मोर कहा सुनि करहु उपाई। होइहि ईस्वर करिहि सहाई॥
सतीं जो तजी दच्छ मख देहा। जनमी जाइ हिमाचल गेहा॥
mora kahā suni karahu upāī| hoihi īsvara karihi sahāī||
satīṃ jo tajī daccha makha dehā| janamī jāi himācala gehā||
Meaning मेरी बात सुनकर उपाय करो। ईधर सहायता करेंगे और काम हो जायगा। सतीजीने जो दक्षके यज्ञमें देहका त्याग किया था, उन्होंने अब हिमाचलके घर जाकर जन्म लिया है॥ १॥
तेहिं तपु कीन्ह संभु पति लागी। सिव समाधि बैठे सबु त्यागी॥
जदपि अहइ असमंजस भारी। तदपि बात एक सुनहु हमारी॥
tehiṃ tapu kīnha saṃbhu pati lāgī| siva samādhi baiṭhe sabu tyāgī||
jadapi ahai asamaṃjasa bhārī| tadapi bāta eka sunahu hamārī||
Meaning उन्होंने शिवजीको पति बनानेके लिये तप किया है, इधर शिवजी सब छोड़-छाड़कर समाधि लगा बैठे हैं। यद्यपि है तो बड़े असमंजसकी बात; तथापि मेरी एक बात सुनो॥ २॥
पठवहु कामु जाइ सिव पाहीं। करै छोभु संकर मन माहीं॥
तब हम जाइ सिवहि सिर नाई। करवाउब बिबाहु बरिआई॥
paṭhavahu kāmu jāi siva pāhīṃ| karai chobhu saṃkara mana māhīṃ||
taba hama jāi sivahi sira nāī| karavāuba bibāhu bariāī||
Meaning तुम जाकर कामदेवको शिवजीके पास भेजो, वह शिवजीके मनमें क्षोभ उत्पन्न करे(उनकी समाधि भड् करे)। तब हम जाकर शिवजीके चरणोंमें सिर रख देंगे और जबरदस्ती (उन्हें राजी करके) विवाह करा देंगे॥ ३॥
एहि बिधि भलेहि देवहित होई। मर अति नीक कहइ सबु कोई॥
अस्तुति सुरन्ह कीन्हि अति हेतू। प्रगटेउ बिषमबान झषकेतू॥
ehi bidhi bhalehi devahita hoī| mara ati nīka kahai sabu koī||
astuti suranha kīnhi ati hetū| pragaṭeu biṣamabāna jhaṣaketū||
Meaning इस प्रकारसे भले ही देवताओंका हित हो [और तो कोई उपाय नहीं है] सबने कहा--यह सम्मति बहुत अच्छी है। फिर देवताओंने बड़े प्रेमसे स्तुति की, तब विषम (पाँच) बाण धारण करनेवाला और मछलीके चिह्नयुक्त ध्वजावाला कामदेव प्रकट हुआ॥ ४॥
सुरन्ह कहीं निज बिपति सब सुनि मन कीन्ह बिचार।
संभु बिरोध न कुसल मोहि बिहसि कहेउ अस मार॥ ८ ३॥
suranha kahīṃ nija bipati saba suni mana kīnha bicāra|
saṃbhu birodha na kusala mohi bihasi kaheu asa māra|| 8 3||
Meaning देवताओंने कामदेवसे अपनी सारी विपत्ति कही। सुनकर कामदेवने मनमें विचार किया और हँसकर देवताओंसे यों कहा कि शिवजीके साथ विरोध करनेमें मेरी कुशल नहीं है॥ ८३॥
तदपि करब मैं काजु तुम्हारा। श्रुति कह परम धरम उपकारा॥
पर हित लागि तजइ जो देही। संतत संत प्रसंसहिं तेही॥
tadapi karaba maiṃ kāju tumhārā| śruti kaha parama dharama upakārā||
para hita lāgi tajai jo dehī| saṃtata saṃta prasaṃsahiṃ tehī||
Meaning तथापि मैं तुम्हारा काम तो करूँगा, क्योंकि वेद दूसरेके उपकारको परम धर्म कहते हैं। जो दूसरेके हितके लिये अपना शरीर त्याग देता है, संत सदा उसकी बड़ाई करते हैं॥ १॥
अस कहि चलेउ सबहि सिरु नाई। सुमन धनुष कर सहित सहाई॥
चलत मार अस हृदयँ बिचारा। सिव बिरोध ध्रुव मरनु हमारा॥
asa kahi caleu sabahi siru nāī| sumana dhanuṣa kara sahita sahāī||
calata māra asa hṛdayam̐ bicārā| siva birodha dhruva maranu hamārā||
Meaning यों कह और सबको सिर नवाकर कामदेव अपने पुष्पके धनुषको हाथमें लेकर [वसन्तादि] सहायकोंके साथ चला। चलते समय कामदेवने हृदयमें ऐसा विचार किया कि शिवजीके साथ विरोध करनेसे मेरा मरण निश्चित है॥ २॥
तब आपन प्रभाउ बिस्तारा। निज बस कीन्ह सकल संसारा॥
कोपेउ जबहि बारिचरकेतू। छन महुँ मिटे सकल श्रुति सेतू॥
taba āpana prabhāu bistārā| nija basa kīnha sakala saṃsārā||
kopeu jabahi bāricaraketū| chana mahum̐ miṭe sakala śruti setū||
Meaning तब उसने अपना प्रभाव फैलाया और समस्त संसारको अपने वशमें कर लिया। जिस समय उस मछली के चिह्ठकी ध्वजावाले कामदेवने कोप किया, उस समय क्षणभरमें ही वेदोंकी सारी मर्यादा मिट गयी॥ ३॥
ब्रह्मचर्ज ब्रत संजम नाना। धीरज धरम ग्यान बिग्याना॥
सदाचार जप जोग बिरागा। सभय बिबेक कटकु सब भागा॥
brahmacarja brata saṃjama nānā| dhīraja dharama gyāna bigyānā||
sadācāra japa joga birāgā| sabhaya bibeka kaṭaku saba bhāgā||
Meaning ब्रह्मचर्य, नियम, नाना प्रकारके संयम, धीरज, धर्म, ज्ञान, विज्ञान, सदाचार, जप, योग, वैराग्य आदि विवेककी सारी सेना डरकर भाग गयी॥ ४॥
भागेउ बिबेकु सहाय सहित सो सुभट संजुग महि मुरे।
सदपग्रंथ पर्बत कंद्रन्हि महूं जाइ तेहि अवसर दुरे॥
होनिहार का करतार को रखवार जग खरभरु परा।
दुड़ माथ केहि रतिनाथ जेहि कहुं कोपि कर धनु सरु धरा॥
bhāgeu bibeku sahāya sahita so subhaṭa saṃjuga mahi mure|
sadapagraṃtha parbata kaṃdranhi mahūṃ jāi tehi avasara dure||
honihāra kā karatāra ko rakhavāra jaga kharabharu parā|
duṛa mātha kehi ratinātha jehi kahuṃ kopi kara dhanu saru dharā||
Meaning विवेक अपने सहायकोंसहित भाग गया, उसके योद्धा रणभूमिसे पीठ दिखा गये। उस समय वे सब सद्ग्रन्थरूपी पर्वतकी कन्दराओंमें जा छिपे (अर्थात् ज्ञान, वैराग्य, संयम, नियम, सदाचारादि ग्रन्थोंमें ही लिखे रह गये; उनका आचरण छूट गया)। सारे जगत्में खलबली मच गयी [और सब कहने लगे-] हे विधाता! अब क्या होनेवाला है, हमारी रक्षा कौन करेगा ? ऐसा दो सिरवाला कौन है, जिसके लिये रतिके पति कामदेवने कोप करके हाथमें धनुष- बाण उठाया है?
