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वेद पथ वैदिक ज्ञान का पथ

सरस्वती चालीसा

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परिचय

सरस्वती चालीसा माँ सरस्वती की स्तुति में रचित एक भक्तिपूर्ण रचना है। यह चालीसा सरस्वती को शक्ति (देवी) के रूप में स्तुति करती है। इसमें मधु-कैटभ, चण्ड-मुण्ड, रक्तबीज, शुम्भ-निशुम्भ आदि असुरों के संहार का वर्णन है जो देवीमाहात्म्य की कथाओं पर आधारित है। माँ सरस्वती को बुद्धि, बल और विद्या की दातारि के रूप में वन्दित किया गया है।

महत्व

इस चालीसा का पाठ बुद्धि, विद्या और बल की प्राप्ति के लिए किया जाता है। वाल्मीकि, कालिदास, तुलसीदास और सूरदास जैसे महान कवियों को माँ सरस्वती की कृपा से ही विद्या प्राप्त हुई। नित्य पाठ करने से सभी संकट दूर होते हैं और मनोरथ पूर्ण होते हैं।

पाठ विधि

सरस्वती चालीसा का पाठ प्रातःकाल स्नान करके शुद्ध वस्त्र पहनकर करें। माँ सरस्वती के चित्र या मूर्ति के समक्ष श्वेत पुष्प, धूप और नैवेद्य अर्पित करके दीप जलाएँ और श्रद्धापूर्वक पाठ करें।

अर्थ वेद पथ संपादकीय टीम द्वारा संकलित एवं संपादित हैं, और सामग्री की क्रमशः समीक्षा की जा रही है।

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