तापस बेष गात कस जपत निरंतर मोहि।
देखों बेगि सो जतनु करु सखा निहोरँ तोहि॥ ११६ ( ख )॥
tāpasa beṣa gāta kasa japata niraṃtara mohi|
dekhoṃ begi so jatanu karu sakhā nihoram̐ tohi|| 116 ( kha )||
Meaning तपस्वीके वेषमें कृश (दुबले) शरीरसे निरन्तर मेरा नाम जप कर रहे हैं। हे सखा! वही उपाय करो जिससे मैं जल्दी-से-जल्दी उन्हें देख सकूँ। मैं तुमसे निहोरा (अनुरोध) करता हूँ॥ ११६ (ख)॥
बीतें अवधि जाउँ जौं जिअत न पावँ बीर।
सुमिरत अनुज प्रीति प्रभु पुनि पुनि पुलक सरीर॥ ११६ ( ग)॥
bīteṃ avadhi jāum̐ jauṃ jiata na pāvam̐ bīra|
sumirata anuja prīti prabhu puni puni pulaka sarīra|| 116 ( ga)||
Meaning यदि अवधि बीत जानेपर जाता हूँ तो भाईको जीता न पाऊँगा। छोटे भाई भरतजीकी प्रीतिका स्मरण करके प्रभुका शरीर बार-बार पुलकित हो रहा है॥ ११६ (ग)॥
करेहु कल्प भरि राजु तुम्ह मोहि सुमिरेहु मन माहिं।
पुनि मम धाम पाइहटटु जहाँ संत सब जाहिं॥ ११६ (घ )॥
karehu kalpa bhari rāju tumha mohi sumirehu mana māhiṃ|
puni mama dhāma pāihaṭaṭu jahām̐ saṃta saba jāhiṃ|| 116 (gha )||
Meaning [ श्रीरामजीने फिर कहा-- हे विभीषण! तुम कल्पभर राज्य करना, मनमें मेरा निरन्तर स्मरण करते रहना। फिर तुम मेरे उस धामको पा जाओगे जहाँ सब संत जाते हैं॥ ११६ (घ)॥
सुनत बिभीषन बचन राम के। हरषि गहे पद कृपाधाम के॥
बानर भालु सकल हरषाने। गहि प्रभु पद गुन बिमल बखाने॥
sunata bibhīṣana bacana rāma ke| haraṣi gahe pada kṛpādhāma ke||
bānara bhālu sakala haraṣāne| gahi prabhu pada guna bimala bakhāne||
Meaning श्रीरामचन्द्रजीके वचन सुनते ही विभीषणजीने हर्षित होकर कृपाके धाम श्रीरामजीके चरण पकड़ लिये। सभी वानर-भालू हर्षित हो गये और प्रभुके चरण पकड़कर उनके निर्मल गुणोंका बखान करने लगे॥ १॥
बहुरि बिभीषन भवन सिधायो। मनि गन बसन बिमान भरायो॥
लै पुष्पक प्रभु आगें राखा। हँसि करि कृपासिंधु तब भाषा॥
bahuri bibhīṣana bhavana sidhāyo| mani gana basana bimāna bharāyo||
lai puṣpaka prabhu āgeṃ rākhā| ham̐si kari kṛpāsiṃdhu taba bhāṣā||
Meaning फिर विभीषणजी महलको गये और उन्होंने मणियेंकि समूहों (रनों) से और वस्त्रॉंस विमानको भर लिया। फिर उस पुष्पकविमानको लाकर प्रभुके सामने रखा। तब कृपासागर श्रीरामजीने हँसकर कहा--॥ २॥
चढ़ि बिमान सुनु सखा बिभीषन। गगन जाइ बरषहु पट भूषन॥
नभ पर जाइ बिभीषन तबही। बरषि दिए मनि अंबर सबही॥
caṛhi bimāna sunu sakhā bibhīṣana| gagana jāi baraṣahu paṭa bhūṣana||
nabha para jāi bibhīṣana tabahī| baraṣi die mani aṃbara sabahī||
Meaning हे सखा विभीषण! सुनो, विमानपर चढ़कर, आकाशमें जाकर वस्त्रों और गहनोंको बरसा दो। तब (आज्ञा सुनते) ही विभीषणजीने आकाशमें जाकर सब मणियों और वस्त्रोंको बरसा दिया॥ ३॥
जोइ जोइ मन भावइ सोइ लेहीं। मनि मुख मेलि डारि कपि देहीं॥