जे सजीव जग अचर चर नारि पुरुष अस नाम।
ते निज निज मरजाद तजि भए सकल बस काम॥ ८४॥
je sajīva jaga acara cara nāri puruṣa asa nāma|
te nija nija marajāda taji bhae sakala basa kāma|| 84||
Meaning जगतमें स्त्री-पुरुष संज्ञावाले जितने चर-अचर प्राणी थे, वे सब अपनी-अपनी मर्यादा छोड़कर कामके वश हो गये॥ ८४॥
सब के हृदयँ मदन अभिलाषा। लता निहारि नवहिं तरु साखा॥
नदीं उमगि अंबुधि कहुँ धाई। संगम करहिं तलाव तलाई॥
saba ke hṛdayam̐ madana abhilāṣā| latā nihāri navahiṃ taru sākhā||
nadīṃ umagi aṃbudhi kahum̐ dhāī| saṃgama karahiṃ talāva talāī||
Meaning सबके हृदयमें कामकी इच्छा हो गयी। लताओं (बेलों ) को देखकर वृक्षोंकी डालियाँ झुकने लगीं। नदियाँ उमड़-उमड़कर समुद्रकी ओर दौऱी और ताल-तलैयाँ भी आपसभमें संगम करने (मिलने-जुलने ) लगीं॥ १॥
जहँ असि दसा जड़न्ह कै बरनी। को कहि सकइ सचेतन करनी॥
पसु पच्छी नभ जल थलचारी। भए कामबस समय बिसारी॥
jaham̐ asi dasā jaṛanha kai baranī| ko kahi sakai sacetana karanī||
pasu pacchī nabha jala thalacārī| bhae kāmabasa samaya bisārī||
Meaning जब जड (वृक्ष, नदी आदि) की यह दशा कही गयी, तब चेतन जीवोंकी करनी कौन कह सकता है? आकाश, जल और पृथ्वीपर विचरनेवाले सारे पशु-पक्षी [अपने संयोगका समय भुलाकर कामके वश हो गये॥ २॥
मदन अंध ब्याकुल सब लोका। निसि दिनु नहिं अवलोकहिं कोका॥
देव दनुज नर किंनर ब्याला। प्रेत पिसाच भूत बेताला॥
madana aṃdha byākula saba lokā| nisi dinu nahiṃ avalokahiṃ kokā||
deva danuja nara kiṃnara byālā| preta pisāca bhūta betālā||
Meaning सब लोग कामान्ध होकर व्याकुल हो गये। चकवा-चकवी रात-दिन नहीं देखते। देव, दैत्य, मनुष्य, किन्नर, सर्प, प्रेत, पिशाच, भूत, बेताल--॥ ३॥
इन्ह कै दसा न कहेउँ बखानी। सदा काम के चेरे जानी॥
सिद्ध बिरक्त महामुनि जोगी। तेपि कामबस भए बियोगी॥
inha kai dasā na kaheum̐ bakhānī| sadā kāma ke cere jānī||
siddha birakta mahāmuni jogī| tepi kāmabasa bhae biyogī||
Meaning ये तो सदा ही कामके गुलाम हैं, यह समझकर मैंने इनकी दशाका वर्णन नहीं किया। सिद्ध, विरक्त, महामुनि और महान् योगी भी कामके वश होकर योगरहित या स्त्रीके विरही हो गये॥ ४॥
भए कामबस जोगीस तापस पा्वेरन्हि की को कहै।
देखहिं चराचर नारिमय जे ब्रहामय देखत रहे॥
अबला बिलोकहिं पुरुषमय जगु पुरुष सब अबलामयं।
दुड़ दंड भरि ब्रह्मांड भीतर कामकृत कौतुक अय॑॥
bhae kāmabasa jogīsa tāpasa pāveranhi kī ko kahai|
dekhahiṃ carācara nārimaya je brahāmaya dekhata rahe||
abalā bilokahiṃ puruṣamaya jagu puruṣa saba abalāmayaṃ|
duṛa daṃḍa bhari brahmāṃḍa bhītara kāmakṛta kautuka aya||
Meaning जब योगीश्वर और तपस्वी भी कामके वश हो गये, तब पामर मनुष्योंकी कौन कहे ? जो समस्त चराचर जगत्को ब्रह्ममय देखते थे, वे अब उसे स्त्रीमय देखने लगे। स्त्रियाँ सारे संसारको पुरुषमय देखने लगीं और पुरुष उसे स्त्रीमय देखने लगे। दो घड़ीतक सारे ब्रह्माण्डके अंदर कामदेवका रचा हुआ यह कौतुक (तमाशा) रहा।
धरी न काहूँ धीर सब के मन मनसिज हरे।
जे राखे रघुबीर ते उबरे तेहि काल महूँ॥ ८५॥
dharī na kāhūm̐ dhīra saba ke mana manasija hare|
je rākhe raghubīra te ubare tehi kāla mahūm̐|| 85||
Meaning किसीने भी हृदयमें धेय नहीं धारण किया, कामदेवने सबके मन हर लिये। श्रीरघुनाथजीने जिनकी रक्षा की, केवल वे ही उस समय बचे रहे॥ ८५॥
उभय घरी अस कौतुक भयऊ। जौ लगि कामु संभु पहिं गयऊ॥
सिवहि बिलोकि ससंकेउ मारू। भयउ जथाथिति सबु संसारू॥
ubhaya gharī asa kautuka bhayaū| jau lagi kāmu saṃbhu pahiṃ gayaū||
sivahi biloki sasaṃkeu mārū| bhayau jathāthiti sabu saṃsārū||
Meaning दो घड़ीतक ऐसा तमाशा हुआ, जबतक कामदेव शिवजीके पास पहुँच गया। शिवजीको देखकर कामदेव डर गया, तब सारा संसार फिर जैसा-का-तैसा स्थिर हो गया॥ १॥
भए तुरत सब जीव सुखारे। जिमि मद उतरि गएँ मतवारे॥
रुद्रहि देखि मदन भय माना। दुराधरष दुर्गम भगवाना॥
bhae turata saba jīva sukhāre| jimi mada utari gaem̐ matavāre||
rudrahi dekhi madana bhaya mānā| durādharaṣa durgama bhagavānā||
Meaning तुरंत ही सब जीव वैसे ही सुखी हो गये जैसे मतवाले (नशा पिये हुए ) लोग मद (नशा) उतर जानेपर सुखी होते हैं। दुराधर्ष (जिनको पराजित करना अत्यन्त ही कठिन है) और दुर्गम (जिनका पार पाना कठिन है) भगवान् (सम्पूर्ण ऐश्वर्य, धर्म, यश, श्री, ज्ञान और वैराग्यरूप छः ईश्वरीय गुणोंसे युक्त) रुद्र (महाभयड्र) शिवजीको देखकर कामदेव भयभीत हो गया॥ २॥
फिरत लाज कछु करि नहिं जाई। मरनु ठानि मन रचेसि उपाई॥
प्रगटेसि तुरत रुचिर रितुराजा। कुसुमित नव तरु राजि बिराजा॥
phirata lāja kachu kari nahiṃ jāī| maranu ṭhāni mana racesi upāī||
pragaṭesi turata rucira riturājā| kusumita nava taru rāji birājā||
Meaning लौट जानेमें लज्जा मालूम होती है और करते कुछ बनता नहीं। आखिर मनमें मरनेका निश्चय करके उसने उपाय रचा। तुरंत ही सुन्दर ऋतुराज वसन्तको प्रकट किया। फूले हुए नये-नये वृक्षोंकी कतारें सुशोभित हो गयीं॥ ३॥
बन उपबन बापिका तड़ागा। परम सुभग सब दिसा बिभागा॥
जहँ तहँ जनु उमगत अनुरागा। देखि मुएहुँ मन मनसिज जागा॥
bana upabana bāpikā taṛāgā| parama subhaga saba disā bibhāgā||
jaham̐ taham̐ janu umagata anurāgā| dekhi muehum̐ mana manasija jāgā||
Meaning वन-उपवन, बावली-तालाब और सब दिशाओंके विभाग परम सुन्दर हो गये। जहाँ-तहाँ मानो प्रेम उमड़ रहा है, जिसे देखकर मरे मनोंमें भी कामदेव जाग उठा॥ ४॥
जागड़ मनोभव मुएहँ मन बन सुभगता न परे कही।
सीतल सुगंध सुमंद मारुत मदन अनल सखा सही॥
बिकसे सरन्हि बहु कंज गुंजत पुंज मंजुल मधुकरा।
कलहंस पिक सुक सरस रव करि गान नाचहिं अपछरा॥
jāgaṛa manobhava mueham̐ mana bana subhagatā na pare kahī|
sītala sugaṃdha sumaṃda māruta madana anala sakhā sahī||
bikase saranhi bahu kaṃja guṃjata puṃja maṃjula madhukarā|
kalahaṃsa pika suka sarasa rava kari gāna nācahiṃ apacharā||
Meaning मरे हुए मनमें भी कामदेव जागने लगा, वनकी सुन्दरता कही नहीं जा सकती। कामरूपी अग्रिका सच्चा मित्र शीतल-मन्द-सुगन्धित पवन चलने लगा। सरोवरोंमें अनेकों कमल खिल गये, जिनपर सुन्दर भौंरोंके समूह गुंजार करने लगे। राजहंस, कोयल और तोते रसीली बोली बोलने लगे और अप्सराएँ गा-गाकर नाचने लगीं।
सकल कला करि कोटि बिधि हारेउ सेन समेत।
चली न अचल समाधि सिव कोपेउ हृदयनिकेत॥ ८६॥
sakala kalā kari koṭi bidhi hāreu sena sameta|
calī na acala samādhi siva kopeu hṛdayaniketa|| 86||
Meaning कामदेव अपनी सेनासमेत करोड़ों प्रकारकी सब कलाएँ (उपाय) करके हार गया, पर शिवजीकी अचल समाधि न डिगी। तब कामदेव क्रोधित हो उठा॥ ८६॥
देखि रसाल बिटप बर साखा। तेहि पर चढ़ेउ मदनु मन माखा॥
सुमन चाप निज सर संधाने। अति रिस ताकि श्रवन लगि ताने॥
dekhi rasāla biṭapa bara sākhā| tehi para caṛheu madanu mana mākhā||
sumana cāpa nija sara saṃdhāne| ati risa tāki śravana lagi tāne||
