श्रीतुलसीकवचम्
विनियोग 1
कवच 6
फलश्रुति 14
समापन 1
परिचय
श्रीतुलसीकवचम् भगवती तुलसी (वृन्दा) की आराधना का रक्षा-कवच है, जो श्रीब्रह्माण्डपुराण के तुलसीमाहात्म्य में संगृहीत है। परम्परा के अनुसार इसे भगवान् शिव ने तारकासुर-वध के प्रसंग में अपने पुत्र कार्तिकेय (सैन्येश) को प्रदान किया। इसमें साधक तुलसी के विविध नामों — यशस्विनी, पद्मनयना, सुगन्धा, विष्णुवल्लभा, नारायणप्रिया आदि — का स्मरण कर शिर से चरण तक प्रत्येक अंग की रक्षा का वरण करता है, और फलश्रुति में इसके पाठ से मोक्ष, सन्तान, धन, राज्य आदि अभीष्ट फलों की प्राप्ति कही गई है।
संस्कृत मूल पाठ प्रामाणिक स्रोत से अक्षरशः प्रस्तुत है; अर्थ व्याख्यात्मक हैं। शुद्ध उच्चारण एवं विधि हेतु योग्य आचार्य का मार्गदर्शन श्रेयस्कर है।
स्रोत 2
- Sanskrit Documents — तुलसीकवचम् — Tulasikavacham, encoded/proofread by Sunder Hattangadi et al.
संस्कृत मूल पाठ प्रामाणिक स्रोत से अक्षरशः; अर्थ व्याख्यात्मक। धार्मिक समीक्षा अपेक्षित।
- HinduPad — Tulsi Kavacham (Tulasi Kavacha Stotram) — English meaning and context — body-part protection + phalashruti; Shiva to Kartikeya against Tarakasura
अर्थ वेद पथ संपादकीय टीम द्वारा संकलित एवं संपादित हैं, और सामग्री की क्रमशः समीक्षा की जा रही है।