हँसे रामु श्री अनुज समेता। परम कौतुकी कृपा निकेता॥
joi joi mana bhāvai soi lehīṃ| mani mukha meli ḍāri kapi dehīṃ||
ham̐se rāmu śrī anuja sametā| parama kautukī kṛpā niketā||
Meaning जिसके मनको जो अच्छा लगता है, वह वही ले लेता है। मणियोंको मुँहमें लेकर वानर फिर उन्हें खानेकी चीज न समझकर उगल देते हैं। यह तमाशा देखकर परम विनोदी और कृपाके धाम श्रीरीमजी सीताजी और लक्ष्मणजीसहित हँसने लगे॥ ४॥
मुनि जेहि ध्यान न पावहिं नेति नेति कह बेद।
कृपासिंधु सोइ कपिन्ह सन करत अनेक बिनोद॥ ११७ ( क )॥
muni jehi dhyāna na pāvahiṃ neti neti kaha beda|
kṛpāsiṃdhu soi kapinha sana karata aneka binoda|| 117 ( ka )||
Meaning जिनको मुनि ध्यानमें भी नहीं पाते, जिन्हें वेद नेति-नेति कहते हैं, वे ही कृपाके समुद्र श्रीरामजी वानरोंके साथ अनेकों प्रकारके विनोद कर रहे हैं॥ ११७ (क)॥
उमा जोग जप दान तप नाना मख व्रत नेम।
राम कृपा नहिं करहिं तसि जसि निष्केवल प्रेम॥ ११७ ( ख )॥
umā joga japa dāna tapa nānā makha vrata nema|
rāma kṛpā nahiṃ karahiṃ tasi jasi niṣkevala prema|| 117 ( kha )||
Meaning [शिवजी कहते हैं--] हे उमा! अनेकों प्रकारके योग, जप, दान, तप, यज्ञ, व्रत और नियम करनेपर भी श्रीरामचन्द्रजी वैसी कृपा नहीं करते जैसी अनन्य प्रेम होनेपर करते हैं॥ ११७ (ख)॥
भालु कपिन्ह पट भूषन पाए। पहिरि पहिरि रघुपति पहिं आए॥
नाना जिनस देखि सब कीसा। पुनि पुनि हँसत कोसलाधीसा॥
bhālu kapinha paṭa bhūṣana pāe| pahiri pahiri raghupati pahiṃ āe||
nānā jinasa dekhi saba kīsā| puni puni ham̐sata kosalādhīsā||
Meaning भालुओं और वानरोंने कपड़े-गहने पाये और उन्हें पहन-पहनकर वे श्रीरघुनाथजीके पास आये। अनेकों जातियोंके वानरोंको देखकर कोसलपति श्रीरामजी बार-बार हँस रहे हैं॥ १॥
चितइ सबन्हि पर कीन्हि दाया। बोले मृदुल बचन रघुराया॥
तुम्हरें बल मैं रावनु मार् यो। तिलक बिभीषन कहँ पुनि सार् यो॥
citai sabanhi para kīnhi dāyā| bole mṛdula bacana raghurāyā||
tumhareṃ bala maiṃ rāvanu mār yo| tilaka bibhīṣana kaham̐ puni sār yo||
Meaning श्रीरघुनाथजीने कृपादृष्टिसे देखकर सबपर दया की। फिर वे कोमल वचन बोले--हे भाइयो! तुम्हारे ही बलसे मैंने रावणको मारा और फिर विभीषणका राजतिलक किया॥ २॥
निज निज गृह अब तुम्ह सब जाहू। सुमिरेहु मोहि डरपहु जनि काहू॥
सुनत बचन प्रेमाकुल बानर। जोरि पानि बोले सब सादर॥
nija nija gṛha aba tumha saba jāhū| sumirehu mohi ḍarapahu jani kāhū||
sunata bacana premākula bānara| jori pāni bole saba sādara||
Meaning अब तुम सब अपने-अपने घर जाओ। मेरा स्मरण करते रहना और किसीसे डरना नहीं। ये वचन सुनते ही सब वानर प्रेममें विह्लल होकर हाथ जोड़कर आदरपूर्वक बोले--॥ ३॥