Meaning आमके वृक्षकी एक सुन्दर डाली देखकर मनमें क्रोधसे भरा हुआ कामदेव उसपर चढ़ गया। उसने पुष्प-धनुषपर अपने [पाँचों] बाण चढ़ाये और अत्यन्त क्रोधसे [ लक्ष्यकी ओर] ताककर उन्हें कानतक तान लिया॥ १॥
छाड़े बिषम बिसिख उर लागे। छुटि समाधि संभु तब जागे॥
भयउ ईस मन छोभु बिसेषी। नयन उघारि सकल दिसि देखी॥
chāṛe biṣama bisikha ura lāge| chuṭi samādhi saṃbhu taba jāge||
bhayau īsa mana chobhu biseṣī| nayana ughāri sakala disi dekhī||
Meaning कामदेवने तीक्ष्ण पाँच बाण छोड़े, जो शिवजीके हृदयमें लगे। तब उनकी समाधि टूट गयी और वे जाग गये। ईश्वर (शिवजी) के मनमें बहुत क्षोभ हुआ। उन्होंने आँखें खोलकर सब ओर देखा॥ २॥
सौरभ पल्लव मदनु बिलोका। भयउ कोपु कंपेउ त्रैलोका॥
तब सिवँ तीसर नयन उघारा। चितवत कामु भयउ जरि छारा॥
saurabha pallava madanu bilokā| bhayau kopu kaṃpeu trailokā||
taba sivam̐ tīsara nayana ughārā| citavata kāmu bhayau jari chārā||
Meaning जब आमके पत्तोंगें [ छिपे हुए] कामदेवको देखा तो उन्हें बड़ा क्रोध हुआ, जिससे तीनों लोक काँप उठे। तब शिवजीने तीसरा नेत्र खोला, उनके देखते ही कामदेव जलकर भस्म हो गया॥ ३॥
हाहाकार भयउ जग भारी। डरपे सुर भए असुर सुखारी॥
समुझि कामसुखु सोचहिं भोगी। भए अकंटक साधक जोगी॥
hāhākāra bhayau jaga bhārī| ḍarape sura bhae asura sukhārī||
samujhi kāmasukhu socahiṃ bhogī| bhae akaṃṭaka sādhaka jogī||
Meaning जगतमें बड़ा हाहाकार मच गया। देवता डर गये, दैत्य सुखी हुए। भोगी लोग कामसुखको याद करके चिन्ता करने लगे और साधक योगी निष्कंटक हो गये॥ ४॥
जोगी अकंटक भए पति गति सुनत रति मुरुछित भ।
रोदति बदति बहु भाँति करुना करति संकर पहिं गई॥
अति प्रेम करि बिनती बिबिध बिधि जोरि कर सन्मुख रही।
प्रभु आसुतोष कृपाल सिव अबला निरखि बोले सही॥
jogī akaṃṭaka bhae pati gati sunata rati muruchita bha|
rodati badati bahu bhām̐ti karunā karati saṃkara pahiṃ gaī||
ati prema kari binatī bibidha bidhi jori kara sanmukha rahī|
prabhu āsutoṣa kṛpāla siva abalā nirakhi bole sahī||
Meaning योगी निष्कंटक हो गये, कामदेवकी स्त्री रति अपने पतिकी यह दशा सुनते ही मूर्च्ठित हो गयी। रोती-चिल्लाती और भाँति-भाँतिसे करुणा करती हुई वह शिवजीके पास गयी। अत्यन्त प्रेमके साथ अनेकों प्रकारसे विनती करके हाथ जोड़कर सामने खड़ी हो गयी। शीघ्र प्रसन्न होनेवाले कृपालु शिवजी अबला (असहाया स्त्री) को देखकर सुन्दर (उसको सान्त्वना देनेवाले) वचन बोले--
अब तें रति तव नाथ कर होइहि नामु अनंगु।
बिनु बपु ब्यापिहि सबहि पुनि सुनु निज मिलन प्रसंगु॥ ८७॥
aba teṃ rati tava nātha kara hoihi nāmu anaṃgu|
binu bapu byāpihi sabahi puni sunu nija milana prasaṃgu|| 87||
Meaning हे रति! अबसे तेरे स्वामीका नाम अनड् होगा। वह बिना ही शरीरके सबको व्यापेगा। अब तू अपने पत्सि मिलनेकी बात सुन॥ ८७॥
जब जदुबंस कृष्न अवतारा। होइहि हरन महा महिभारा॥
कृष्न तनय होइहि पति तोरा। बचनु अन्यथा होइ न मोरा॥
jaba jadubaṃsa kṛṣna avatārā| hoihi harana mahā mahibhārā||
kṛṣna tanaya hoihi pati torā| bacanu anyathā hoi na morā||
Meaning जब पृथ्वीके बड़े भारी भारको उतारनेके लिये यदुवंशमें श्रीकृष्णका अवतार होगा, तब तेरा पति उनके पुत्र (प्रद्युप्न) के रूपमें उत्पन्न होगा। मेरा यह वचन अन्यथा नहीं होगा॥ १॥
रति गवनी सुनि संकर बानी। कथा अपर अब कहउँ बखानी॥
देवन्ह समाचार सब पाए। ब्रह्मादिक बैकुंठ सिधाए॥
rati gavanī suni saṃkara bānī| kathā apara aba kahaum̐ bakhānī||
devanha samācāra saba pāe| brahmādika baikuṃṭha sidhāe||
Meaning शिवजीके वचन सुनकर रति चली गयी। अब दूसरी कथा बखानकर (विस्तारसे) कहता हूँ। ब्रह्मादि देवताओंने ये सब समाचार सुने तो वे वैकुण्ठटको चले॥ २॥
सब सुर बिष्नु बिरंचि समेता। गए जहाँ सिव कृपानिकेता॥
पृथक पृथक तिन्ह कीन्हि प्रसंसा। भए प्रसन्न चंद्र अवतंसा॥
saba sura biṣnu biraṃci sametā| gae jahām̐ siva kṛpāniketā||
pṛthaka pṛthaka tinha kīnhi prasaṃsā| bhae prasanna caṃdra avataṃsā||
Meaning फिर वहाँसे विष्णु और ब्रह्मासहित सब देवता वहाँ गये जहाँ कृपाके धाम शिवजी थे। उन सबने शिवजीकी अलग-अलग स्तुति की, तब शशिभूषण शिवजी प्रसन्न हो गये॥ ३॥
बोले कृपासिंधु बृषकेतू। कहहु अमर आए केहि हेतू॥
कह बिधि तुम्ह प्रभु अंतरजामी। तदपि भगति बस बिनवउँ स्वामी॥
bole kṛpāsiṃdhu bṛṣaketū| kahahu amara āe kehi hetū||
kaha bidhi tumha prabhu aṃtarajāmī| tadapi bhagati basa binavaum̐ svāmī||
Meaning कृपाके समुद्र शिवजी बोले--हे देवताओ ! कहिये, आप किसलिये आये हैं ? ब्रह्माजीने कहा-- हे प्रभो! आप अन्तर्यामी हैं, तथापि हे स्वामी! भक्तिवश मैं आपसे विनती करता हूँ॥ ४॥
सकल सुरन्ह के हृदयँ अस संकर परम उछाहु।
निज नयनन्हि देखा चहहिं नाथ तुम्हार बिबाहु॥ ८८॥
sakala suranha ke hṛdayam̐ asa saṃkara parama uchāhu|
nija nayananhi dekhā cahahiṃ nātha tumhāra bibāhu|| 88||
Meaning हे श्र! सब देवताओंके मनमें ऐसा परम उत्साह है कि हे नाथ! वे अपनी आँखोंसे आपका विवाह देखना चाहते हैं॥ ८८॥
यह उत्सव देखिअ भरि लोचन। सोइ कछु करहु मदन मद मोचन॥
कामु जारि रति कहुँ बरु दीन्हा। कृपासिंधु यह अति भल कीन्हा॥
yaha utsava dekhia bhari locana| soi kachu karahu madana mada mocana||
kāmu jāri rati kahum̐ baru dīnhā| kṛpāsiṃdhu yaha ati bhala kīnhā||
Meaning हे कामदेवके मदको चूर करनेवाले ! आप ऐसा कुछ कीजिये जिससे सब लोग इस उत्सवको नेत्र भरकर देखें। हे कृपाके सागर! कामदेवको भस्म करके आपने रतिको जो वरदान दिया सो बहुत ही अच्छा किया॥ १॥
सासति करि पुनि करहिं पसाऊ। नाथ प्रभुन्ह कर सहज सुभाऊ॥
पारबतीं तपु कीन्ह अपारा। करहु तासु अब अंगीकारा॥
sāsati kari puni karahiṃ pasāū| nātha prabhunha kara sahaja subhāū||
pārabatīṃ tapu kīnha apārā| karahu tāsu aba aṃgīkārā||
Meaning हे नाथ! श्रेष्ठ स्वामियोंका यह सहज स्वभाव ही है कि वे पहले दण्ड देकर फिर कृपा किया करते हैं। पार्वतीने अपार तप किया है, अब उन्हें अज्ञलीकार कीजिये॥ २॥
सुनि बिधि बिनय समुझि प्रभु बानी। ऐसेइ होउ कहा सुखु मानी॥
तब देवन्ह दुंदुभीं बजाईं। बरषि सुमन जय जय सुर साई॥
suni bidhi binaya samujhi prabhu bānī| aisei hou kahā sukhu mānī||
taba devanha duṃdubhīṃ bajāīṃ| baraṣi sumana jaya jaya sura sāī||
Meaning ब्रह्माजीकी प्रार्थवा सुनकर और प्रभु श्रीरामचन्द्रजीके वचनोंको याद करके शिवजीने * प्रसन्नतापूर्वक कहा-- ऐसा ही हो।' तब देवताओंने नगाड़े बजाये और फूलोंकी वर्षा करके जय हो! देवताओंके स्वामीकी जय हो!' ऐसा कहने लगे॥ ३॥
अवसरु जानि सप्तरिषि आए। तुरतहिं बिधि गिरिभवन पठाए॥
प्रथम गए जहँ रही भवानी। बोले मधुर बचन छल सानी॥
avasaru jāni saptariṣi āe| turatahiṃ bidhi giribhavana paṭhāe||
prathama gae jaham̐ rahī bhavānī| bole madhura bacana chala sānī||
Meaning उचित अवसर जानकर ससर्षि आये और ब्रह्माजीने तुरंत ही उन्हें हिमाचलके घर भेज दिया। वे पहले वहाँ गये जहाँ पार्वतीजी थीं और उनसे छलसे भरे मीठे (विनोदयुक्त, आनन्द पहुँचानेवाले ) वचन बोले--॥ ४॥
कहा हमार न सुनेहु तब नारद कें उपदेस।
अब भा झूठ तुम्हार पन जारेउ कामु महेस॥ ८९॥
