श्रीबगलामुखीकवचम्
प्रस्तावना 3
विनियोग 1
कवच 6
फलश्रुति 4
समापन 1
परिचय
तन्त्रों में वर्णित यह बगलामुखीकवच दस महाविद्याओं में से एक पीताम्बरा बगलामुखी की उपासना का रक्षाकवच है। बगलामुखी शत्रु की जिह्वा एवं वाणी को स्तम्भित करने वाली देवी हैं, जो एक हाथ में गदा तथा दूसरे में शत्रु की जीभ धारण करती हैं। इस कवच में शिर, ललाट, मुख, कण्ठ, उदर, नाभि, गुह्य, हस्त तथा सर्वांग की रक्षा हेतु देवी के विविध रूपों — एकाक्षरी, वैरिनाशिनी, मोक्षदायिनी, परात्परा, शिवनर्तकी, मातङ्गी, कालिका एवं शूलिनी — का आवाहन किया गया है, तथा सन्तान, स्त्री, भ्राता व पिता की रक्षा की प्रार्थना है।
यहाँ संस्कृत मूल पाठ प्रामाणिक स्रोत से अक्षरशः दिया गया है; अर्थ व्याख्यात्मक है। बीजमन्त्रों का शब्दशः अनुवाद सम्भव नहीं। धार्मिक-विद्वत् समीक्षा अपेक्षित।
स्रोत 2
- Sanskrit Documents — बगलामुखीकवचम् — bagalAmukhIkavacham, proofread by Nat Natarajan
संस्कृत मूल पाठ प्रामाणिक स्रोत से अक्षरशः; बीजमन्त्रों का शब्दशः अनुवाद सम्भव नहीं, अर्थ व्याख्यात्मक। धार्मिक समीक्षा अपेक्षित।
- Manblunder — Sri Bagalamukhi Kavacham (English commentary) — anga-nyasa body-part mapping and explanatory meaning
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