प्रभु जोइ कहहु तुम्हहि सब सोहा। हमरे होत बचन सुनि मोहा॥
दीन जानि कपि किए सनाथा। तुम्ह त्रेलोक ईस रघुनाथा॥
prabhu joi kahahu tumhahi saba sohā| hamare hota bacana suni mohā||
dīna jāni kapi kie sanāthā| tumha treloka īsa raghunāthā||
Meaning प्रभो! आप जो कुछ भी कहें, आपको सब सोहता है। पर आपके वचन सुनकर हमको मोह होता है। हे रघुनाथजी ! आप तीनों लोकोंके ईश्वर हैं। हम वानरोंको दीन जानकर ही आपने सनाथ (कृतार्थ) किया है॥ ४॥
सुनि प्रभु बचन लाज हम मरहीं। मसक कहूँ खगपति हित करहीं॥
देखि राम रुख बानर रीछा। प्रेम मगन नहिं गृह कै ईछा॥
suni prabhu bacana lāja hama marahīṃ| masaka kahūm̐ khagapati hita karahīṃ||
dekhi rāma rukha bānara rīchā| prema magana nahiṃ gṛha kai īchā||
Meaning प्रभुके (ऐसे) वचन सुनकर हम लाजके मारे मरे जा रहे हैं। कहीं मच्छर भी गरुड़का हित कर सकते हैं ? श्रीरामजीका रुख देखकर रीछ-वानर प्रेममें मग्र हो गये। उनकी घर जानेकी इच्छा नहीं है॥ ५॥
प्रभु प्रेरित कपि भालु सब राम रूप उर राखि।
हरष बिषाद सहित चले बिनय बिबिध बिधि भाषि॥ ११८ ( क )॥
prabhu prerita kapi bhālu saba rāma rūpa ura rākhi|
haraṣa biṣāda sahita cale binaya bibidha bidhi bhāṣi|| 118 ( ka )||
Meaning परन्तु प्रभुकी प्रेरणा (आज्ञा) से सब वानर-भालू श्रीरामजीके रूपको हृदयमें रखकर और अनेकों प्रकारसे विनती करके हर्ष और विषादसहित घरको चले॥ ११८ (क)॥
कपिपति नील रीछपति अंगद नल हनुमान।
सहित बिभीषन अपर जे जूथप कपि बलवान॥ ११८ (ख )॥
kapipati nīla rīchapati aṃgada nala hanumāna|
sahita bibhīṣana apara je jūthapa kapi balavāna|| 118 (kha )||
Meaning वानरराज सुग्रीव, नील, ऋक्षराज जाम्बवानू, अंगद, नल और हनुमान् तथा विभीषणसहित और जो बलवान् वानर सेनापति हैं,॥ ११८ (ख)॥
कहि न सकहिं कछु प्रेम बस भरि भरि लोचन बारि।
सन्मुख चितवहिं राम तन नयन निमेष निवारि॥ ११८ ( ग )॥
kahi na sakahiṃ kachu prema basa bhari bhari locana bāri|
sanmukha citavahiṃ rāma tana nayana nimeṣa nivāri|| 118 ( ga )||
Meaning वे कुछ कह नहीं सकते; प्रेमवश नेत्रोंगें जल भर-भरकर, नेत्रोंका पलक मारना छोड़कर (टकटकी लगाये) सम्मुख होकर श्रीरामजीकी ओर देख रहे हैं॥ ११८ (ग)॥
अतिसय प्रीति देख रघुराई। लिन्हे सकल बिमान चढ़ाई॥
मन महुँ बिप्र चरन सिरु नायो। उत्तर दिसिहि बिमान चलायो॥
atisaya prīti dekha raghurāī| linhe sakala bimāna caṛhāī||
mana mahum̐ bipra carana siru nāyo| uttara disihi bimāna calāyo||
Meaning श्रीरघुनाथजीने उनका अतिशय प्रेम देखकर सबको विमानपर चढ़ा लिया। तदनन्तर मन-ही- मन विप्रचरणोंमें सिर नवाकर उत्तर दिशाकी ओर विमान चलाया॥ १॥
चलत बिमान कोलाहल होई। जय रघुबीर कहइ सबु कोई॥
सिंहासन अति उच्च मनोहर। श्री समेत प्रभु बैठै ता पर॥
calata bimāna kolāhala hoī| jaya raghubīra kahai sabu koī||
