श्रीआदित्यकवचम्
विनियोग 1
ध्यानम् 2
कवच 6
फलश्रुति 7
समापन 1
परिचय
श्रीआदित्यकवचम् भगवान् सूर्य (आदित्य) की आराधना का रक्षा-कवच है, जिसे स्कन्दपुराण के गौरीखण्ड में महर्षि याज्ञवल्क्य द्वारा प्रोक्त माना जाता है। इसमें साधक सूर्य के विविध नामों — घृणि, आदित्य, प्रभाकर, भानु, भास्कर, मार्ताण्ड आदि — का स्मरण कर शिर से चरण तक अपने प्रत्येक अंग की रक्षा का वरण करता है, और अन्त में इसके पाठ-श्रवण का पुण्यफल कहा गया है।
संस्कृत मूल पाठ प्रामाणिक स्रोत से अक्षरशः प्रस्तुत है; अर्थ व्याख्यात्मक हैं। शुद्ध उच्चारण एवं विधि हेतु योग्य आचार्य का मार्गदर्शन श्रेयस्कर है।
स्रोत 2
- Sanskrit Documents — आदित्यकवचम् — Adityakavacham, proofread ITRANS
संस्कृत मूल पाठ इसी प्रामाणिक स्रोत से अक्षरशः; अर्थ व्याख्यात्मक। धार्मिक समीक्षा अपेक्षित।
- Hindupedia — Adithya Kavacham — English verse-by-verse meaning (body-part protection + phalashruti)
अर्थ वेद पथ संपादकीय टीम द्वारा संकलित एवं संपादित हैं, और सामग्री की क्रमशः समीक्षा की जा रही है।