श्रीधूमावतीकवचम्
प्रस्तावना 3
विनियोग 1
कवच 6
फलश्रुति 1
समापन 1
परिचय
दशमहाविद्याओं में से एक धूमावती — विधवा, वृद्धा एवं धूम्रवर्णा देवी — की उपासना का यह तन्त्रोक्त रक्षाकवच भैरव एवं भैरवी के संवाद के रूप में कहा गया है। इसमें ‘धूं’ बीज तथा देवी के अनेक नामों (धूमा, वती, दीर्घा, मलिनाम्बरा, शूर्पहन्ता, भीमा, विवर्णा, चञ्चला आदि) द्वारा शिर से पाद तक अंग-अंग की एवं समस्त शत्रुओं के नाश की रक्षा का आवाहन किया गया है।
यहाँ संस्कृत मूल पाठ प्रामाणिक स्रोत से अक्षरशः दिया गया है; अर्थ व्याख्यात्मक है। बीजमन्त्रों का शब्दशः अनुवाद सम्भव नहीं। धार्मिक-विद्वत् समीक्षा अपेक्षित।
स्रोत 2
- Sanskrit Documents — श्रीधूमावतीकवचम् — dhUmAvatIkavacham, proofread by Ravi S. Ramphal
संस्कृत मूल पाठ प्रामाणिक स्रोत से अक्षरशः; बीजमन्त्रों का शब्दशः अनुवाद सम्भव नहीं, अर्थ व्याख्यात्मक। धार्मिक समीक्षा अपेक्षित।
- Siddhaguru — Sri Dhumavati Mahavidya Kavacham (English) — anga-nyasa body-part protection mapping and goddess epithets
अर्थ वेद पथ संपादकीय टीम द्वारा संकलित एवं संपादित हैं, और सामग्री की क्रमशः समीक्षा की जा रही है।