kahā hamāra na sunehu taba nārada keṃ upadesa|
aba bhā jhūṭha tumhāra pana jāreu kāmu mahesa|| 89||
Meaning नारदजीके उपदेशसे तुमने उस समय हमारी बात नहीं सुनी। अब तो तुम्हारा प्रण झूठा हो गया, क्योंकि महादेवजीने कामको ही भस्म कर डाला॥ ८९॥
सुनि बोलीं मुसुक्ाइ भवानी। उचित कहेहु मुनिबर बिग्यानी॥
तुम्हरें जान कामु अब जारा। अब लगि संभु रहे सबिकारा॥
suni bolīṃ musukाi bhavānī| ucita kahehu munibara bigyānī||
tumhareṃ jāna kāmu aba jārā| aba lagi saṃbhu rahe sabikārā||
Meaning यह सुनकर पार्वतीजी मुसकराकर बोलीं--हे विज्ञानी मुनिवरो ! आपने उचित ही कहा। आपकी समझमें शिवजीने कामदेवको अब जलाया है, अबतक तो वे विकारयुक्त (कामी) ही रहे!॥ १॥
हमरें जान सदा सिव जोगी। अज अनवद्य अकाम अभोगी॥
जौं मैं सिव सेये अस जानी। प्रीति समेत कर्म मन बानी॥
hamareṃ jāna sadā siva jogī| aja anavadya akāma abhogī||
jauṃ maiṃ siva seye asa jānī| prīti sameta karma mana bānī||
Meaning किन्तु हमारी समझसे तो शिवजी सदासे ही योगी, अजन्मा, अनिन््द्य, कामरहित और भोगहीन हैं और यदि मैंने शिवजीको ऐसा समझकर ही मन, वचन और कर्मसे प्रेमसहित उनकी सेवा की है--॥२॥
तौ हमार पन सुनहु मुनीसा। करिहहिं सत्य कृपानिधि ईसा॥
तुम्ह जो कहा हर जारेउ मारा। सोइ अति बड़ अबिबेकु तुम्हारा॥
tau hamāra pana sunahu munīsā| karihahiṃ satya kṛpānidhi īsā||
tumha jo kahā hara jāreu mārā| soi ati baṛa abibeku tumhārā||
Meaning तो हे मुनीश्वरो! सुनिये, वे कृपानिधान भगवान् मेरी प्रतिज्ञाको सत्य करेंगे। आपने जो यह कहा कि शिवजीने कामदेवको भस्म कर दिया, यही आपका बड़ा भारी अविवेक है॥ ३॥
तात अनल कर सहज सुभाऊ। हिम तेहि निकट जाइ नहिं काऊ॥
गएँ समीप सो अवसि नसाई। असि मन्मथ महेस की नाई॥
tāta anala kara sahaja subhāū| hima tehi nikaṭa jāi nahiṃ kāū||
gaem̐ samīpa so avasi nasāī| asi manmatha mahesa kī nāī||
Meaning हे तात! अग्िका तो यह सहज स्वभाव ही है कि पाला उसके समीप कभी जा ही नहीं सकता और जानेपर वह अवश्य नष्ट हो जायगा। महादेवजी और कामदेवके सम्बन्धमें भी यही न्याय (बात) समझना चाहिये॥ ४॥
हियँ हरषे मुनि बचन सुनि देखि प्रीति बिस्वास।
चले भवानिहि नाइ सिर गए हिमाचल पास॥ ९०॥
hiyam̐ haraṣe muni bacana suni dekhi prīti bisvāsa|
cale bhavānihi nāi sira gae himācala pāsa|| 90||
Meaning पार्वतीके वचन सुनकर और उनका प्रेम तथा विश्वास देखकर मुनि हृदयमें बड़े प्रसन्न हुए। वे भवानीको सिर नवाकर चल दिये और हिमाचलके पास पहुँचे॥ ९०॥
सबु प्रसंगु गिरिपतिहि सुनावा। मदन दहन सुनि अति दुखु पावा॥
बहुरि कहेउ रति कर बरदाना। सुनि हिमवंत बहुत सुखु माना॥
sabu prasaṃgu giripatihi sunāvā| madana dahana suni ati dukhu pāvā||
bahuri kaheu rati kara baradānā| suni himavaṃta bahuta sukhu mānā||
Meaning उन्होंने पर्वतराज हिमाचलको सब हाल सुनाया। कामदेवका भस्म होना सुनकर हिमाचल बहुत दुखी हुए। फिर मुनियोंने रतिके वरदानकी बात कही, उसे सुनकर हिमवान्ने बहुत सुख माना॥ १॥
हृदयँ बिचारि संभु प्रभुताई। सादर मुनिबर लिए बोलाई॥
सुदिनु सुनखतु सुघरी सोचाई। बेगि बेदबिधि लगन धराई॥
hṛdayam̐ bicāri saṃbhu prabhutāī| sādara munibara lie bolāī||
sudinu sunakhatu sugharī socāī| begi bedabidhi lagana dharāī||
Meaning शिवजीके प्रभावको मनमें विचारकर हिमाचलने श्रेष्ठ मुनियोंको आदरपूर्वक बुला लिया और उनसे शुभ दिन, शुभ नक्षत्र और शुभ घड़ी शोधवाकर वेदकी विधिके अनुसार शीघ्र ही लग निश्चय कराकर लिखवा लिया॥ २॥
पत्री सप्तरिषिन्ह सोइ दीन्ही। गहि पद बिनय हिमाचल कीन्ही॥
जाइ बिधिहि दीन्हि सो पाती। बाचत प्रीति न हृदयँ समाती॥
patrī saptariṣinha soi dīnhī| gahi pada binaya himācala kīnhī||
jāi bidhihi dīnhi so pātī| bācata prīti na hṛdayam̐ samātī||
Meaning फिर हिमाचलने वह लग्पत्रिका सप्र्षियोंको दे दी और चरण पकड़कर उनकी विनती की। उन्होंने जाकर वह लग्पत्रिका ब्रह्माजीको दी। उसको पढ़ते समय उनके हृदयमें प्रेम समाता न था॥ ३॥
लगन बाचि अज सबहि सुनाई। हरषे मुनि सब सुर समुदाई॥
सुमन बृष्टि नभ बाजन बाजे। मंगल कलस दसहुँ दिसि साजे॥
lagana bāci aja sabahi sunāī| haraṣe muni saba sura samudāī||
sumana bṛṣṭi nabha bājana bāje| maṃgala kalasa dasahum̐ disi sāje||
Meaning ब्रह्माजीने लग पढ़कर सबको सुनाया, उसे सुनकर सब मुनि और देवताओंका सारा समाज हर्षित हो गया। आकाशसे फूलोंकी वर्षा होने लगी, बाजे बजने लगे और दसों दिशाओंमें मज़ल- कलश सजा दिये गये॥ ४॥
लगे सँवारन सकल सुर बाहन बिबिध बिमान।
होहि सगुन मंगल सुभद करहिं अपछरा गान॥ ९१॥
lage sam̐vārana sakala sura bāhana bibidha bimāna|
hohi saguna maṃgala subhada karahiṃ apacharā gāna|| 91||
Meaning सब देवता अपने भाँति-भाँतिके वाहन और विमान सजाने लगे, कल्याणप्रद मज़ल शकुन होने लगे और अप्सराएँ गाने लगीं॥ ९१॥
सिवहि संभु गन करहिं सिंगारा। जटा मुकुट अहि मौरु सँवारा॥
कुंडल कंकन पहिरे ब्याला। तन बिभूति पट केहरि छाला॥
sivahi saṃbhu gana karahiṃ siṃgārā| jaṭā mukuṭa ahi mauru sam̐vārā||
kuṃḍala kaṃkana pahire byālā| tana bibhūti paṭa kehari chālā||
Meaning शिवजीके गण शिवजीका श्रज़्ार करने लगे। जटाओंका मुकुट बनाकर उसपर साँपोंका मौर सजाया गया। शिवजीने साँपोंके ही कुण्डल और कड्जण पहने, शरीरपर विभूति रमायी और वस्त्रकी जगह बाघम्बर लपेट लिया॥ १॥
ससि ललाट सुंदर सिर गंगा। नयन तीनि उपबीत भुजंगा॥
गरल कंठ उर नर सिर माला। असिव बेष सिवधाम कृपाला॥
sasi lalāṭa suṃdara sira gaṃgā| nayana tīni upabīta bhujaṃgā||
garala kaṃṭha ura nara sira mālā| asiva beṣa sivadhāma kṛpālā||
Meaning शिवजीके सुन्दर मस्तकपर चन्द्रमा, सिरपर गड्ाजी, तीन नेत्र, साँपोंका जनेऊ, गलेमें विष और छातीपर नरमुण्डोंकी माला थी। इस प्रकार उनका वेष अशुभ होनेपर भी वे कल्याणके धाम और कृपालु हैं॥ २॥
कर त्रिसूल अरु डमरु बिराजा। चले बसहँ चढ़ि बाजहिं बाजा॥
देखि सिवहि सुरत्रिय मुसुकाहीं। बर लायक दुलहिनि जग नाहीं॥
kara trisūla aru ḍamaru birājā| cale basaham̐ caṛhi bājahiṃ bājā||
dekhi sivahi suratriya musukāhīṃ| bara lāyaka dulahini jaga nāhīṃ||
Meaning एक हाथमें त्रिशूल और दूसरेमें डमरू सुशोभित है। शिवजी बैलपर चढ़कर चले। बाजे बज रहे हैं। शिवजीको देखकर देवाज़नाएँ मुसकरा रही हैं [और कहती हैं कि] इस वरके योग्य दुलहिन संसारमें नहीं मिलेगी॥ ३॥
बिष्नु बिरंचि आदि सुरब्राता। चढ़ि चढ़ि बाहन चले बराता॥
सुर समाज सब भाँति अनूपा। नहिं बरात दूलह अनुरूपा॥
biṣnu biraṃci ādi surabrātā| caṛhi caṛhi bāhana cale barātā||
sura samāja saba bhām̐ti anūpā| nahiṃ barāta dūlaha anurūpā||
Meaning विष्णु और ब्रह्मा आदि देवताओंके समूह अपने-अपने वाहनों (सवारियों ) पर चढ़कर बरातमें चले। देवताओंका समाज सब प्रकारसे अनुपम (परम सुन्दर) था, पर दूल्हेके योग्य बरात न थी॥ ४॥
बिष्नु कहा अस बिहसि तब बोलि सकल दिसिराज।
बिलग बिलग होइ चलहु सब निज निज सहित समाज॥ ९२॥
biṣnu kahā asa bihasi taba boli sakala disirāja|
