श्रीनृसिंहकवचम्
फलश्रुति 13
कवच 22
फलश्रुति 2
समापन 2
परिचय
श्रीनृसिंहकवच (अपमृत्युहरम्) भगवान् नृसिंह का एक प्रसिद्ध रक्षा-कवच है, जो सूर्य एवं उनके सारथि अरुण के संवाद के रूप में कहा गया है। इसमें भक्त नृसिंह भगवान् से अपने शिर से लेकर चरणों तक तथा सभी दिशाओं में रक्षा की प्रार्थना करता है, और ‘नृसिंह ही मेरे रक्षक हैं, फिर मृत्यु मेरा क्या करेगी’ — इस भाव से अकालमृत्यु, रोग, भय एवं नकारात्मक शक्तियों से रक्षा का वरण करता है। परम्परा में इसे नित्य श्रद्धापूर्वक पढ़ने से अकालमृत्यु का घोर भय दूर होना माना जाता है।
संस्कृत मूल पाठ प्रामाणिक स्रोत (sanskritdocuments.org) से अक्षरशः लिया गया है; अर्थ व्याख्यात्मक हैं। शुद्ध उच्चारण एवं विधि हेतु योग्य आचार्य का मार्गदर्शन श्रेयस्कर है।
स्रोत 2
- Sanskrit Documents — अपमृत्युहरं श्रीनृसिंहकवचम् — nRRisiMhakavacham apamRRityuharam (श्रीसूर्यारुणसंवाद), proofread ITRANS
संस्कृत मूल पाठ इसी प्रामाणिक, प्रूफरीड स्रोत से अक्षरशः लिया गया है। मूल पाठ का कोलोफ़न इसे श्रीसूर्य-अरुण संवाद के रूप में देता है; अर्थ व्याख्यात्मक हैं। धार्मिक समीक्षा में मुद्रित संस्करण से पुनः मिलान अपेक्षित।
- Stotra Nidhi — Sri Narasimha Kavacham — भगवान् नृसिंह के कवच का पद्यानुसार प्रचलित अंग्रेज़ी अर्थ — व्याख्यात्मक अनुवाद हेतु सन्दर्भ
अर्थ वेद पथ संपादकीय टीम द्वारा संकलित एवं संपादित हैं, और सामग्री की क्रमशः समीक्षा की जा रही है।