siṃhāsana ati ucca manohara| śrī sameta prabhu baiṭhai tā para||
Meaning विमानके चलते समय बड़ा शोर हो रहा है। सब कोई श्रीरघुवीरकी जय कह रहे हैं। विमानमें एक अत्यन्त ऊँचा मनोहर सिंहासन है। उसपर सीताजीसहित प्रभु श्रीरामचन्द्रजी विराजमान हो गये॥ २॥
राजत रामु सहित भामिनी। मेरु सृंग जनु घन दामिनी॥
रुचिर बिमानु चलेउ अति आतुर। कीन्ही सुमन बृष्टि हरषे सुर॥
rājata rāmu sahita bhāminī| meru sṛṃga janu ghana dāminī||
rucira bimānu caleu ati ātura| kīnhī sumana bṛṣṭi haraṣe sura||
Meaning पत्नीसहित श्रीरामजी ऐसे सुशोभित हो रहे हैं मानो सुमेरुके शिखरपर बिजलीसहित श्याम मेघ हो। सुन्दर विमान बड़ी शीघ्रतासे चला। देवता हर्षित हुए और उन्होंने फूलोंकी वर्षा की॥ ३॥
परम सुखद चलि त्रिबिध बयारी। सागर सर सरि निर्मल बारी॥
सगुन होहिं सुंदर चहुँ पासा। मन प्रसन्न निर्मल नभ आसा॥
parama sukhada cali tribidha bayārī| sāgara sara sari nirmala bārī||
saguna hohiṃ suṃdara cahum̐ pāsā| mana prasanna nirmala nabha āsā||
Meaning अत्यन्त सुख देनेवाली तीन प्रकारकी (शीतल, मन्द, सुगन्धित) वायु चलने लगी। समुद्र, तालाब और नदियोंका जल निर्मल हो गया। चारों ओर सुन्दर शकुन होने लगे। सबके मन प्रसन्न हैं, आकाश और दिशाएँ निर्मल हैं॥ ४॥
कह रघुबीर देखु रन सीता। लछिमन इहाँ हत्यो इँद्रजीता॥
हनूमान अंगद के मारे। रन महि परे निसाचर भारे॥
kaha raghubīra dekhu rana sītā| lachimana ihām̐ hatyo im̐drajītā||
hanūmāna aṃgada ke māre| rana mahi pare nisācara bhāre||
Meaning श्रीरघुवीरने कहा--हे सीते! रणभूमि देखो। लक्ष्मणने यहाँ इन्द्रको जीतनेवाले मेघनादको मारा था। हनुमान्ू और अंगदके मारे हुए ये भारी-भारी निशाचर रणभूमिमें पड़े हैं॥५॥
कुंभकरन रावन द्वौ भाई।
इहाँ हते सुर मुनि दुखदाई॥
kuṃbhakarana rāvana dvau bhāī| ihām̐ hate sura muni dukhadāī||
Meaning देवताओं और मुनियोंको दुःख देनेवाले कुम्भकर्ण और रावण दोनों भाई यहाँ मारे गये॥ ६॥
इहाँ सेतु बाँध्यो अरु थापेउँ सिव सुख धाम।
सीता सहित कृपानिधि संभुहि कीन्ह प्रनाम॥ ११९ (क )॥
ihām̐ setu bām̐dhyo aru thāpeum̐ siva sukha dhāma|
sītā sahita kṛpānidhi saṃbhuhi kīnha pranāma|| 119 (ka )||
Meaning मैंने यहाँ पुल बाँधा (बँधवाया) और सुखधाम श्रीशिवजीकी स्थापना की। तदनन्तर कृपानिधान श्रीरामजीने सीताजीसहित श्रीरामेध्वर महादेवको प्रणाम किया॥ ११९ (क)॥
जहँ जहँ कृपासिंधु बन कीन्ह बास बिश्राम।
सकल देखाए जानकिहि कहे सबन्हि के नाम॥ ११९ (ख )॥
jaham̐ jaham̐ kṛpāsiṃdhu bana kīnha bāsa biśrāma|
sakala dekhāe jānakihi kahe sabanhi ke nāma|| 119 (kha )||
Meaning वनमें जहाँ-जहाँ करुणासागर श्रीरामचन्द्रजीने निवास और विश्राम किया था, वे सब स्थान प्रभुने जानकीजीको दिखलाये और सबके नाम बतलाये॥ ११९ (ख)॥
