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कौमारिकी व्रत कथा

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कौमारिकी व्रत भगवान शिव और पार्वती के पुत्र कार्तिकेय (स्कन्द) को समर्पित है और चैत्र शुक्ल पक्ष की षष्ठी को स्कन्द षष्ठी के रूप में मनाया जाता है। नीचे इसकी व्रत कथा, पूजा विधि एवं महात्म्य दिया गया है।

शिव और पार्वती के पुत्र कार्तिकेय को कौमारिकी नाम से जाना जाता है। इन्हीं के जन्म दिवस पर चैत्र मास की शुक्ल पक्ष की षष्ठी तिथि को स्कन्द षष्ठी के नाम से मनाया जाता है। वर्ष 2011 में यह व्रत 9 अप्रैल के दिन किया जायेगा। इस व्रत में कार्तिकेय एवं उनकी माता पार्वती की पूजा की जाती है। कौमारिकी षष्ठी व्रत आमतौर पर महिलाएं रखती हैं। इस व्रत के विषय में वाराह पुराण में जिक्र मिलता है। कुमार कार्तिकेय का व्रत होने के कारण इसे स्कंद षष्ठी व्रत के नाम से भी जाना जाता है।

कौमारिकी षष्ठी व्रत कथा

राक्षस राज तारकासुर का अत्याचार बढ़ता जा रहा था। उसने देवलोक पर आक्रमण करके देवराज इन्द्र को पराजित कर दिया। देवतागण अपनी दुर्दशा से काफी दुखी हुए और ब्रह्मा जी के पास अपनी समस्या लेकर उपस्थित हुए। ब्रह्मा जी ने देवताओं की समस्या को सुनकर काफी विचार किया और कहा कि तारकासुर का अंत केवल शिव पुत्र कर सकता है। इस उत्तर को सुनकर देवतागण चिंतित हो उठे क्योंकि शिव सती के वियोग में समाधि लगाए हुए थे। शिव को समाधि से जगाना फिर उनका विवाह कराना देवता को असंभव कार्य लग रहा था।

देवताओं की परेशानियों को दूर करने के लिए कामदेव ने शिव को समाधि से जगाने का आश्वासन दिया। कामदेव को अपने प्रयास में सफलता मिली और शिव की समाधि टूट गई। कामदेव को इस दुःसाहस के कारण अपना शरीर खोना पड़ा। देवताओं ने जब शिव से तारकासुर के विषय में कहा तब शिव का क्रोध शांत हुआ और उन्होंने देवताओं के कल्याण हेतु दूसरा विवाह करना स्वीकार किया।

दूसरी तरफ सती पार्वती रूप में पुनर्जन्म लेकर शिव को पुनः पति रूप में पाने के लिए तपस्या कर रही थी। शिव ने पार्वती की तपस्या से प्रसन्न होकर उनसे विवाह कर लिया। चैत्र मास की शुक्ल पक्ष की षष्ठी के दिन शिव और पार्वती के पुत्र के रूप में कुमार कार्तिकेय का जन्म हुआ। कहा जाता है कि कृतिकाओं ने कुमार कार्तिकेय का पालन-पोषण किया अतः इनका नाम कार्तिकेय पड़ा।

देवताओं ने भगवान शिव से कार्तिकेय को मांगकर उनकी पूजा की और उन्हें अपना सेनापति बनाकर तारकासुर की नगरी पर आक्रमण कर दिया। तारकासुर और कुमार कार्तिकेय का युद्ध 6 दिनों तक चलता रहा। इस युद्ध में कार्तिकेय ने अपनी शक्ति के प्रहार से तारकासुर का वध कर दिया। देवताओं को तारकासुर द्वारा हड़प लिया गया स्वर्ग वापस मिल गया।

कौमारिकी षष्ठी व्रत विधि

कौमारिकी षष्ठी व्रत में पंचमी से युक्त षष्ठी तिथि के दिन व्रत रखना श्रेष्ठ माना जाता है। इस व्रत में पंचमी के दिन से व्रत आरम्भ किया जाता है। षष्ठी के दिन भी व्रत रखकर कुमार कार्तिकेय एवं माता पार्वती की पूजा की जाती है। कुमार कार्तिकेय को दक्षिण दिशा की तरफ मुंह करके अर्घ्य दिया जाता है। स्कन्द कुमार को दही, घी, चावल, फल एवं मिष्टान्न अर्पित करने का भी विधान है। कार्तिकेय भगवान को वस्त्र एवं तांबे का चूड़ा भी भेंट किया जाता है। पूजा के बाद श्रद्धालु भक्त सनतकुमार की आरती भी गाते हैं। व्रत चाहें तो इस दिन फलाहार कर सकते हैं।

दक्षिण दिशा-कार्तिकेय पूजा विधान

कार्तिकेय की पूजा दक्षिण दिशा की तरफ मुंह करके की जाती है, इसकी भी एक कथा है। कथा के अनुसार एक बार शिव जी और माता पार्वती ने गणेश एवं कार्तिकेय जी से कहा कि जो पहले पृथ्वी की परिक्रमा पूरी करके लौट आएगा उसकी पूजा पहले होगी। कार्तिकेय जी मोर पर चढ़कर पृथ्वी की परिक्रमा करने लगे।

गणेश जी का वाहन चूहा था अतः वह कार्तिकेय की भांति तेजी से पृथ्वी की परिक्रमा नहीं कर सकते थे। इस स्थिति में गणेश जी ने बुद्धि से काम लेते हुए माता-पिता की परिक्रमा पूरी कर ली। शास्त्रानुसार माता पृथ्वी कही गई है अतः गणेश जी को विजयी घोषित कर दिया गया।

कार्तिकेय जी इस बात से नाराज होकर दक्षिण दिशा में चले गये, यही कारण है कि कार्तिकेय की पूजा दक्षिण की तरफ मुख करके की जाती है। दक्षिण भारत में कार्तिकेय सभी देवों में प्रमुख माने जाते हैं, वहां इन्हें मुरुगन स्वामी के नाम से पूजा जाता है।

स्कन्द षष्ठी महात्म्य-फल

दाम्पत्य जीवन की सबसे बड़ी चाहत संतान होती है। मान्यता है कि इस व्रत को करने से संतान सुख मिलता है। संतान के स्वास्थ्य के लिए भी यह व्रत उत्तम माना गया है। इस व्रत को करने से आरोग्य एवं वैभव की भी प्राप्ति होती है।

स्रोत 1

  • Vrat Katha (Archive.org - VratKathaBook) — कौमारिकी व्रत कथा, पृष्ठ 250–251

    पुस्तक के स्कैन किए गए पृष्ठ-चित्रों से पाठ अक्षरशः उतारा गया और मानक हिंदी वर्तनी में सम्पादित किया गया।

अर्थ वेद पथ संपादकीय टीम द्वारा संकलित एवं संपादित हैं, और सामग्री की क्रमशः समीक्षा की जा रही है।

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