bilaga bilaga hoi calahu saba nija nija sahita samāja|| 92||
Meaning तब विष्णुभगवान्ने सब दिक्पालोंको बुलाकर हँसकर ऐसा कहा-सब लोग अपने-अपने दलसमेत अलग-अलग होकर चलो॥ ९२॥
बर अनुहारि बरात न भाई। हँसी करैहहु पर पुर जाई॥
बिष्नु बचन सुनि सुर मुसकाने। निज निज सेन सहित बिलगाने॥
bara anuhāri barāta na bhāī| ham̐sī karaihahu para pura jāī||
biṣnu bacana suni sura musakāne| nija nija sena sahita bilagāne||
Meaning हे भाई! हमलोगोंकी यह बरात वरके योग्य नहीं है। क्या पराये नगरमें जाकर हँसी कराओगे ? विष्णुभगवान्ूकी बात सुनकर देवता मुसकराये और वे अपनी-अपनी सेनासहित अलग हो गये॥ १॥
मनहीं मन महेसु मुसुकाहीं। हरि के बिंग्य बचन नहिं जाहीं॥
अति प्रिय बचन सुनत प्रिय केरे। भृंगिहि प्रेरि सकल गन टेरे॥
manahīṃ mana mahesu musukāhīṃ| hari ke biṃgya bacana nahiṃ jāhīṃ||
ati priya bacana sunata priya kere| bhṛṃgihi preri sakala gana ṭere||
Meaning महादेवजी [यह देखकर] मन-ही-मन मुसकराते हैं कि विष्णुभगवान्के व्यज़्चयय-वचन (दिल््लगी ) नहीं छूटते। अपने प्यारे (विष्णुभगवान्) के इन अति प्रिय वचनोंको सुनकर शिवजीने भी भृड़्ीको भेजकर अपने सब गणोंको बुलवा लिया॥ २॥
सिव अनुसासन सुनि सब आए। प्रभु पद जलज सीस तिन्ह नाए॥
नाना बाहन नाना बेषा। बिहसे सिव समाज निज देखा॥
siva anusāsana suni saba āe| prabhu pada jalaja sīsa tinha nāe||
nānā bāhana nānā beṣā| bihase siva samāja nija dekhā||
Meaning शिवजीकी आज्ञा सुनते ही सब चले आये और उन्होंने स्वामीके चरणकमलोंमें सिर नवाया। तरह-तरहकी सवारियों और तरह-तरहके वेषवाले अपने समाजको देखकर शिवजी हँसे॥ ३॥
कोउ मुखहीन बिपुल मुख काहू। बिनु पद कर कोउ बहु पद बाहू॥
बिपुल नयन कोउ नयन बिहीना। रिष्टपुष्ट कोउ अति तनखीना॥
kou mukhahīna bipula mukha kāhū| binu pada kara kou bahu pada bāhū||
bipula nayana kou nayana bihīnā| riṣṭapuṣṭa kou ati tanakhīnā||
Meaning कोई बिना मुखका है, किसीके बहुत-से मुख हैं, कोई बिना हाथ-पैरका है तो किसीके कई हाथ-पैर हैं। किसीके बहुत आँखें हैं तो किसीके एक भी आँख नहीं है। कोई बहुत मोटा-ताजा है तो कोई बहुत ही दुबला-पतला है॥ ४॥
तन खीन कोउ अति पीन पावन कोउ अपावन गति धरें।
भूषन कराल कपाल कर सब सद्य सोनित तन भरें॥
खर स्वान सुअर सृकाल मुख गन बेष अगनित को गने।
बहु जिनस प्रेत पिसाच जोगि जमात बरनत नहिं बने॥
tana khīna kou ati pīna pāvana kou apāvana gati dhareṃ|
bhūṣana karāla kapāla kara saba sadya sonita tana bhareṃ||
khara svāna suara sṛkāla mukha gana beṣa aganita ko gane|
bahu jinasa preta pisāca jogi jamāta baranata nahiṃ bane||
Meaning कोई बहुत दुबला, कोई बहुत मोटा, कोई पवित्र और कोई अपवित्र वेष धारण किये हुए है। भयड्र गहने पहने हाथमें कपाल लिये हैं और सब-के-सब शरीरमें ताजा खून लपेटे हुए हैं। गधे, कुत्ते, सूअर और सियारके-से उनके मुख हैं। गणोंके अनगिनत वेषोंको कौन गिने ? बहुत प्रकारके प्रेत, पिशाच और योगिनियोंकी जमातें हैं। उनका वर्णन करते नहीं बनता।
नाचहिं गावहिं गीत परम तरंगी भूत सब।
देखत अति बिपरीत बोलहिं बचन बिचित्र बिधि॥ ९३॥
nācahiṃ gāvahiṃ gīta parama taraṃgī bhūta saba|
dekhata ati biparīta bolahiṃ bacana bicitra bidhi|| 93||
Meaning भूत-प्रेत नाचते और गाते हैं, वे सब बड़े मौजी हैं। देखनेमें बहुत ही बेढंगे जान पड़ते हैं और बड़े ही विचित्र ढंगसे बोलते हैं॥ ९३॥
जस दूलहु तसि बनी बराता। कौतुक बिबिध होहिं मग जाता॥
इहाँ हिमाचल रचेउ बिताना। अति बिचित्र नहिं जाइ बखाना॥
jasa dūlahu tasi banī barātā| kautuka bibidha hohiṃ maga jātā||
ihām̐ himācala raceu bitānā| ati bicitra nahiṃ jāi bakhānā||
Meaning जैसा दूल्हा है, अब वैसी ही बरात बन गयी है। मार्गमें चलते हुए भाँति- भाँतिके कौतुक (तमाशे ) होते जाते हैं। इधर हिमाचलने ऐसा विचित्र मण्डप बनाया कि जिसका वर्णन नहीं हो सकता॥ १॥
सैल सकल जहँ लगि जग माहीं। लघु बिसाल नहिं बरनि सिराहीं॥
बन सागर सब नदीं तलावा। हिमगिरि सब कहुँ नेवत पठावा॥
saila sakala jaham̐ lagi jaga māhīṃ| laghu bisāla nahiṃ barani sirāhīṃ||
bana sāgara saba nadīṃ talāvā| himagiri saba kahum̐ nevata paṭhāvā||
Meaning जगतमें जितने छोटे-बड़े पर्वत थे, जिनका वर्णन करके पार नहीं मिलता तथा जितने वन, समुद्र, नदियाँ और तालाब थे, हिमाचलने सबको नेवता भेजा॥ २॥
कामरूप सुंदर तन धारी। सहित समाज सहित बर नारी॥
गए सकल तुहिनाचल गेहा। गावहिं मंगल सहित सनेहा॥
kāmarūpa suṃdara tana dhārī| sahita samāja sahita bara nārī||
gae sakala tuhinācala gehā| gāvahiṃ maṃgala sahita sanehā||
Meaning वे सब अपने इच्छानुसार रूप धारण करनेवाले सुन्दर शरीर धारणकर सुन्दरी स्त्रियों और समाजोंके साथ हिमाचलके घर गये। सभी स्नेहसहित मज़लगीत गाते हैं॥ ३॥
प्रथमहिं गिरि बहु गृह सँवराए। जथाजोगु तहँ तहँ सब छाए॥
पुर सोभा अवलोकि सुहाई। लागइ लघु बिरंचि निपुनाई॥
prathamahiṃ giri bahu gṛha sam̐varāe| jathājogu taham̐ taham̐ saba chāe||
pura sobhā avaloki suhāī| lāgai laghu biraṃci nipunāī||
Meaning हिमाचलने पहलेहीसे बहुत-से घर सजवा रखे थे। यथायोग्य उन-उन स्थानोंमें सब लोग उतर गये। नगरकी सुन्दर शोभा देखकर ब्रह्माकी रचना-चातुरी भी तुच्छ लगती थी॥ ४॥
लघु लाग बिधि की निपुनता अवलोकि पुर सोभा सही।
बन बाग कूप तड़ाग सरिता सुभग सब सक को कही।
मंगल बिपुल तोरन पताका केतु गृह गृह सोहहीं।
बनिता पुरुष सुंदर चतुर छबि देखि मुनि मन मोहहीं॥
laghu lāga bidhi kī nipunatā avaloki pura sobhā sahī|
bana bāga kūpa taṛāga saritā subhaga saba saka ko kahī|
maṃgala bipula torana patākā ketu gṛha gṛha sohahīṃ|
banitā puruṣa suṃdara catura chabi dekhi muni mana mohahīṃ||
Meaning नगरकी शोभा देखकर ब्रह्माकी निपुणता सचमुच तुच्छ लगती है। वन, बाग, कुएँ, तालाब, नदियाँ सभी सुन्दर हैं; उनका वर्णन कौन कर सकता है? घर-घर बहुत-से मज़लसूचक तोरण और ध्वजा-पताकाएँ सुशोभित हो रही हैं। वहाँके सुन्दर और चतुर स्त्री-पुरुषोंकी छवि देखकर मुनियोंके भी मन मोहित हो जाते हैं।
जगदंबा जहँ अवतरी सो पुरु बरनि कि जाइ।
रिद्धधि सिद्धि संपत्ति सुख नित नूतन अधिकाइ॥ ९४॥
jagadaṃbā jaham̐ avatarī so puru barani ki jāi|
riddhadhi siddhi saṃpatti sukha nita nūtana adhikāi|| 94||
Meaning जिस नगरमें स्वयं जगदम्बाने अवतार लिया, क्या उसका वर्णन हो सकता है? वहाँ ऋद्धि, सिद्धि, सम्पत्ति और सुख नित-नये बढ़ते जाते हैं॥ ९४॥
नगर निकट बरात सुनि आई। पुर खरभरु सोभा अधिकाई॥
करि बनाव सजि बाहन नाना। चले लेन सादर अगवाना॥
nagara nikaṭa barāta suni āī| pura kharabharu sobhā adhikāī||
kari banāva saji bāhana nānā| cale lena sādara agavānā||
Meaning बरातको नगरके निकट आयी सुनकर नगरमें चहल-पहल मच गयी, जिससे उसकी शोभा बढ़ गयी। अगवानी करनेवाले लोग बनाव-श्रंगार करके तथा नाना प्रकारकी सवारियोंको सजाकर आदरसहित बरातको लेने चले॥ १॥
हियँ हरषे सुर सेन निहारी। हरिहि देखि अति भए सुखारी॥
सिव समाज जब देखन लागे। बिडरि चले बाहन सब भागे॥