तुरत बिमान तहाँ चलि आवा। दंडक बन जहँ परम सुहावा॥
कुंभजादि मुनिनायक नाना। गए रामु सब कें अस्थाना॥
turata bimāna tahām̐ cali āvā| daṃḍaka bana jaham̐ parama suhāvā||
kuṃbhajādi munināyaka nānā| gae rāmu saba keṃ asthānā||
Meaning विमान शीघ्र ही वहाँ चला आया जहाँ परम सुन्दर दण्डकवन था, और अगस्त्य आदि बहुत- से मुनिराज रहते थे। श्रीरामजी इन सबके स्थानोंमें गये॥ १॥
सकल रिषिन्ह सन पाइ असीसा। चित्रकूट आए जगदीसा॥
तहँ करि मुनिन्ह केर संतोषा। चला बिमानु तहाँ ते चोखा॥
sakala riṣinha sana pāi asīsā| citrakūṭa āe jagadīsā||
taham̐ kari muninha kera saṃtoṣā| calā bimānu tahām̐ te cokhā||
Meaning सम्पूर्ण ऋषियोंसे आशीर्वाद पाकर जगदीश्वर श्रीरामजी चित्रकूट आये। वहाँ मुनियोंको सन्तुष्ट किया। [फिर] विमान वहाँसे आगे तेजीके साथ चला॥ २॥
बहुरि राम जानकिहि देखाई। जमुना कलि मल हरनि सुहाई॥
पुनि देखी सुरसरी पुनीता। राम कहा प्रनाम करु सीता॥
bahuri rāma jānakihi dekhāī| jamunā kali mala harani suhāī||
puni dekhī surasarī punītā| rāma kahā pranāma karu sītā||
Meaning फिर श्रीरामजीने जानकीजीको कलियुगके पापोंका हरण करनेवाली सुहावनी यमुनाजीके दर्शन कराये। फिर पवित्र गड़ाजीके दर्शन किये। श्रीरामजीने कहा--हे सीते! इन्हें प्रणाम करो॥ ३॥
तीरथपति पुनि देखु प्रयागा। निरखत जन्म कोटि अघ भागा॥
देखु परम पावनि पुनि बेनी। हरनि सोक हरि लोक निसेनी॥
पुनि देखु अवधपुरी अति पावनि। त्रिबिध ताप भव रोग नसावनि॥
tīrathapati puni dekhu prayāgā| nirakhata janma koṭi agha bhāgā||
dekhu parama pāvani puni benī| harani soka hari loka nisenī||
puni dekhu avadhapurī ati pāvani| tribidha tāpa bhava roga nasāvani||
Meaning फिर तीर्थराज प्रयागको देखो, जिसके दर्शनसे ही करोड़ों जन्मोंके पाप भाग जाते हैं। फिर परम पवित्र त्रिवेणीजीके दर्शन करो, जो शोकोंको हरनेवाली और श्रीहरिके परम धाम [पहुँचने] के लिये सीढ़ीके समान है। फिर अत्यन्त पवित्र अयोध्यापुरीके दर्शन करो, जो तीनों प्रकारके तापों और भव (आवागमनरूपी ) रोगका नाश करनेवाली है॥ ४-५॥
सीता सहित अवध कहूँ कीन्ह कृपाल प्रनाम।
सजल नयन तन पुलकित पुनि पुनि हरषित राम॥ १२० (क )॥
sītā sahita avadha kahūm̐ kīnha kṛpāla pranāma|
sajala nayana tana pulakita puni puni haraṣita rāma|| 120 (ka )||
Meaning यों कहकर कृपालु श्रीरामजीने सीताजीसहित अवधपुरीको प्रणाम किया। सजलनेत्र और पुलकितशरीर होकर श्रीरामजी बार-बार हर्षित हो रहे हैं॥ १२० (क)॥
पुनि प्रभु आइ त्रिबेनीं हरषित मज्जनु कीन््ह।
कपिन्ह सहित बिप्रन्ह कहूँ दान बिबिध बिधि दीन्ह॥ १२० (ख )॥
puni prabhu āi tribenīṃ haraṣita majjanu kīnha|
kapinha sahita bipranha kahūm̐ dāna bibidha bidhi dīnha|| 120 (kha )||
