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वेद पथ वैदिक ज्ञान का पथ

श्रीदत्तात्रेयवज्रकवचम्

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प्रदर्शन

मङ्गलाचरण 1

पूर्वपीठिका 27

विनियोग 1

न्यास 2

ध्यानम् 16

कवच 22

न्यास 3

फलश्रुति 27

समापन 3

परिचय

श्रीदत्तात्रेयवज्रकवचम् भगवान् दत्तात्रेय — ब्रह्मा, विष्णु एवं महेश के संयुक्त त्रिमूर्ति-अवतार — का अत्यन्त प्रभावशाली रक्षाकवच है, जो रुद्रयामल के हिमवत्खण्ड में उमा-महेश्वर संवाद के रूप में वर्णित है। इसमें साधक के मस्तक से चरण तक प्रत्येक अंग तथा दसों दिशाओं की रक्षा भगवान् दत्तात्रेय से प्रार्थित की गई है। फलश्रुति में इसे धर्म-अर्थ-काम-मोक्ष का साधन तथा रोग, शत्रु एवं भय से रक्षा का उपाय बताया गया है।

संस्कृत मूल पाठ प्रामाणिक स्रोत से अक्षरशः प्रस्तुत है; अर्थ व्याख्यात्मक हैं। शुद्ध उच्चारण एवं विधि हेतु योग्य आचार्य का मार्गदर्शन श्रेयस्कर है।

स्रोत 2

अर्थ वेद पथ संपादकीय टीम द्वारा संकलित एवं संपादित हैं, और सामग्री की क्रमशः समीक्षा की जा रही है।