श्रीछिन्नमस्ताकवचम्
प्रस्तावना 2
माहात्म्य 4
ऋषि-न्यास 1
कवच 12
दिग्बन्ध 7
फलश्रुति 8
समापन 1
परिचय
भैरवतन्त्र में भैरव एवं भैरवी के संवाद रूप में वर्णित यह श्रीछिन्नमस्ताकवचम् दस महाविद्याओं में से एक — छिन्नमस्ता (प्रचण्डचण्डिका) की उपासना का ‘त्रैलोक्यविजय’ नामक रक्षाकवच है। इसमें हुं, ह्रीं, श्रीं, ऐं आदि बीजमन्त्रों तथा वज्रवैरोचनीय मूलमन्त्र द्वारा सिर से चरण तक अङ्ग-प्रत्यङ्ग की रक्षा, और एकलिङ्गा, योगिनी, डाकिनी, महाभैरवी आदि अष्टशक्तियों तथा बीजों द्वारा दसों दिशाओं का दिग्बन्ध किया गया है।
यहाँ संस्कृत मूल पाठ प्रामाणिक स्रोत से अक्षरशः दिया गया है; अर्थ व्याख्यात्मक है। बीजमन्त्रों का शब्दशः अनुवाद सम्भव नहीं। धार्मिक-विद्वत् समीक्षा अपेक्षित।
स्रोत 2
- Sanskrit Documents — श्रीछिन्नमस्ताकवचम् — chhinnamastaakavach, proofread by Ravin Bhalekar
संस्कृत मूल पाठ प्रामाणिक स्रोत से अक्षरशः; बीजमन्त्रों का शब्दशः अनुवाद सम्भव नहीं, अर्थ व्याख्यात्मक। धार्मिक समीक्षा अपेक्षित।
- HinduNidhi — Shri Chinnamasta Kavacham (English) — transliteration and structural meaning reference (anga-nyasa & directional protection)
अर्थ वेद पथ संपादकीय टीम द्वारा संकलित एवं संपादित हैं, और सामग्री की क्रमशः समीक्षा की जा रही है।