Meaning फिर त्रिवेणीमें आकर प्रभुने हर्षित होकर स्नान किया और वानरोंसहित ब्राह्मणोंको अनेकों प्रकारके दान दिये॥ १२० (ख)॥
प्रभु हनुमंतहि कहा बुझाई। धरि बटु रूप अवधपुर जाई॥
भरतहि कुसल हमारि सुनाएहु। समाचार लै तुम्ह चलि आएहु॥
prabhu hanumaṃtahi kahā bujhāī| dhari baṭu rūpa avadhapura jāī||
bharatahi kusala hamāri sunāehu| samācāra lai tumha cali āehu||
Meaning तदनन्तर प्रभुने हनुमानूजीको समझाकर कहा--तुम ब्रह्मचारीका रूप धरकर अवधपुरीको जाओ। भरतको हमारी कुशल सुनाना और उनका समाचार लेकर चले आना॥ १॥
तुरत पवनसुत गवनत भयउ। तब प्रभु भरद्वाज पहिं गयऊ॥
नाना बिधि मुनि पूजा कीन्ही। अस्तुती करि पुनि आसिष दीन्ही॥
turata pavanasuta gavanata bhayau| taba prabhu bharadvāja pahiṃ gayaū||
nānā bidhi muni pūjā kīnhī| astutī kari puni āsiṣa dīnhī||
Meaning पवनपुत्र हनुमान्जी तुरंत ही चल दिये। तब प्रभु भरद्वाजजीके पास गये। मुनिने [इष्टबुद्धिसे। उनकी अनेकों प्रकारसे पूजा की और स्तुति की और फिर [ लीलाकी दृष्टिसे] आशीर्वाद दिया॥ २॥
मुनि पद बंदि जुगल कर जोरी। चढ़ि बिमान प्रभु चले बहोरी॥
इहाँ निषाद सुना प्रभु आए। नाव नाव कहँ लोग बोलाए॥
muni pada baṃdi jugala kara jorī| caṛhi bimāna prabhu cale bahorī||
ihām̐ niṣāda sunā prabhu āe| nāva nāva kaham̐ loga bolāe||
Meaning दोनों हाथ जोड़कर तथा मुनिके चरणोंकी वन्दना करके प्रभु विमानपर चढ़कर फिर (आगे) चले। यहाँ जब निषादराजने सुना कि प्रभु आ गये, तब उसने 'नाव कहाँ है? नाव कहाँ है?' पुकारते हुए लोगोंको बुलाया॥ ३॥
सुरसरि नाघि जान तब आयो। उतरेउ तट प्रभु आयसु पायो॥
तब सीताँ पूजी सुरसरी। बहु प्रकार पुनि चरनन्हि परी॥
surasari nāghi jāna taba āyo| utareu taṭa prabhu āyasu pāyo||
taba sītām̐ pūjī surasarī| bahu prakāra puni carananhi parī||
Meaning इतनेमें ही विमान गज़ाजीको लॉघकर [इस पार] आ गया और प्रभुकी आज्ञा पाकर वह किनारेपर उतरा। तब सीताजी बहुत प्रकारसे गड़ाजीकी पूजा करके फिर उनके चरणोंपर गिरीं॥ ४॥
दीन्हि असीस हरषि मन गंगा। सुंदरि तव अहिवात अभंगा॥
सुनत गुहा धायउ प्रेमाकुल। आयउ निकट परम सुख संकुल॥
dīnhi asīsa haraṣi mana gaṃgā| suṃdari tava ahivāta abhaṃgā||
sunata guhā dhāyau premākula| āyau nikaṭa parama sukha saṃkula||
Meaning गड्ाजीने मनमें हर्षित होकर आशीर्वाद दिया--हे सुन्दरी ! तुम्हारा सुहाग अखण्ड हो। भगवानके तटपर उतरनेकी बात सुनते ही निषादराज गुह प्रेममें विहल होकर दौड़ा। परम सुखसे परिपूर्ण होकर वह प्रभुके समीप आया,॥ ५॥
प्रभुहि सहित बिलोकि बैदेही। परेउ अवनि तन सुधि नहिं तेही॥
प्रीति परम बिलोकि रघुराई। हरषि उठाइ लियो उर लाई॥
prabhuhi sahita biloki baidehī| pareu avani tana sudhi nahiṃ tehī||