hiyam̐ haraṣe sura sena nihārī| harihi dekhi ati bhae sukhārī||
siva samāja jaba dekhana lāge| biḍari cale bāhana saba bhāge||
Meaning देवताओंके समाजको देखकर सब मनमें प्रसन्न हुए और विष्णुभगवान्को देखकर तो बहुत ही सुखी हुए। किन्तु जब शिवजीके दलको देखने लगे तब तो उनके सब वाहन (सवारियोंके हाथी, घोड़े, रथके बेल आदि) डरकर भाग चले॥ २॥
धरि धीरजु तहँ रहे सयाने। बालक सब लै जीव पराने॥
गएँ भवन पूछहिं पितु माता। कहहिं बचन भय कंपित गाता॥
dhari dhīraju taham̐ rahe sayāne| bālaka saba lai jīva parāne||
gaem̐ bhavana pūchahiṃ pitu mātā| kahahiṃ bacana bhaya kaṃpita gātā||
Meaning कुछ बड़ी उम्रके समझदार लोग धीरज धरकर वहाँ डटे रहे। लड़के तो सब अपने प्राण लेकर भागे। घर पहुँचनेपर जब माता-पिता पूछते हैं, तब वे भयसे काँपते हुए शरीरसे ऐसा वचन कहते हैं--॥ ३॥
कहिअ काह कहि जाइ न बाता। जम कर धार किधौं बरिआता॥
बरु बौराह बसहँ असवारा। ब्याल कपाल बिभूषन छारा॥
kahia kāha kahi jāi na bātā| jama kara dhāra kidhauṃ bariātā||
baru baurāha basaham̐ asavārā| byāla kapāla bibhūṣana chārā||
Meaning क्या कहें, कोई बात कही नहीं जाती। यह बरात है या यमराजकी सेना ? दूल्हा पागल है और बैलपर सवार है। साँप, कपाल और राख ही उसके गहने हैं॥ ४॥
तन छार ब्याल कपाल भूषन नगन जटिल भयंकरा।
सँग भूत प्रेत पिसाच जोगिनि बिकट मुख रजनीचरा॥
जो जिअत रहिहि बरात देखत पुन्य बड़ तेहि कर सही।
देखिहि सो उमा बिबाहु घर घर बात असि लरिकन्ह कही॥
tana chāra byāla kapāla bhūṣana nagana jaṭila bhayaṃkarā|
sam̐ga bhūta preta pisāca jogini bikaṭa mukha rajanīcarā||
jo jiata rahihi barāta dekhata punya baṛa tehi kara sahī|
dekhihi so umā bibāhu ghara ghara bāta asi larikanha kahī||
Meaning दूल्हेके शरीरपर राख लगी है, साँप और कपालके गहने हैं; वह नड्ा, जटाधारी और भयड्ूर है। उसके साथ भयानक मुखवाले भूत, प्रेत, पिशाच, योगिनियाँ और राक्षस हैं। जो बरातको देखकर जीता बचेगा, सचमुच उसके बड़े ही पुण्य हैं और वही पार्वतीका विवाह देखेगा। लड़कोंने घर-घर यही बात कही।
समुझि महेस समाज सब जननि जनक मुसुकाहिं।
बाल बुझाए बिबिध बिधि निडर होहु डरु नाहिं॥ ९५॥
samujhi mahesa samāja saba janani janaka musukāhiṃ|
bāla bujhāe bibidha bidhi niḍara hohu ḍaru nāhiṃ|| 95||
Meaning महेश्वर (शिवजी ) का समाज समझकर सब लड़कोंके माता-पिता मुसकराते हैं। उन्होंने बहुत तरहसे लड़कोंको समझाया कि निडर हो जाओ, डरकी कोई बात नहीं है॥ ९५॥
लै अगवान बरातहि आए।
दिए सबहि जनवास सुहाए॥
lai agavāna barātahi āe| die sabahi janavāsa suhāe||
Meaning अगवान लोग बरातको लिवा लाये, उन्होंने सबको सुन्दर जनवासे ठहरनेको दिये। मैना गाने लगीं॥ १॥
कंचन थार सोह बर पानी। परिछन चली हरहि हरषानी॥
बिकट बेष रुद्रहि जब देखा। अबलन्ह उर भय भयउ बिसेषा॥
kaṃcana thāra soha bara pānī| parichana calī harahi haraṣānī||
bikaṭa beṣa rudrahi jaba dekhā| abalanha ura bhaya bhayau biseṣā||
Meaning सुन्दर हाथोंमें सोनेका थाल शोभित है, इस प्रकार मैना हर्षके साथ शिवजीका परछन करने चलीं। जब महादेवजीको भयानक वेषमें देखा तब तो स्त्रियोंके मनमें बड़ा भारी भय उत्पन्न हो गया॥ २॥
भागि भवन पैठीं अति त्रासा। गए महेसु जहाँ जनवासा॥
मैना हृदयँ भयउ दुखु भारी। लीन्ही बोलि गिरीसकुमारी॥
bhāgi bhavana paiṭhīṃ ati trāsā| gae mahesu jahām̐ janavāsā||
mainā hṛdayam̐ bhayau dukhu bhārī| līnhī boli girīsakumārī||
Meaning बहुत ही डरके मारे भागकर वे घरमें घुस गयीं और शिवजी जहाँ जनवासा था, वहाँ चले गये। मैनाके हृदयमें बड़ा दुःख हुआ। उन्होंने पार्वतीजीको अपने पास बुला लिया॥ ३॥
अधिक सनेहँ गोद बैठारी। स्याम सरोज नयन भरे बारी॥
जेहिं बिधि तुम्हहि रूपु अस दीन्हा। तेहिं जड़ बरु बाउर कस कीन्हा॥
adhika saneham̐ goda baiṭhārī| syāma saroja nayana bhare bārī||
jehiṃ bidhi tumhahi rūpu asa dīnhā| tehiṃ jaṛa baru bāura kasa kīnhā||
Meaning और अत्यन्त ख्रेहसे गोदमें बैठाकर अपने नील कमलके समान नेत्रोंगें आँसू भरकर कहा-- जिस विधाताने तुमको ऐसा सुन्दर रूप दिया, उस मूर्खने तुम्हारे दूल्हेको बावला कैसे बनाया ?॥ ४॥
कस कीन्ह बरु बौराह बिधि जेहिं तुम्हहि सुंदरता दई।
जो फलु चहिअ सुरतरुहिं सो बरबस बबूरहिं लागई॥
तुम्ह सहित गिरि तें गिरौं पावक जरौं जलनिधि महुँ परौं।
घरु जाउ अपजसु होउ जग जीवत बिबाहु न हौं करौं॥
kasa kīnha baru baurāha bidhi jehiṃ tumhahi suṃdaratā daī|
jo phalu cahia surataruhiṃ so barabasa babūrahiṃ lāgaī||
tumha sahita giri teṃ girauṃ pāvaka jarauṃ jalanidhi mahum̐ parauṃ|
gharu jāu apajasu hou jaga jīvata bibāhu na hauṃ karauṃ||
Meaning जिस विधाताने तुमको सुन्दरता दी, उसने तुम्हारे लिये वर बावला कैसे बनाया? जो फल कल्पवृक्षमें लगना चाहिये, वह जबर्दस्ती बबूलमें लग रहा है। मैं तुम्हें लेकर पहाड़से गिर पड़ेंगी, आगमें जल जाऊँगी या समुद्रमें कूद पड़ेँगी। चाहे घर उजड़ जाय और संसारभरमें अपकीर्ति फैल जाय, पर जीते-जी मैं इस बावले वरसे तुम्हारा विवाह न करूँगी।
भई बिकल अबला सकल दुखित देखि गिरिनारि।
करि बिलापु रोदति बदति सुता सनेहु सँभारि॥ ९६॥
bhaī bikala abalā sakala dukhita dekhi girināri|
kari bilāpu rodati badati sutā sanehu sam̐bhāri|| 96||
Meaning हिमाचलकी स्त्री (मैना ) को दुः:खी देखकर सारी स्थत्रियाँ व्याकुल हो गयीं। मैना अपनी कन्याके स्नेहको याद करके विलाप करती, रोती और कहती थीं--॥ ९६॥
नारद कर मैं काह बिगारा। भवनु मोर जिन्ह बसत उजारा॥
अस उपदेसु उमहि जिन्ह दीन्हा। बौरे बरहि लगि तपु कीन्हा॥
nārada kara maiṃ kāha bigārā| bhavanu mora jinha basata ujārā||
asa upadesu umahi jinha dīnhā| baure barahi lagi tapu kīnhā||
Meaning मैंने नारदका क्या बिगाड़ा था, जिन्होंने मेरा बसता हुआ घर उजाड़ दिया और जिन्होंने पार्वती- को ऐसा उपदेश दिया कि जिससे उसने बावले वरके लिये तप किया॥ १॥
साचेहुँ उन्ह के मोह न माया। उदासीन धनु धामु न जाया॥
पर घर घालक लाज न भीरा। बाझँ कि जान प्रसव कैं पीरा॥
sācehum̐ unha ke moha na māyā| udāsīna dhanu dhāmu na jāyā||
para ghara ghālaka lāja na bhīrā| bājham̐ ki jāna prasava kaiṃ pīrā||
Meaning सचमुच उनके न किसीका मोह है, न माया, न उनके धन है, न घर है और न स्त्री ही है; वे सबसे उदासीन हैं। इसीसे वे दूसरेका घर उजाड़नेवाले हैं। उन्हें न किसीकी लाज है, न डर है। भला, बाँझ स्त्री प्रसवकी पीड़ाको क्या जाने॥ २॥
जननिहि बिकल बिलोकि भवानी। बोली जुत बिबेक मृदु बानी॥
अस बिचारि सोचहि मति माता। सो न टरइ जो रचइ बिधाता॥
jananihi bikala biloki bhavānī| bolī juta bibeka mṛdu bānī||
asa bicāri socahi mati mātā| so na ṭarai jo racai bidhātā||
Meaning माताको विकल देखकर पार्वतीजी विवेकयुक्त कोमल वाणी बोलीं--हे माता! जो विधाता रच देते हैं, वह टलता नहीं; ऐसा विचारकर तुम सोच मत करो!॥ ३॥
करम लिखा जौ बाउर नाहू। तौ कत दोसु लगाइअ काहू॥
तुम्ह सन मिटहिं कि बिधि के अंका। मातु ब्यर्थ जनि लेहु कलंका॥
