्रत को रखेंगे उन्हें मृत्यु पश्चात उत्तम गति प्राप्त होगी। यह व्रत पूर्व संचित पाप कर्मों से मुक्ति प्रदान करने वाली और कल्याणकारी होगी। इस प्रकार भीष्म पंचक व्रत की शुरूआत भगवान श्रीकृष्ण ने की।
भीष्म पंचक व्रत पूजा विधि
भीष्म पंचक व्रत में चार द्वार वाला एक मण्डप बनाया जाता है। मण्डप को गाय के गोबर से लीप कर मध्य में एक वेदी का निर्माण किया जाता है। वेदी पर तिल रखकर कलश स्थापित किया जाता है। इसके बाद भगवान वासुदेव की पूजा की जाती है। इस व्रत में एकादशी से लेकर पूर्णिमा तिथि तक घी के दीपक जलाए जाते हैं। भीष्म पंचक व्रत करने वाले को पांच दिनों तक संयम एवं सात्विकता का पालन करते हुए यज्ञादि कर्म करना चाहिए। इस व्रत में गंगा पुत्र भीष्म की तृप्ति के लिए श्राद्ध और तर्पण का भी विधान है।
स्रोत 1
- Vrat Katha (Archive.org - VratKathaBook) — भीष्म पंचक व्रत कथा, पृष्ठ 303–304
पुस्तक के स्कैन किए गए पृष्ठ-चित्रों से पाठ अक्षरशः उतारा गया और मानक हिंदी वर्तनी में सम्पादित किया गया।
अर्थ वेद पथ संपादकीय टीम द्वारा संकलित एवं संपादित हैं, और सामग्री की क्रमशः समीक्षा की जा रही है।