prīti parama biloki raghurāī| haraṣi uṭhāi liyo ura lāī||
Meaning और श्रीजानकीजीसहित प्रभुको देखकर वह [आनन्द-समाधिमें मग्र होकर] पृथ्वीपर गिर पड़ा, उसे शरीरकी सुधि न रही। श्रीरखुनाथजीने उसका परम प्रेम देखकर उसे उठाकर हर्षके साथ हृदयसे लगा लिया॥ ६॥
लियो हदयें लाइ कृपा निधान सुजान रायें रमापती।
बैठारि परम समीप बूझी कुसल सो कर बीनती॥
अब कुसल पद पंकज बिलोकि बिरंचि संकर सेब्य जे।
सुख धाम पूरनकाम राम नमामि राम नमामि ते॥
liyo hadayeṃ lāi kṛpā nidhāna sujāna rāyeṃ ramāpatī|
baiṭhāri parama samīpa būjhī kusala so kara bīnatī||
aba kusala pada paṃkaja biloki biraṃci saṃkara sebya je|
sukha dhāma pūranakāma rāma namāmi rāma namāmi te||
Meaning सुजानोंके राजा (शिरोमणि), लक्ष्मीकान्त, कृपानिधान भगवान्ने उसको हृदयसे लगा लिया और अत्यन्त निकट बैठाकर कुशल पूछी। वह विनती करने लगा--आपके जो चरणकमल ब्रह्माजी और शड्भरजीसे सेवित हैं, उनके दर्शन करके मैं अब सकुशल हूँ। हे सुखधाम ! हे पूर्णकाम श्रीरामजी ! मैं आपको नमस्कार करता हूँ, नमस्कार करता हूँ॥ १॥
सब भाँति अधम निषाद सो हरि भरत ज्यों उर लाइयो।
मतिमंद तुलसीदास सो प्रभु मोह बस बिसराइयो॥
यह रावनारि चरित्र पावन राम पद रतिप्रद सदा।
कामादिहर बिग्यानकर सुर सिद्ध मुनि गावहिं मुदा॥
saba bhām̐ti adhama niṣāda so hari bharata jyoṃ ura lāiyo|
matimaṃda tulasīdāsa so prabhu moha basa bisarāiyo||
yaha rāvanāri caritra pāvana rāma pada ratiprada sadā|
kāmādihara bigyānakara sura siddha muni gāvahiṃ mudā||
Meaning सब प्रकारसे नीच उस निषादको भगवान्ने भरतजीकी भाँति हदयसे लगा लिया। तुलसीदासजी कहते हैं--इस मन्दबुद्धिने (मैंने) मोहवश उस प्रभुको भुला दिया। रावणके शत्रुका यह पवित्र करनेवाला चरित्र सदा ही श्रीरामजीके चरणोंमें प्रीति उत्पन्न करनेवाला है। यह कामादि विकारोंका हरनेवाला और [ भगवान्के स्वरूपका] विशेष ज्ञान उत्पन्न करनेवाला है। देवता, सिद्ध और मुनि आनन्दित होकर इसे गाते हैं॥ २॥
समर बिजय रघुबीर के चरित जे सुनहिं सुजान।
बिजय बिबेक बिभूति नित तिन्हहि देहिं भगवान॥ १२१ (क )॥
samara bijaya raghubīra ke carita je sunahiṃ sujāna|
bijaya bibeka bibhūti nita tinhahi dehiṃ bhagavāna|| 121 (ka )||
Meaning जो सुजान लोग श्रीरघुवीरकी समरविजयसम्बन्धी लीलाको सुनते हैं, उनको भगवान् नित्य विजय, विवेक और विभूति (ऐश्वर्य) देते हैं॥ १२१ (क)॥
यह कलिकाल मलायतन मन करि देखु बिचार।
श्रीरघुनाथ नाम तजि नाहिन आन अधार॥ १२१ (ख )॥
yaha kalikāla malāyatana mana kari dekhu bicāra|
śrīraghunātha nāma taji nāhina āna adhāra|| 121 (kha )||
Meaning अरे मन! विचार करके देख! यह कलिकाल पापोंका घर है। इसमें श्रीरघुनाथजीके नामको छोड़कर [ पापोंसे बचनेके लिये] दूसरा कोई आधार नहीं है॥ १२१ (ख)॥