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वेद पथ वैदिक ज्ञान का पथ

श्रीसरस्वतीकवचम्

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प्रदर्शन

फलश्रुति 9

विनियोग 2

कवच 13

फलश्रुति 6

समापन 1

परिचय

श्रीसरस्वतीकवचम् ब्रह्मवैवर्तपुराण (प्रकृतिखण्ड) का देवी सरस्वती को समर्पित रक्षा-कवच है, जिसे भगवान् ब्रह्मा ने नारद को कहा। इसमें बीजमन्त्रों (ओं ह्रीं ऐं श्रीं) सहित सरस्वती के विविध रूपों — वाग्देवी, भारती, वाग्वादिनी, ब्राह्मी आदि — का आवाहन कर साधक अपने सिर से चरण तक तथा दसों दिशाओं की रक्षा का वरण करता है। ‘विश्वजय’ नामक यह कवच बुद्धि, विद्या एवं वाणी की सिद्धि हेतु श्रद्धापूर्वक पढ़ा जाता है।

संस्कृत मूल पाठ प्रामाणिक स्रोत से अक्षरशः प्रस्तुत है; अर्थ व्याख्यात्मक हैं। शुद्ध उच्चारण एवं विधि हेतु योग्य आचार्य का मार्गदर्शन श्रेयस्कर है।

स्रोत 2

अर्थ वेद पथ संपादकीय टीम द्वारा संकलित एवं संपादित हैं, और सामग्री की क्रमशः समीक्षा की जा रही है।

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