रामनवमी व्रत कथा
रामनवमी चैत्र शुक्ल नवमी को भगवान श्री राम के जन्मोत्सव के रूप में मनाई जाती है। नीचे इस व्रत से जुड़ी पारम्परिक कथा और व्रत फल दिया गया है।
रामनवमी व्रत कथा
वन में राम, सीता और लक्ष्मण जा रहे थे। सीता जी और लक्ष्मण को थका हुआ देखकर राम जी ने थोड़ा रुककर आराम करने का विचार किया और एक बुढ़िया के घर गए। बुढ़िया सूत कात रही थी। बुढ़िया ने आवभगत की और बैठाया, स्नान-ध्यान करवाकर भोजन करवाया। राम जी ने कहा- बुढ़िया माई, पहले मेरा हंस मोती चुगाओ, तो मैं भी करूं। बेचारी के पास मोती कहां से आवें, सूत कात कर गरीब गुजारा करती थी।
पर अतिथि को ना कहना भी वह ठीक नहीं समझती थी। दुविधा में पड़ गई। अतः मन को मजबूत कर राजा के पास पहुंच गई। और अंजलि मोती देने के लिये विनती करने लगी। राजा अपना अचम्भे में पड़ा कि इसके पास खाने को दाने नहीं है और मोती उधार मांग रही है। इस स्थिति में बुढ़िया से मोती वापस प्राप्त होने का तो सवाल ही नहीं उठता। पर आखिर राजा ने अपने नौकरों से कहकर बुढ़िया को मोती दिला दिये।
बुढ़िया लेकर घर आई, हंस को मोती चुगाए, और मेहमानों की आवभगत की। रात को आराम कर सवेरे राम जी, सीता जी और लक्ष्मण जी जाने लगे। जाते हुए राम जी ने उसके पानी रखने की जगह पर मोतियों का एक पेड़ लगा दिया। दिन बीते पेड़ बड़ा हुआ, पेड़ बढ़ने लगा, पर बुढ़िया को कुछ पता नहीं चला। पास-पड़ोस के लोग चुग-चुगकर मोती ले जाने लगे।
एक दिन जब वह उसके नीचे बैठी सूत कात रही थी तो उसके गोद में एक मोती आकर गिरा। बुढ़िया को तब ज्ञात हुआ। उसने जल्दी से मोती बांधे और अपने कपड़े में बांधकर वह किले की ओर ले चली। उसने मोती की पोटली राजा के सामने रख दी। तो इतने सारे मोती देख राजा अचम्भे में पड़ गया। उसके पूछने पर बुढ़िया ने राजा को सारी बात बता दी। राजा के मन में लालच आ गया।
वह बुढ़िया से मोती का पेड़ मांगने लगा। बुढ़िया ने कहा कि आस-पास के सभी लोग ले जाते हैं। आप भी चाहे तो ले लें। मुझे क्या करना है। राजा ने तुरन्त पेड़ मंगवाया और अपने दरबार में लगवा दिया। पर रामजी की मर्जी, मोतियों की जगह कांटे हो गये और आते-आते लोगों के कपड़े उन कांटों से खराब होने लगे। एक दिन रानी की एड़ी में एक कांटा चुभ गया और पीड़ा करने लगा। राजा ने पेड़ उठवाकर बुढ़िया के घर वापस भिजवा दिया। तो पहले की तरह से मोती लगने लगे। बुढ़िया आराम से रहती और खूब मोती बांटती।
रामनवमी व्रत फल
श्री रामनवमी का व्रत करने से व्यक्ति के ज्ञान में वृद्धि होती है। उसकी धैर्य शक्ति का विस्तार होता है। इसके अतिरिक्त उपवासक को विचार शक्ति, बुद्धि, श्रद्धा, भक्ति और पवित्रता की भी वृद्धि होती है। इस व्रत के विषय में कहा जाता है कि जब इस व्रत को निष्काम भाव से किया जाता है और आजीवन किया जाता है, तो इस व्रत के फल सर्वाधिक प्राप्त होते हैं।
स्रोत 1
- Vrat Katha (Archive.org - VratKathaBook) — रामनवमी व्रत कथा, पृष्ठ 267–268
पुस्तक के स्कैन किए गए पृष्ठ-चित्रों से पाठ अक्षरशः उतारा गया और मानक हिंदी वर्तनी में सम्पादित किया गया।
अर्थ वेद पथ संपादकीय टीम द्वारा संकलित एवं संपादित हैं, और सामग्री की क्रमशः समीक्षा की जा रही है।