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वेद पथ वैदिक ज्ञान का पथ

श्रीरामरक्षास्तोत्रम्

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विनियोग
ध्यानम्
स्तोत्र

परिचय

श्रीरामरक्षास्तोत्रम् भगवान श्रीराम का अत्यन्त प्रसिद्ध एवं शक्तिशाली रक्षा-कवच है, जिसके रचयिता बुधकौशिक ऋषि माने जाते हैं। परम्परा के अनुसार भगवान शिव ने स्वप्न में इसका आदेश दिया और ऋषि ने प्रातः जागकर इसे लिपिबद्ध किया। इसमें श्रीराम के भिन्न-भिन्न स्वरूपों से भक्त के अंग-प्रत्यंग की रक्षा की प्रार्थना है, इसीलिए इसे ‘वज्रपञ्जर’ (वज्र का पिंजरा) कवच भी कहा गया है।

महत्व

भक्तों का विश्वास है कि इस स्तोत्र के नियमित पाठ से भय, रोग, विपत्ति और अकाल-मृत्यु का निवारण होता है तथा दीर्घायु, विजय और मंगल की प्राप्ति होती है। इसे विशेष रूप से श्रीराम नवमी, मंगलवार एवं प्रातःकाल पढ़ा जाता है।

पाठ विधि

स्नान आदि से निवृत्त होकर स्वच्छ आसन पर पूर्व या उत्तर दिशा की ओर मुख करके बैठें। पहले विनियोग एवं ध्यान का पाठ करें, फिर शुद्ध उच्चारण के साथ क्रमशः समस्त श्लोकों का पाठ करें।

इति श्रीबुधकौशिकविरचितं श्रीरामरक्षास्तोत्रं सम्पूर्णम्। ॥ श्रीसीतारामचन्द्रार्पणमस्तु ॥

स्रोत 2

  • मंत्र - श्री राम रक्षा स्तोत्रम् - BhaktiBharat.com — श्रीरामरक्षास्तोत्रम् (बुधकौशिक ऋषि रचित) — विनियोग, ध्यान एवं ३८ श्लोक

    पाठ स्रोत पृष्ठ से लिया गया है। संस्कृत अक्षर, सन्धि एवं अनुस्वार/विसर्ग को प्रामाणिक पाठ (sanskritdocuments.org का ITRANS संस्करण) से मिलान कर शुद्ध किया गया है — यथा 'नरो न लिप्यते', 'रामोऽखिलं', 'दृशौ...श्रुती', 'सुकृती', 'जनकात्मजा'। धार्मिक समीक्षा में गीता प्रेस के मुद्रित संस्करण से पुनः मिलान अपेक्षित है।

  • Sanskrit Documents - Rama Raksha Stotram — raamarakShAstotram (Ananda Ramayana), ITRANS प्रामाणिक पाठ

    संस्कृत अक्षरों एवं सन्धि की शुद्धता के मिलान हेतु प्रयुक्त प्रामाणिक डिजिटल स्रोत।

अर्थ वेद पथ संपादकीय टीम द्वारा संकलित एवं संपादित हैं, और सामग्री की क्रमशः समीक्षा की जा रही है।

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