अम्बे के भवन में आओ रे
आकार
प्रदर्शन
अम्बे के भवन में आओ रे, मेरी मैया की जोत जलाओ रे ।
अष्टसिद्धि नवनिधि की दात्री, दीनों के बिगड़े काज बनाती ।
सब आके शीश झुकाओ रे ॥
सच्चे मन से जो भी ध्याये, मनवांछित फल वो ही पाये ।
सोने का छत्र चढ़ाओ रे ॥
सब देवों की माँ है शक्ति, दर्शन कर लो करके भक्ति ।
हृदय में ज्ञान जगाओ रे ॥
घर घर में अब करो मनादी, बोलो भक्तों जय माता जी ।
सभी मिलके भजन सुनाओ रे ॥
अम्बे के भवन में आओ रे, मेरी मैया की जोत जलाओ रे ।
अष्टसिद्धि नवनिधि की दात्री, दीनों के बिगड़े काज बनाती ।
सब आके शीश झुकाओ रे ॥
सच्चे मन से जो भी ध्याये, मनवांछित फल वो ही पाये ।
सोने का छत्र चढ़ाओ रे ॥
सब देवों की माँ है शक्ति, दर्शन कर लो करके भक्ति ।
हृदय में ज्ञान जगाओ रे ॥
घर घर में अब करो मनादी, बोलो भक्तों जय माता जी ।
सभी मिलके भजन सुनाओ रे ॥
अर्थ वेद पथ संपादकीय टीम द्वारा संकलित एवं संपादित हैं, और सामग्री की क्रमशः समीक्षा की जा रही है।