karama likhā jau bāura nāhū| tau kata dosu lagāia kāhū||
tumha sana miṭahiṃ ki bidhi ke aṃkā| mātu byartha jani lehu kalaṃkā||
Meaning जो मेरे भाग्यमें बावला ही पति लिखा है तो किसीको क्यों दोष लगाया जाय ? हे माता! क्या विधाताके अड्भ तुमसे मिट सकते हैं ? वृथा कलड्लका टीका मत लो॥ ४॥
जनि लेहु मातु कलंक॒ करुना परिहरहु अवसर नहीं।
दुखु सुखु जो लिखा लिलार हमरें जाब जहूँ पाउब तहीं॥
सुनि उमा बचन बिनीत कोमल सकल अबला सोचटहीं।
बहु भाँति बिधिहि लगाड़ दूषन नयन बारि बिमोचहीं॥
jani lehu mātu kalaṃka karunā pariharahu avasara nahīṃ|
dukhu sukhu jo likhā lilāra hamareṃ jāba jahūm̐ pāuba tahīṃ||
suni umā bacana binīta komala sakala abalā socaṭahīṃ|
bahu bhām̐ti bidhihi lagāṛa dūṣana nayana bāri bimocahīṃ||
Meaning हे माता! कलड् मत लो, रोना छोड़ो, यह अवसर विषाद करनेका नहीं है। मेरे भाग्यमें जो दुः:ख- सुख लिखा है, उसे मैं जहाँ जाऊँगी, वहीं पाऊँगी ! पार्वतीजीके ऐसे विनयभरे कोमल वचन सुनकर सारी स्त्रियाँ सोच करने लगीं और भाँति-भाँतिसे विधाताको दोष देकर आँखोंसे आँसू बहाने लरगीं।
तेहि अवसर नारद सहित अरु रिषि सप्त समेत।
समाचार सुनि तुहिनगिरि गवने तुरत निकेत॥ ९७॥
tehi avasara nārada sahita aru riṣi sapta sameta|
samācāra suni tuhinagiri gavane turata niketa|| 97||
Meaning इस समाचारको सुनते ही हिमाचल उसी समय नारदजी और ससर्पियोंको साथ लेकर अपने घर गये॥ ९७॥
तब नारद सबहि समुझावा। पूरुब कथाप्रसंगु सुनावा॥
मयना सत्य सुनहु मम बानी। जगदंबा तव सुता भवानी॥
taba nārada sabahi samujhāvā| pūruba kathāprasaṃgu sunāvā||
mayanā satya sunahu mama bānī| jagadaṃbā tava sutā bhavānī||
Meaning तब नारदजीने पूर्वजन्मकी कथा सुनाकर सबको समझाया [और कहा] कि हे मैना! तुम मेरी सच्ची बात सुनो, तुम्हारी यह लड़की साक्षात् जगज्जननी भवानी है॥ १॥
अजा अनादि सक्ति अबिनासिनि। सदा संभु अरधंग निवासिनि॥
जग संभव पालन लय कारिनि। निज इच्छा लीला बपु धारिनि॥
ajā anādi sakti abināsini| sadā saṃbhu aradhaṃga nivāsini||
jaga saṃbhava pālana laya kārini| nija icchā līlā bapu dhārini||
Meaning ये अजन्मा, अनादि और अविनाशिनी शक्ति हैं। सदा शिवजीके अद्धद़्में रहती हैं। ये जगत्की उत्पत्ति, पालन और संहार करनेवाली हैं; और अपनी इच्छासे ही लीला-शरीर धारण करती हैं॥ २॥
जनमीं प्रथम दच्छ गृह जाई। नामु सती सुंदर तनु पाई॥
तहँहुँ सती संकरहि बिबाहीं। कथा प्रसिद्ध सकल जग माहीं॥
janamīṃ prathama daccha gṛha jāī| nāmu satī suṃdara tanu pāī||
taham̐hum̐ satī saṃkarahi bibāhīṃ| kathā prasiddha sakala jaga māhīṃ||
Meaning पहले ये दक्षके घर जाकर जनमी थीं, तब इनका सती नाम था, बहुत सुन्दर शरीर पाया था। वहाँ भी सती शड्भरजीसे ही ब्याही गयी थीं। यह कथा सारे जगतमें प्रसिद्ध है॥ ३॥
एक बार आवत सिव संगा। देखेउ रघुकुल कमल पतंगा॥
भयउ मोहु सिव कहा न कीन्हा। भ्रम बस बेषु सीय कर लीन्हा॥
eka bāra āvata siva saṃgā| dekheu raghukula kamala pataṃgā||
bhayau mohu siva kahā na kīnhā| bhrama basa beṣu sīya kara līnhā||
Meaning एक बार इन्होंने शिवजीके साथ आते हुए [ राहमें] रघुकुलरूपी कमलनके सूर्य श्रीरामचन्द्रजीको देखा, तब इन्हें मोह हो गया और इन्होंने शिवजीका कहना न मानकर श्रमवश सीताजीका वेष धारण कर लिया॥ ४॥
सिय बेषु सतीं जो कीन्ह तेहिं अपराध संकर परिहरीं।
हर बिरहें जाइ बहोरि पितु कें जग्य जोगानल जरीं॥
अब जनमि तुम्हरे भवन निज पति लागि दारुन तपु किया।
अस जानि संसय तजहु गिरिजा सर्बदा संकरप्रिया॥
siya beṣu satīṃ jo kīnha tehiṃ aparādha saṃkara pariharīṃ|
hara biraheṃ jāi bahori pitu keṃ jagya jogānala jarīṃ||
aba janami tumhare bhavana nija pati lāgi dāruna tapu kiyā|
asa jāni saṃsaya tajahu girijā sarbadā saṃkarapriyā||
Meaning सतीजीने जो सीताका वेष धारण किया, उसी अपराधके कारण शड्भरजीने उनको त्याग दिया। फिर शिवजीके वियोगमें ये अपने पिताके यज्ञमें जाकर वहीं योगाग्निसे भस्म हो गयीं। अब इन्होंने तुम्हारे घर जन्म लेकर अपने पतिके लिये कठिन तप किया है ऐसा जानकर सन्देह छोड़ दो, पार्वतीजी तो सदा ही शिवजीकी प्रिया ( अर्द्धाज्विनी ) हैं।
सुनि नारद के बचन तब सब कर मिटा बिषाद।
छन महुँ ब्यापेड सकल पुर घर घर यह संबाद॥ ९८॥
suni nārada ke bacana taba saba kara miṭā biṣāda|
chana mahum̐ byāpeḍa sakala pura ghara ghara yaha saṃbāda|| 98||
Meaning तब नारदके वचन सुनकर सबका विषाद मिट गया और क्षणभरमें यह समाचार सारे नगरमें घर-घर फैल गया॥ ९८॥
तब मयना हिमवंतु अनंदे। पुनि पुनि पारबती पद बंदे॥
नारि पुरुष सिसु जुबा सयाने। नगर लोग सब अति हरषाने॥
taba mayanā himavaṃtu anaṃde| puni puni pārabatī pada baṃde||
nāri puruṣa sisu jubā sayāne| nagara loga saba ati haraṣāne||
Meaning तब मैना और हिमवान् आनन्दमें मग्न हो गये और उन्होंने बार-बार पार्वतीके चरणोंकी वन्दना की। स्त्री, पुरुष, बालक, युवा और वृद्ध नगरके सभी लोग बहुत प्रसन्न हुए॥ १॥
लगे होन पुर मंगलगाना। सजे सबहि हाटक घट नाना॥
भाँति अनेक भई जेवराना। सूपसास्त्र जस कछु ब्यवहारा॥
lage hona pura maṃgalagānā| saje sabahi hāṭaka ghaṭa nānā||
bhām̐ti aneka bhaī jevarānā| sūpasāstra jasa kachu byavahārā||
Meaning नगरमें मज़लगीत गाये जाने लगे और सबने भाँति-भाँतिके सुवर्णके कलश सजाये। पाकशास्त्रमें जैसी रीति है, उसके अनुसार अनेक भाँतिकी ज्योनार हुई (रसोई बनी)॥ २॥
सो जेवनार कि जाइ बखानी। बसहिं भवन जेहिं मातु भवानी॥
सादर बोले सकल बराती। बिष्नु बिरंचि देव सब जाती॥
so jevanāra ki jāi bakhānī| basahiṃ bhavana jehiṃ mātu bhavānī||
sādara bole sakala barātī| biṣnu biraṃci deva saba jātī||
Meaning जिस घरें स्वयं माता भवानी रहती हों, वहाँकी ज्योनार ( भोजनसामग्री ) का वर्णन कैसे किया जा सकता है ? हिमाचलने आदरपूर्वक सब बरातियोंको--विष्णु, ब्रह्मा और सब जातिके देवताओंको बुलवाया॥ ३॥
बिबिधि पाँति बैठी जेवनारा। लागे परुसन निपुन सुआरा॥
नारिबृंद सुर जेवँत जानी। लगीं देन गारीं मृदु बानी॥
bibidhi pām̐ti baiṭhī jevanārā| lāge parusana nipuna suārā||
nāribṛṃda sura jevam̐ta jānī| lagīṃ dena gārīṃ mṛdu bānī||
Meaning भोजन [ करनेवालों] की बहुत-सी पड़तें बेठीं। चतुर रसोइये परोसने लगे। स्त्रियोंकी मण्डलियाँ देवताओंको भोजन करते जानकर कोमल वाणीसे गालियाँ देने लगीं॥ ४॥
गारीं मधुर स्वर देहिं सुंदरि बिंग्य बचन सुनावहीं।
भोजनु करहिं सुर अति बिलंबु बिनोदु सुनि सचु पावहीं॥
जेवेंत जो बढ़यो अनंदु सो मुख कोटिहूँ न परै कहो।
अचवाँइ दीन्हे पान गवने बास जहँ जाको रहयो॥
gārīṃ madhura svara dehiṃ suṃdari biṃgya bacana sunāvahīṃ|
bhojanu karahiṃ sura ati bilaṃbu binodu suni sacu pāvahīṃ||
jeveṃta jo baṛhayo anaṃdu so mukha koṭihūm̐ na parai kaho|
acavām̐i dīnhe pāna gavane bāsa jaham̐ jāko rahayo||
