नव दुर्गा की जोत जगाओ रे
आकार
प्रदर्शन
नव दुर्गा की जोत जगाओ रे, कदली स्तंभों से द्वार सजाओ रे ।
मंगलमय पावन दिन आया रे, पावन बेला में मंगल गाओ रे ॥
गंगा जल से कलश भराओ, जमुना जल से कलश भराओ ।
श्री चरणों का अभिषेक कराओ रे ॥
रोली मोली अक्षत लेकर, मेहन्दी माँ के चरण चढ़ाओ रे ।
चूनर रत्न जड़ित अर्पण कर, गले मोतियन के हार पहनाओ रे ।
घर घर माँ की ममता बरसे, हर आँगन में रंगोली सजाओ रे ।
मंगल दीपों के थाल सजाकर, सब मिल माँ की आरती गाओ रे ।
हो जाये झंकृत ये तन मन, ऐसे स्वरों से जयकार लगाओ रे ॥
नव दुर्गा की जोत जगाओ रे, कदली स्तंभों से द्वार सजाओ रे ।
मंगलमय पावन दिन आया रे, पावन बेला में मंगल गाओ रे ॥
गंगा जल से कलश भराओ, जमुना जल से कलश भराओ ।
श्री चरणों का अभिषेक कराओ रे ॥
रोली मोली अक्षत लेकर, मेहन्दी माँ के चरण चढ़ाओ रे ।
चूनर रत्न जड़ित अर्पण कर, गले मोतियन के हार पहनाओ रे ।
घर घर माँ की ममता बरसे, हर आँगन में रंगोली सजाओ रे ।
मंगल दीपों के थाल सजाकर, सब मिल माँ की आरती गाओ रे ।
हो जाये झंकृत ये तन मन, ऐसे स्वरों से जयकार लगाओ रे ॥
अर्थ वेद पथ संपादकीय टीम द्वारा संकलित एवं संपादित हैं, और सामग्री की क्रमशः समीक्षा की जा रही है।