श्रीभुवनेश्वरीकवचम्
प्रस्तावना 4
विनियोग 1
अङ्गन्यास 7
महाविद्या रक्षा 4
दिग्बन्ध 7
फलश्रुति 8
समापन 1
परिचय
श्रीरुद्रयामल तन्त्र में देवी और ईश्वर के संवाद के रूप में वर्णित यह श्रीभुवनेश्वरीकवच ‘त्रैलोक्यमङ्गल’ नाम से प्रसिद्ध है। दश महाविद्याओं में चतुर्थ भुवनेश्वरी (माया-आदिशक्ति) की उपासना का यह रक्षाकवच माया-बीज ‘ह्रीं’, वाग्-बीज ‘ऐं’, श्री-बीज ‘श्रीं’ एवं काम-बीज ‘क्लीं’ आदि के न्यास से सिर से पाँव तक अङ्ग-अङ्ग की रक्षा करता है, और अन्नपूर्णा, जयदुर्गा, महिषमर्दिनी, पद्मावती, अश्वारूढा, त्वरिता तथा बाला-भैरवी की मन्त्र-विद्याओं से दिशाओं में रक्षा करता है।
यहाँ संस्कृत मूल पाठ प्रामाणिक स्रोत से अक्षरशः दिया गया है; अर्थ व्याख्यात्मक है। बीजमन्त्रों का शब्दशः अनुवाद सम्भव नहीं। धार्मिक-विद्वत् समीक्षा अपेक्षित।
स्रोत 2
- Sanskrit Documents — श्रीभुवनेश्वरीकवचम् (त्रैलोक्यमङ्गलम्) — bhuvaneshvariikavacham, proofread by Ravin Bhalekar
संस्कृत मूल पाठ प्रामाणिक स्रोत से अक्षरशः; बीजमन्त्रों का शब्दशः अनुवाद सम्भव नहीं, अर्थ व्याख्यात्मक। धार्मिक समीक्षा अपेक्षित।
- Manblunder — Bhuvanesvari Trailokya Mangala Kavacham (commentary) — verse-wise bija-nyasa and directional-deity explanation
अर्थ वेद पथ संपादकीय टीम द्वारा संकलित एवं संपादित हैं, और सामग्री की क्रमशः समीक्षा की जा रही है।