Meaning सब सुन्दरी स्त्रियाँ मीठे स्वरमें गालियाँ देने लगीं और व्यंग्यभरे वचन सुनाने लगीं। देवगण विनोद सुनकर बहुत सुख अनुभव करते हैं, इसलिये भोजन करनेमें बड़ी देर लगा रहे हैं। भोजनके समय जो आनन्द बढ़ा, वह करोड़ों मुँहसे भी नहीं कहा जा सकता। [ भोजन कर चुकनेपर] सबके हाथ-मुँह धुलवाकर पान दिये गये। फिर सब लोग, जो जहाँ ठहरे थे, वहाँ चले गये।
बहुरि मुनिन््ह हिमवंत कहूँ लगन सुनाई आइ।
समय बिलोकि बिबाह कर पठए देव बोलाइ॥ ९९॥
bahuri muninha himavaṃta kahūm̐ lagana sunāī āi|
samaya biloki bibāha kara paṭhae deva bolāi|| 99||
Meaning फिर मुनियोंने लौटकर हिमवानूको लगन (लग्नपत्रिका) सुनायी और विवाहका समय देखकर देवताओंको बुला भेजा॥ ९९॥
बोलि सकल सुर सादर लीन्हे। सबहि जथोचित आसन दीन्हे॥
बेदी बेद बिधान सँवारी। सुभग सुमंगल गावहिं नारी॥
boli sakala sura sādara līnhe| sabahi jathocita āsana dīnhe||
bedī beda bidhāna sam̐vārī| subhaga sumaṃgala gāvahiṃ nārī||
Meaning सब देवताओंको आदरसहित बुलवा लिया और सबको यथायोग्य आसन दिये। वेदकी रीतिसे वेदी सजायी गयी और स््त्रयाँ सुन्दर श्रेष्ठ मज़लगीत गाने लगीं॥ १॥
सिंघासनु अति दिब्य सुहावा। जाइ न बरनि बिरंचि बनावा॥
बैठे सिव बिप्रन्ह सिरु नाई। हृदयँ सुमिरि निज प्रभु रघुराई॥
siṃghāsanu ati dibya suhāvā| jāi na barani biraṃci banāvā||
baiṭhe siva bipranha siru nāī| hṛdayam̐ sumiri nija prabhu raghurāī||
Meaning वेदिकापर एक अत्यन्त सुन्दर दिव्य सिंहासन था, जिस [की सुन्दरता] का वर्णन नहीं किया जा सकता; क्योंकि वह स्वयं ब्रह्माजीका बनाया हुआ था। ब्राह्मणोंको सिर नवाकर और हदयमें अपने स्वामी श्रीरघुनाथजीका स्मरण करके शिवजी उस सिंहासनपर बैठ गये॥ २॥
बहुरि मुनीसन्ह उमा बोलाई। करि सिंगारु सखीं लै आई॥
देखत रूपु सकल सुर मोहे। बरनै छबि अस जग कबि को है॥
bahuri munīsanha umā bolāī| kari siṃgāru sakhīṃ lai āī||
dekhata rūpu sakala sura mohe| baranai chabi asa jaga kabi ko hai||
Meaning फिर मुनीश्वरोंने पार्वतीजीको बुलाया। सखियाँ श्रूज्धार करके उन्हें ले आयीं। पार्वतीजीके रूपको देखते ही सब देवता मोहित हो गये। संसारमें ऐसा कवि कौन है जो उस सुन्दरताका वर्णन कर सके!॥ ३॥
जगदंबिका जानि भव भामा। सुरन्ह मनहिं मन कीन्ह प्रनामा॥
सुंदरता मरजाद भवानी। जाइ न कोटिहुँ बदन बखानी॥
jagadaṃbikā jāni bhava bhāmā| suranha manahiṃ mana kīnha pranāmā||
suṃdaratā marajāda bhavānī| jāi na koṭihum̐ badana bakhānī||
Meaning पार्वतीजीको जगदम्बा और शिवजीकी पत्नी समझकर देवताओंने मन-ही-मन प्रणाम किया। भवानीजी सुन्दरताकी सीमा हैं। करोड़ों मुखोंसे भी उनकी शोभा नहीं कही जा सकती॥ ४॥
कोटिहुँ बदन नहिं बनै बरनत जग जननि सोभा महा।
सकुचहिं कहतश्रुति सेष सारद मंदमति तुलसी कहा॥
छबिखानि मातु भवानि गवनीं मध्य मंडप सिव जहाँ।
अवलोकि सकहिं न सकुच पति पद कमल मनु मधुकरु तहाँ॥
koṭihum̐ badana nahiṃ banai baranata jaga janani sobhā mahā|
sakucahiṃ kahataśruti seṣa sārada maṃdamati tulasī kahā||
chabikhāni mātu bhavāni gavanīṃ madhya maṃḍapa siva jahām̐|
avaloki sakahiṃ na sakuca pati pada kamala manu madhukaru tahām̐||
Meaning जगज्जननी पार्वतीजीकी महान् शोभाका वर्णन करोड़ों मुखोंसे भी करते नहीं बनता। वेद, शेषजी और सरस्वतीजीतक उसे कहते हुए सकुचा जाते हैं, तब मन्दबुद्धि तुलसी किस गिनतीमें है। सुन्दरता और शोभाकी खान माता भवानी मण्डपके बीचमें, जहाँ शिवजी थे, वहाँ गयीं। वे संकोचके मारे पति (शिवजी) के चरणकमलोंको देख नहीं सकतीं, परन्तु उनका मनरूपी भौंरा तो वहीं [रस-पान कर रहा] था।
मुनि अनुसासन गनपतिहि पूजेउ संभु भवानि।
कोउ सुनि संसय करे जनि सुर अनादि जियें जानि॥ १००॥
muni anusāsana ganapatihi pūjeu saṃbhu bhavāni|
kou suni saṃsaya kare jani sura anādi jiyeṃ jāni|| 100||
Meaning मुनियोंकी आज्ञासे शिवजी और पार्वतीजीने गणेशजीका पूजन किया। मनमें देवताओंको अनादि समझकर कोई इस बातको सुनकर शड्जा न करे [कि गणेशजी तो शिव-पार्वतीकी सन्तान हैं, अभी विवाहसे पूर्व ही वे कहाँसे आ गये]॥ १००॥
जसि बिबाह कै बिधि श्रुति गाई। महामुनिन्ह सो सब करवाई॥
गहि गिरीस कुस कन्या पानी। भवहि समरपीं जानि भवानी॥
jasi bibāha kai bidhi śruti gāī| mahāmuninha so saba karavāī||
gahi girīsa kusa kanyā pānī| bhavahi samarapīṃ jāni bhavānī||
Meaning वेदोंमें विवाहकी जैसी रीति कही गयी है, महामुनियोंने वह सभी रीति करवायी। पर्वतराज हिमाचलने हाथमें कुश लेकर तथा कन्याका हाथ पकड़कर उन्हें भवानी (शिवपत्नी) जानकर शिवजीको समर्पण किया॥ १॥
पानिग्रहन जब कीन्ह महेसा। हिंयँ हरषे तब सकल सुरेसा॥
बेद मंत्र मुनिबर उच्चरहीं। जय जय जय संकर सुर करहीं॥
pānigrahana jaba kīnha mahesā| hiṃyam̐ haraṣe taba sakala suresā||
beda maṃtra munibara uccarahīṃ| jaya jaya jaya saṃkara sura karahīṃ||
Meaning जब महेश्वर (शिवजी) ने पार्वतीका पाणिग्रहण किया, तब [इन्द्रादि] सब देवता हृदयमें बड़े ही हर्षित हुए। श्रेष्ठ मुनिगण वेदमन्त्रोंका उच्चारण करने लगे और देवगण शिवजीका जय-जयकार करने लगे॥ २॥
बाजहिं बाजन बिबिध बिधाना। सुमनबृष्टि नभ भै बिधि नाना॥
हर गिरिजा कर भयउ बिबाहू। सकल भुवन भरि रहा उछाहू॥
bājahiṃ bājana bibidha bidhānā| sumanabṛṣṭi nabha bhai bidhi nānā||
hara girijā kara bhayau bibāhū| sakala bhuvana bhari rahā uchāhū||
Meaning अनेकों प्रकारके बाजे बजने लगे। आकाशसे नाना प्रकारके फूलोंकी वर्षा हुई। शिव-पार्वतीका विवाह हो गया। सारे ब्रह्माण्डमें आनन्द भर गया॥ ३॥
दासीं दास तुरग रथ नागा। धेनु बसन मनि बस्तु बिभागा॥
अन्न कनकभाजन भरि जाना। दाइज दीन्ह न जाइ बखाना॥
dāsīṃ dāsa turaga ratha nāgā| dhenu basana mani bastu bibhāgā||
anna kanakabhājana bhari jānā| dāija dīnha na jāi bakhānā||
Meaning दासी, दास, रथ, घोड़े, हाथी, गायें, वस्त्र और मणि आदि अनेक प्रकारकी चीजें, अन्न तथा सोनेके. बर्तन गाड़ियोंगें लदवाकर दहेजमें दिये, जिनका वर्णन नहीं हो सकता॥ ४॥
दाइज दियो बहु भाँति पुनि कर जोरि हिमभूधर कह्मो।
का देउँ पूरनकाम संकर चरन पंकज गहि रह्मो॥
सितें कृपासागर ससुर कर संतोषु सब भातिहिं कियो।
पुनि गहे पद पाथोज मयनों प्रेम परिपूरन हियो॥
dāija diyo bahu bhām̐ti puni kara jori himabhūdhara kahmo|
kā deum̐ pūranakāma saṃkara carana paṃkaja gahi rahmo||
siteṃ kṛpāsāgara sasura kara saṃtoṣu saba bhātihiṃ kiyo|
puni gahe pada pāthoja mayanoṃ prema paripūrana hiyo||
Meaning बहुत प्रकारका दहेज देकर, फिर हाथ जोड़कर हिमाचलने कहा--हे श्र ! आप पूर्णकाम हैं, मैं आपको क्या दे सकता हूँ? [इतना कहकर] वे शिवजीके चरणकमल पकड़कर रह गये। तब कृपाके सागर शिवजीने अपने ससुरका सभी प्रकारसे समाधान किया। फिर प्रेमसे परिपूर्णहदय मैनाजीने शिवजीके चरणकमल पकड़े [और कहा-]।
नाथ उमा मम प्रान सम गृहकिंकरी करेहु।
छमेहु सकल अपराध अब होड़ प्रसन्न बरु देहु॥ १०१॥
nātha umā mama prāna sama gṛhakiṃkarī karehu|
chamehu sakala aparādha aba hoṛa prasanna baru dehu|| 101||
Meaning हे नाथ! यह उमा मुझे मेरे प्राणोंके समान [प्यारी] है। आप इसे अपने घरकी टहलनी बनाइयेगा और इसके सब अपराधोंको क्षमा करते रहियेगा। अब प्रसन्न होकर मुझे यही वर दीजिये॥ १०१॥