शांति मंत्र - ॐ सह नाववतु
आकार
प्रदर्शन
ॐ सह नाववतु।
सह नौ भुनक्तु।
सह वीर्यं करवावहै।
तेजस्वि नावधीतमस्तु।
मा विद्विषावहै।
ॐ शान्तिः शान्तिः शान्तिः॥
ॐ सह नाववतु।
सह नौ भुनक्तु।
सह वीर्यं करवावहै।
तेजस्वि नावधीतमस्तु।
मा विद्विषावहै।
ॐ शान्तिः शान्तिः शान्तिः॥
शब्दार्थ
ॐ परम पवित्र ध्वनि
सह एक साथ, मिलकर
नौ हम दोनों को
अवतु रक्षा करें
भुनक्तु पोषण करें
वीर्यम् सामर्थ्य, शक्ति
करवावहै हम दोनों करें
तेजस्वि तेजस्वी, प्रभावशाली
अधीतम् अध्ययन किया हुआ
अस्तु होवे, हो
मा नहीं, मत
विद्विषावहै हम दोनों द्वेष करें
शान्तिः शांति
अर्थ
“ॐ सह नाववतु” शांति मंत्र तैत्तिरीय उपनिषद से लिया गया है। यह गुरु और शिष्य दोनों द्वारा अध्ययन के आरंभ और समापन पर बोला जाता है। यह मंत्र गुरु-शिष्य के बीच सामंजस्य, सहयोग और पारस्परिक विकास की प्रार्थना है।
संपूर्ण अर्थ: “ॐ! वह (ब्रह्म) हम दोनों (गुरु और शिष्य) की एक साथ रक्षा करें। वह हम दोनों का एक साथ पोषण करें। हम दोनों मिलकर सामर्थ्य प्राप्त करें। हमारा अध्ययन तेजस्वी हो। हम एक-दूसरे से द्वेष न करें। ॐ शांति, शांति, शांति।“
लाभ
- विद्या प्राप्ति: अध्ययन में एकाग्रता और सफलता प्राप्त होती है
- गुरु-शिष्य सामंजस्य: गुरु और शिष्य के बीच सद्भाव बढ़ता है
- मानसिक शांति: तीनों प्रकार के तापों (आधिदैविक, आधिभौतिक, आध्यात्मिक) से शांति
- बुद्धि वृद्धि: ज्ञान ग्रहण करने की शक्ति बढ़ती है
- नकारात्मकता का नाश: ईर्ष्या और द्वेष से मुक्ति
जप विधि
- किसी भी अध्ययन या शिक्षा के आरंभ में इस मंत्र का पाठ करें
- गुरु और शिष्य दोनों मिलकर इस मंत्र का उच्चारण करें
- प्रातःकाल प्रार्थना में इसे सम्मिलित करें
- गुरु पूर्णिमा पर इस मंत्र का विशेष महत्व है
- “शांति” तीन बार कहा जाता है - आधिदैविक, आधिभौतिक और आध्यात्मिक तापों की शांति के लिए
जप गणक
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अर्थ वेद पथ संपादकीय टीम द्वारा संकलित एवं संपादित हैं, और सामग्री की क्रमशः समीक्षा की जा रही है।